चर्चा-ए-आम

मौतों पर घंटा बजा रहे हैं मंत्री जी !

कमल सेखरी

एक लंबे समय से राजनीति के सभी मापदंड और आचरण को तोड़कर हर रोज देश को पीड़ा पहुंचाने वाले हमारे सियासी नेताओं ने आम जनता के प्रति अपनी संवेदनशीलता भी खत्म कर दी। देश के सबसे स्वच्छ शहर आंके जाने वाले मध्यप्रदेश के इंदौर नगर में प्रदूषित पानी पीकर 14 लोगों की मौत हो गई और लगभग 15 सौ लोग प्रदूषित जल सेवन के प्रभाव से त्रस्त उपचार के लिए विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं जिनमें से कुछ की हालत चिंताजनक बताई जाती है। भारत को विश्व की एक बड़ी शक्ति बनाकर चौथे स्थान पर लाकर खड़ा करने के सभी दावे उस समय खोखले लगने लगे जब मीडिया में इंदौर नगरी के प्रभावित क्षेत्र भागीरथपुरम के दृश्य विभिन्न टीवी चैनलों पर दिखाए गए। इनमें सबसे अधिक पीड़ादायक दृश्य वो लगा जिसमें एक टीवी पत्रकार और घटित घटना से संबंधित शहर विकास मंत्रालय के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बीच तीखी झड़प हुई। पत्रकार ने अपना दायित्व निभाते हुए कुछ तीखे प्रश्न पूछे जिसका जवाब देने में मंत्री जी निरुत्तर थे और यकायक आक्रोष में आ गए और आचरण की सभी सीमाएं पार करते हुए पत्रकार के साथ अश्लील भाषा में तू-तू मैं मैं तक की नोकझोंक में उतर आए। मामला यह था कि मंत्री जी प्रदूषित जल सेवन के कारण मौतों का आंकड़ा केवल चार बता रहे थे जबकि पत्रकार इसकी संख्या दस बताकर अपने दावे की पुष्टि कर रहा था। इस नोकझोंक में मंत्री जी ने जो आपा खोया उससे समूचा देश ही पीड़ित नजर आया कि इन सियासी नेताओं में लेशमात्र भी आम जनता के प्रति कोई संवेदनशीलता बाकी नहीं रह गई। इस संबंध में यह भी उल्लेखनीय है कि भागीरथपुरा में प्रदूषित जल की यह सप्लाई पिछले कई महीनों से यूं ही होती चली आ रही थी। सात माह पूर्व अगस्त के महीने में इस त्रुटि को ठीक करने के लिए वहां के नगर निगम ने टेंडर भी पास कर दिया था लेकिन सात महीने बीत जाने के बाद भी वहां यह कार्य आरंभ नहीं हो पाया। पीड़ित लोगों का कहना है कि कुछ साल पहले उस क्षेत्र में डाले गए सीवर लाइन के पाइपों के साथ पीने वाले पानी के पाइप भी साथ ही बिछा दिये गये और लगभग एक साल पहले सीवर के पाइप में लीकेज होने की वजह से वो पानी पेयजल की पाइपलाइन में भी जाना शुरू हो गया। अब जब प्रदूषित जल की यह मात्रा पेयजल के पाइप में काफी अधिक समाहित हो गई तब इस पानी से क्षेत्र के लोग प्रभावित होना शुरू हो गए। पिछले दस दिन में ही प्रदूषित पानी का सेवन करके 14 लोगों की जान जा चुकी है और 15 सौ से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती कराने पड़े हैं। बताया जाता है कि क्षेत्र में संक्रामक रोग हैजा फैल गया है जिससे लोग बड़ी संख्या में प्रभावित हो रहे हैं। इतना कुछ होने पर नगर विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का मीडिया के साथ इस तरह का व्यवहार करना और अश्लील भाषा का इस्तेमाल करना सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। मंत्री जी ने अपने शब्दों में इतना तक कहा फोकट की बातें ना करो , तुम्हार आंकड़े घंटा ठीक हैं। मध्यप्रदेश में विपक्ष के नेता और मीडियाकर्मी मिलकर दुर्व्यवहार करने वाले मंत्री का इस्तीफा मांग रहे हैं। हम भी जनहित में इतनी मजबूती और प्रबलता से निरंकुश सत्ताधरी नेता से संवाद करने वाले पत्रकार को सलाम करते हैं और आशा करते हैं कि मीडिया के अन्य माध्यम भी शासन की ऐसी निरंकुशता के खिलाफ मजबूती से खड़े होकर खुलकर बोलेंगे तभी देश को आज के परिवर्तित सियासी माहौल में कुछ राहत मिल पाएगी।

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