गाजियाबाद

आई.टी.एस डेंटल कॉलेज में कॉर्टिकल इंप्लांटोलॉजी पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित

गाजियाबाद। आई.टी.एस डेंटल कॉलेज, गाजियाबाद के ओरल इंप्लांटोलॉजी विभाग द्वारा 24 से 25 फरवरी, 2026 तक कॉर्टिकल इंप्लांटोलॉजी पर एक ज्ञानवर्धक एवं प्रायोगिक हैंड्स-आॅन कार्यशाला का आयोजन सफलतापूर्वक किया गया। इस कार्यशाला में 56 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें संस्थान के दंत चिकित्सक एवं एम.डी.एस के विद्यार्थी शामिल थे, जो उन्नत इंप्लांटोलॉजी तकनीकों में अपने क्लीनिकल कौशल को विकसित करने के इच्छुक थे।
कार्यशाला प्रतिष्ठित कॉर्टिको-बेसल इम्प्लांटोलॉजिस्ट प्रो. डॉ. सचिन देव, डॉ. आशीष सेठी एवं डॉ. हरमनप्रीत कौर द्वारा संचालित की गई। उन्होंने कॉर्टिकल इंप्लांटोलॉजी तथा इमीडिएट लोडिंग प्रोटोकॉल्स पर प्रतिभागियों के साथ अपना अनुभव साझा किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बेसल एवं कॉर्टिकल इंप्लांटोलॉजी की उन्नत अवधारणाओं को स्पष्ट करना था, जिससे जटिल परिस्थितियों में बेहतर उपचार किया जा सकें। यह कार्यक्रम आई.टी.एस-द एजुकेशन ग्रुप के वाईस चेयरमैन, अर्पित चड्ढा के सहयोग से आयोजित किया गया। अर्पित चड्ढा का मानना है कि दंत चिकित्सकों को आधुनिक एवं साक्ष्य-आधारित उपचार पद्धतियों से निरंतर अद्यतन रहना चाहिए। संस्थान द्वारा इम्प्लांट डेंटिस्ट्री के माध्यम से मौखिक पुनर्वास के क्षेत्र में उत्कृष्ट उपचार प्रदान किया जाता है तथा कॉर्टिकल इंप्लांटोलॉजी विशेष रूप से कमजोर हड्डी संरचना वाले मरीजों के लिए प्रभावी एवं विश्वसनीय समाधान प्रदान करती है। कार्यशाला के पहले दिन प्रो. डॉ. सचिन देव द्वारा प्रतिभागियों को इम्प्लांट प्लेसमेंट एवं रिस्टोरेशन के सिद्धांतों पर विस्तृत व्याख्यान दिया गया। डॉ. आशीष सेठी ने प्रतिभागियों को चरणबद्ध क्लीनिकल प्रोटोकॉल एवं रोगी चयन के मानदंडों से अवगत कराया। इसके अतिरिक्त डॉ. हरमनप्रीत कौर ने प्टेरीगॉइड इम्प्लांट्स की पेटेंटेड फ्लैपलेस तकनीक पर विशेष व्याख्यान प्रस्तुत किया, जिसमें बिना बोन ग्राफ्टिंग के पोस्टीरियर-मैक्सिलरी क्षेत्र के पुनर्वास के लाभों पर प्रकाश डाला गया। दिन के अंत में डमी मॉडल पर हैंड्स-आॅन प्रशिक्षण आयोजित किया गया, जिससे प्रतिभागियों को इम्प्लांट प्लेसमेंट की तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ। इसके पश्चात मरीजों पर लाइव सर्जरी का प्रदर्शन भी किया गया। दूसरे दिन का मुख्य फोकस कॉर्टिकल इंप्लांटोलॉजी में प्रोस्थेटिक विचार एवं प्रोस्थेसिस कॉन्सेप्ट पर रहा, जिस पर डॉ0 आशीष सेठी ने विस्तार से चर्चा की। प्रतिभागियों को क्लीनिकल वर्कफ्लो, प्रोस्थेटिक प्लानिंग तथा इमीडिएट लोडिंग प्रोटोकॉल्स का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला का मुख्य आकर्षण विशेषज्ञों की निगरानी में मरीजों पर इम्प्लांट प्लेसमेंट का हैंड्स-आॅन सत्र रहा, जिससे प्रतिभागियों को वास्तविक समय में क्लीनिकल अनुभव प्राप्त हुआ और कॉर्टिकल इम्प्लांट प्रक्रियाओं को आत्मविश्वास के साथ करने की प्रेरणा मिली।
संस्थान सदैव उन्नत उपचार पद्धतियों को अपनाने एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। संस्थान का ओरल इंप्लांटोलॉजी विभाग अत्याधुनिक अवसंरचना एवं तकनीक से सुसज्जित है, जो विद्यार्थियों एवं चिकित्सकों को वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण प्रदान करता है। इस कार्यक्रम के माध्यम से सभी प्रतिभागियों को सर्वश्रेष्ठ कॉर्टिकल इंप्लांटोलॉजी उपचार के बारे में ज्ञान प्राप्त हुआ जिसके लिये सभी ने आई.टी.एस-द एजुकेशन ग्रुप के चेयरमैन डॉ आर.पी. चड्ढा तथा वाईस चेयरमैन अर्पित चड्ढा को धन्यवाद दिया।

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