आई.टी.एस., मोहन नगर, गाजियाबाद में “आई.टी.एस संवाद श्रृंखला” के अंतर्गत “युवा विकसित भारत घोषणापत्र” विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित


गाजियाबादl आई.टी.एस., मोहन नगर, गाजियाबाद में “आई.टी.एस संवाद श्रृंखला” के अंतर्गत “युवा विकसित भारत घोषणा पत्र” विषय पर एक प्रेरणादायक व्याख्यान एवं संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर तुहिन सिन्हा, बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता, सुप्रसिद्ध लेखक एवं स्तम्भकार विशिष्ट वक्ता के रूप में उपस्थित थे जिन्होंने विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों को संबोधित किया। कार्यक्रम का औपचारिक शुभारम्भ आई.टी.एस – द एजुकेशन ग्रुप के वाईस चेयरमैन अर्पित चड्ढा, विशिष्ट आमंत्रित वक्ता तुहिन सिन्हा, आई.टी.एस – द एजुकेशन ग्रुप के निदेशक (पी आर) सुरिंदर सूद , आई.टी.एस, मोहन नगर, गाज़ियाबाद के निदेशक डॉ सुनील पांडेय, आई.टी.एस स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट के निदेशक डॉ अजय कुमार एवं आई.टी.एस स्नातक परिसर की प्राचार्या डॉ नैंसी शर्मा ने माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष डीप प्रज्जवलित कर किया। आई.टी.एस – द एजुकेशन ग्रुप के वाईस चेयरमैन श्री अर्पित चड्ढा ने अपने सम्बोधन में कहा कि भारत के पास विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी है, जो देश की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि यदि युवा अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाएँ और नवाचार, उद्यमिता तथा अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ें, तो भारत को वैश्विक स्तर पर नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि उन्हें नई तकनीकों, स्टार्टअप संस्कृति और वैश्विक दृष्टिकोण के साथ अपने करियर का निर्माण करना चाहिए। मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुए श्री तुहिन सिन्हा जी ने युवा विकसित भारत घोषणापत्र की अवधारणा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समावेशन, तकनीकी प्रगति, नवाचार और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में एक व्यापक दृष्टि प्रस्तुत करता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाएँ और अपने ज्ञान, कौशल तथा रचनात्मक सोच के माध्यम से भारत को एक सशक्त और समृद्ध राष्ट्र बनाने में योगदान दें। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के युवा यदि सही दिशा और अवसर प्राप्त करें, तो वे न केवल देश बल्कि पूरे विश्व में परिवर्तन का नेतृत्व कर सकते हैं। इसके पूर्व अपने स्वागत सम्बोधन में डॉ. सुनील कुमार पांडेय ने कहा कि भारत आज एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, जहाँ युवा शक्ति देश की प्रगति की सबसे बड़ी प्रेरक शक्ति बनकर उभर रही है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि ज्ञान, नवाचार, तकनीकी दक्षता और नैतिक मूल्यों के समन्वय से ही भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने का सपना साकार किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका केवल शिक्षा प्रदान करना नहीं है, बल्कि युवाओं में नेतृत्व, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण की भावना विकसित करना भी है।आई.टी.एस – द एजुकेशन ग्रुप के निदेशक (पी आर) सुरिंदर सूद ने अपने सम्बोधन में विश्सिहत वक्त का धन्यवाद करते हुए कहा की आज के परिप्रेक्ष्य में विकसित भारत मिशन में युवाओं की भूमिका को रेखांकित किया।कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों ने भी वक्ता के साथ संवाद करते हुए अपने विचार और प्रश्न साझा किए, जिससे यह सत्र अत्यंत प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक बन गया।इस अवसर पर आई.टी.एस स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के निदेशक डॉ. अजय कुमार, आई.टी.एस यूजी कैंपस की प्राचार्या डॉ. नैन्सी शर्मा, संस्थान के संकाय सदस्य, स्टाफ तथा 1000 से अधिक विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। वक्ताओं ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान, कौशल, नवाचार और सकारात्मक सोच के माध्यम से भारत को वर्ष 2047 तक एक सशक्त, समृद्ध और विकसित राष्ट्र बनाने के राष्ट्रीय संकल्प में सक्रिय भूमिका निभाएँ।



