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गोरखपुर, फिराक गोरखपुरी, प्रेमचंद, प्रो. त्रिपाठी, मिश्र जैसे साहित्यकारों की भूमि है: योगी

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अच्छी पुस्तक व्यक्ति की सबसे सही मार्गदर्शक और सच्ची साथी होती है। भारत की श्रवण परम्परा जो गुरु-शिष्य की परम्परा थी, उसे हमारे ऋषि-मुनियों ने लिपिबद्ध कर आने वाली पीढ़ियों के लिए पुस्तकीय ज्ञान के माध्यम से संरक्षित करने का कार्य किया। गोरखपुर पुस्तक महोत्सव आगामी 9 दिनों तक विभिन्न प्रकार की रचनात्मक पुस्तकों का केन्द्र बनेगा और गोरखपुर सहित पूर्वी उत्तर प्रदेशवासियों को उनकी रुचि की पुस्तकें सस्ते में खरीदने का बेहतरीन प्लेटफॉर्म सिद्ध होगा।
मुख्यमंत्री दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास भारत द्वारा आयोजित गोरखपुर पुस्तक महोत्सव का शुभारम्भ करने के उपरान्त अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। गोरखपुर पुस्तक महोत्सव एक से नौ नवम्बर, 2025 तक आयोजित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार पठन-पाठन के बारे में लोगों को प्रेरित करते रहे हैं। उनका मानना है कि देश तभी आगे बढ़ता है, जब लोग पढ़ते हैं। लोगों में पढ़ने की जिज्ञासा होती है। गोरखपुर की धरती इसलिए महत्वपूर्ण है। विगत 100 वर्षां से अधिक समय से गीता प्रेस भारत की सनातन धर्म से जुड़ी पुस्तकों को सस्ती दर पर देश-दुनिया को उपलब्ध कराने का कार्य करता आ रहा है। वर्ष 1926 से गोरखपुर से प्रारम्भ कल्याण मासिक पत्रिका सनातन धर्मावलम्बियों द्वारा पढ़ी जाती रही है।
गोरखपुर की धरती से सम्बन्ध रखने वाले फिराक गोरखपुरी, इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रोफेसर व बहुत अच्छे साहित्यकार थे। प्रख्यात उपन्यासकार प्रेमचंद ने भी गोरखपुर की धरती को अपनी कर्मभूमि बनाकर कई महत्वपूर्ण कृतियों को सृजित किया था। आज प्रो. विश्वनाथ त्रिपाठी जैसे साहित्यकार हम सबके बीच हैं। रामदरश मिश्र आज हमारे बीच में नहीं है, लेकिन उनकी साहित्य सेवा लोगों को सदैव मार्गदर्शन व प्रेरणा देने का कार्य करेगी। मुख्यमंत्री ने प्रख्यात साहित्यकार रामदरश मिश्र की स्मृतियों को नमन करते हुए प्रदेश सरकार की ओर से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि साहित्यकार की कृति को जब अधिक से अधिक लोग पढ़ते हैं, तब वह उत्साहित होता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम धैर्य खोते हैं, तभी फेल होते हैं। व्यक्ति जब भी हिम्मत से काम लेता है और चुनौतियों से निपटने के लिए स्वयं को तैयार करता है, तो अधिकांश समस्याओं का समाधान स्वत: हो जाता है। अच्छे प्रयास से अच्छी सफलता प्राप्त होती है। प्रयास करने में कोताही करने पर सफलता के मानक भी उसी के अनुसार तय होते है। हमें जीवन में अच्छी पुस्तकों को क्रय करने की दिशा में प्रयास करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पुस्तक महोत्सव में विभिन्न प्रकार की रचनात्मक पुस्तकों के 200 से अधिक स्टॉलों पर लोगों को अपनी रुचि की पुस्तक चयन कर सस्ते में खरीदने का एक बेहतरीन अवसर प्राप्त होगा। हमारा प्रयास होना चाहिए कि गोरखपुर विश्वविद्यालय के साथ-साथ विभिन्न संस्थाओं के लोग अलग-अलग समय में यहां आकर गोरखपुर पुस्तक महोत्सव का अवलोकन करें। महोत्सव के दौरान विभिन्न मुद्दों पर परिचर्चा हो। यहां नई कृतियों और पुस्तकों के विमोचन कार्यक्रम और समाज जीवन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विद्वानों के विचारों को सुनने व उनके अनुभवों को जानने का एक अवसर प्राप्त होगा। महोत्सव में सायंकालीन सत्र में लोक कला और लोक गाथा से सम्बन्धित सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज डबल इंजन सरकार वर्तमान पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए पुस्तकालयों की एक नई श्रृंखला की स्थापना कर रही है। प्रदेश में 57 हजार 600 से अधिक ग्राम पंचायतों में ग्राम सचिवालय की स्थापना का कार्य या तो पूरा हो चुका है या लगभग अंतिम चरण में है। सभी पूर्ण हो चुके ग्राम सचिवालयों में एक कक्ष का प्रयोग