स्वास्थ्य

कम समय में अधिक से अधिक टीबी मरीज खोजने के प्रयास

  • सैंपल ट्रांसपोर्टर हर दिन जांच केंद्र तक पहुंचाएंगे बलगम के नमूने
  • रोजाना हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर से सैंपल लेगा ट्रांसपोर्टर
  • अपनी बाइक से सैंपल पहुंचाने के लिए मिलेगा मानदेय
  • रोगियों के क्षय रोग जांच केंद्र न जाने से संक्रमण चेन तोड़ने में मदद मिलेगी
    गाजियाबाद।
    वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत अभियान का लक्ष्य हासिल करने के लिए नित नए प्रयास किए जा रहे हैं। इस अभियान में आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों को जोड़ने की रणनीति पर आगे काम करते हुए शासन ने सैंपल ट्रांसपोर्टर जोड़े जाने का निर्णय लिया है। डिप्टी डीटीओ डा. अनिल यादव ने बताया – सैंपल ट्रांसपोर्टर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर से बलगम के नमूने लेकर टीबी जांच केंद्र तक पहुंचाने का काम करेंगे। इसके लिए उन्हें मानदेय दिया जाएगा। डिप्टी डीटीओ ने बताया इससे एक ओर जहां टीबी जांच को गति ?मिलेगी वहीं दूसरी ओर संभावित संभावित टीबी रोगियों को अपने घर के नजदीक जांच की सुविधा मिल सकेगी। इतना ही नहीं, जो संभावित टीबी रोगी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर तक जाने में असमर्थ होंगे उनके सैंपल आशा कार्यकर्ता उनके घर से ही एकत्र कर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर तक पहुंचाएंगी। सैंपल ट्रांसपोर्टर नियुक्त किए जाने का एक बड़ा लाभ यह भी होगा कि संभावित क्षय रोगियों के टीबी जांच केंद्र न जाने से भी संक्रमण की चेन तोड़ने में मदद मिलेगी।
    हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर उपचार के लिए पहुंचने वाले रोगियों में से कम से कम 10 प्रतिशत टीबी से मिलते जुलते लक्षण वाले संभावित रोगियों को हर माह की 15 तारीख को एकीकृत निक्षय दिवस पर जांच के लिए बुलाया जाएगा और उनके बलगम के नमूने लेकर उसी दिन सैंपल ट्रांसपोर्टर के जरिए टीबी जांच केंद्र पर पहुंचाए जाएंगे। जांच केंद्र पर इन नमूनों की हर हाल में 24 घंटे में जांच पूरी कर निक्षय और ई- कवच पोर्टल पर रिपोर्ट अपलोड की जाएगी। यह सभी प्रयास कम समय में अधिक से अधिक क्षय रोगियों को खोजने के लिए की जा रही है ताकि जल्दी उपचार शुरू कर संक्रमण की चेन तोड़ी जा सके। जांच और उपचार में देरी से टीबी रोगी अपने संपर्क में आने वालों को संक्रमित कर देता है। उपचार शुरू होने के बाद इसकी आशंका काफी कम हो जाती है। इसलिए कहा जाता है कि क्षय रोगी किसी के संपर्क में आएं तो मॉस्क का प्रयोग करें।
    डा. अनिल यादव ने बताया कि सैंपल ट्रांसपोर्टर उसी ब्लॉक क्षेत्र का रहने वाला होगा और अपनी मोटर साइकिल के जरिए चार से सात हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर से सैंपल लेकर नजदीकी टीबी जांच केंद्र पर पहुंचाएगा। इसके लिए उसे हर दिन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर तीन से चार बजे के बीच पहुंचना होगा। इसके साथ ही वह मोबाइल के जरिए हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर और टीबी जांच केंद्र के संपर्क में रहेगा। हर सेंटर के लिए 50 रुपए के साथ ही उसे प्रति सैंपल 15 रुपए का मानदेय मिलेगा। ब्लॉक स्तर पर एसटीएलएस, एसटीएस, बीसीपीएम और इम्यूनाइजेशन आॅफिसर के सहयोग से प्रभारी चिकित्सा अधिकारी (एमओआईसी) के निर्देशन में माइक्रोप्लान तैयार करेंगे, डीटीओ की अध्यक्षता में डीसीपीएम और डीपीसी द्वारा जनपद स्तर पर संकलित कर माइक्रो प्लान तैयार किया जाएगा।

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