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गति पकड़ रहा टेलीमेडिसिन सेवाओं का विस्तार

  • 97 सीएचओ और 67 एमबीबीएस चिकित्सकों की आईडी बनी
  • शासन ने अब जिले में तैनात विशेषज्ञ चिकित्सकों की सूची मांगी
    गाजियाबाद।
    टेलीमेडिसिन सेवाविस्तार पर काम चल रहा है। जिले में अब तक 97 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) और 67 एमबीबीएस चिकित्सकों की आईडी बन चुकी है। शासन से जिले में तैनात विशेषज्ञ चिकित्सकों की सूची मांगी गई है ताकि उनकी भी आईडी बनाई जा सके और टेलीमेडिसिन सेवाओं से जोड़ा जा सके। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डा. भवतोष शंखधर ने कहा कि टेलीमेडिसिन सेवाएं हर कार्य दिवस में सुबह नौ से चार बजे तक उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्ले स्टोर से ई संजीवनी एप डाउनलोड कर घर बैठे इन सेवाओं का लाभ लिया जा सकता है, इसके अलावा अपने नजदीकी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (एचडब्लूसी) पर जाकर भी टेली मेडिसिन सेवाओं का नाभ ले सकते हैं।
    जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) अनुराग भारती ने बताया- वर्तमान में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर तैनात सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) द्वारा उपलब्ध कराई जा रही टेली कंसलटेशन सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। एएनएम, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर बैठे चिकित्सक और जिला व प्रदेश स्तर पर बैठे विशेषज्ञ चिकित्सक टेलीमेडिसिन सेवाओं से जोड़े जा रहे हैं, ताकि घर बैठकर या फिर नजदीकी एचडब्लूसी जाकर विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श प्राप्त किया जा सके। इससे जिला स्तरीय अस्पतालों पर जहां एक ओर भीड़ कम होगी वहीं दूसरी ओर लाभार्थी को जिला अस्पताल तक आने जाने से भी मुक्ति मिलेगी। यही हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की पूरी ?परिकल्पना है।
    डा. भवतोष शंखधर ने बताया कि दूरदराज के क्षेत्रों में भी विशेषज्ञ परामर्श उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए सभी इकाइयों पर तैनात चिकित्सकों के साथ ही विशेषज्ञ और प्रशासनिक जिम्मेदारी निभा रहे चिकित्सकों की भी लॉगिन आईडी बनाई जाएगी। उन्होंने बताया – हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला चिकित्सालयों, मेडिकल कॉलेज और भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों (एम्स) में स्थापित टेलीमेडिसिन हब से संबद्ध किया गया है। रोगी को बस अपने नजदीकी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर तक जाने की जरूरत है, जहां वीडियो कॉफ्रेंसिंग के माध्यम से चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराया जाता है और जरूरी परीक्षण कर जांच रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड की जाती है। उसके बाद चिकित्सक/ विशेषज्ञ की सलाह पर औषधियां व अन्य सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।

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