केवल पुस्तकालय के लिए किया जायेगा। पुस्तकालय के लिए अच्छी पुस्तकों को क्रय करने और गांव के बच्चों व बुजुर्गों के लिए अपने समय का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए एक व्यवस्था बनायी गयी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत संचालित एक लाख 56 हजार से अधिक विद्यालयों में से एक लाख 36 हजार विद्यालयों का आॅपरेशन कायाकल्प के माध्यम से पुनरुद्धार कराया जा चुका है और प्रत्येक विद्यालय में पुस्तकालय की व्यवस्था की गई है। डिजिटल लाइब्रेरी व अच्छी पुस्तकें क्रय करके विद्यालय में रखा गया है। विद्यालय तथा ग्राम सभा के स्तर पर भी प्रयास करके बच्चों के मन में पढ़ने की परम्परा को पुनर्जीवित करने के कार्य को आगे बढ़ाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति सकारात्मक लेखन कर रहा है, तो वह व्यक्ति सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर है। इस सकारात्मक ऊर्जा का लाभ समाज को मिलता है और समाज ऐसे लेखन से प्रेरित होता है। जब हम पुरातन और आधुनिकता में समन्वय करेंगे, तभी विकास दिखाई देगा, जो हमारे लिए सार्थक होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम पुस्तक व्यवस्था से स्वयं को दूर न करें। बच्चे स्मार्टफोन में समय व्यतीत करने के बजाय पाठ्यक्रम की पुस्तकों के साथ ही रचनात्मकता, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की जानकारी देने वाली, पर्यावरण व आधुनिक तकनीक से जुड़ी पुस्तकों का अध्ययन करें। इससे देश और दुनिया के बारे में जानने का अवसर मिलेगा। इन पाठ्येत्तर पुस्तकों के अध्ययन से प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एक सुदृढ़ आधार तैयार होगा। इससे आने वाले समय में हमें बहुत सहायता प्राप्त होगी। जरूरत के अनुसार ही स्मार्ट फोन का इस्तेमाल करें। आज प्रत्येक कार्य के लिए स्मार्टफोन का प्रयोग हो रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हमें अपने बच्चों में विपरीत परिस्थितियों से जूझने का जज्बा पैदा करना चाहिए। हमें बच्चों को प्रारम्भ से संस्कार देने चाहिए। देश व दुनिया में बच्चों व युवाओं में डिप्रेशन की समस्या विकराल रूप लेती जा रही है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री जी ने देश के युवाओं के लिए एग्जाम वॉरियर्स नाम से स्वयं एक पुस्तक लिखी है। यह पुस्तक परीक्षाओं की तैयारी पर आधारित है, जो छोटे-छोटे कमेन्ट व उद्धरणों के साथ बहुत सहज और सरल भाषा में लिखी गयी है। पठन-पाठन से जुड़े बच्चे व युवा एग्जाम वॉरियर्स पुस्तक अवश्य पढ़ें। यह पुस्तक परीक्षाओं के लिए मानसिक रूप से सम्बल देने के साथ ही कठिन समय में व्यक्ति को चुनौती का सामाना करने का मार्गदर्शन भी प्रदान करती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों ने पर्यावरण के साथ खिलवाड़ किया, जिसका परिणाम आज प्रत्येक व्यक्ति भुगत रहा है। उन्हांने दिल्ली के पर्यावरण का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसी स्थिति अपने गांव, कस्बे, नगर में न होने पाये, इसके लिए सावधानी बरतनी है। इन प्रयासों से हम भारतीय संस्कृति के उस संकल्प के साथ जुड़ सकेंगे, जिसमें हमारी ऋषि परम्परा ने कहा था कि ह्यमाता भूमि पुत्रोहम पृथ्विव्य:। यह भाव आपको स्वत: आपके द्वारा किये जाने वाले प्रयास के माध्यम से झलकेगा, तो आपको आनन्द की अनुभूति होगी कि मैं भी पर्यावरण को बचाने में अपना योगदान दे पा रहा हूं। व्यक्ति कभी सुई के लिए लालायित था और आज वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व मॉडर्न टेक्नोलॉजी के माध्यम से बहुत कुछ अर्जित कर सकता है। स्मार्टफोन के बजाय अच्छी पुस्तकें पढ़ने से आगे का मार्ग स्वत: दिखाई देगा।
कार्यक्रम को सांसद रवि किशन शुक्ल, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास भारत के अध्यक्ष प्रो. मिलिन्द सुधाकर मराठे व दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टण्डन ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों सहित शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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