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विश्व अंतरिक्ष सप्ताह: केआईईटी ने किया एक दिवसीय जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन

  • अंतरिक्ष प्रदर्शनी का किया गया आयोजन
    गाजियाबाद।
    केआईईटी ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशंस ने विश्व अंतरिक्ष सप्ताह मनाने के लिए एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया। इसका विषय कृषि, मौसम पूर्वानुमान, शहरी और ग्रामीण नियोजन में उपग्रह रिमोट सेंसिंग के अनुप्रयोग रखा गया। संगोष्ठी और प्रदर्शनी को भारतीय अंतरिक्ष उद्योग प्रदर्शकों, गाजियाबाद और क्षेत्रीय सुदूर संवेदन केंद्र- उत्तर, राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र, इसरो द्वारा प्रायोजित किया गया था एवं केआईईटी में इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार इंजीनियरिंग विभाग के तहत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के लिए उत्कृष्टता केंद्र द्वारा आयोजित किया गया था।
    कार्यक्रम की शुरूआत केआईईटी ग्रुप आॅफ इंस्टीट्यूशंस के निदेशक डा. ए गर्ग द्वारा दीप प्रज्ज्जवलन करने के साथ हुई। उन्होंने अपने स्वागत भाषण में केआईईटी के उन छात्रों के बारे में गर्व से बताया, जिन्होंने अंतरिक्ष अनुसंधान से संबंधित कई पत्र स्कोपस इंडेक्स में प्रस्तुत किए हैं और मैपाथोन में भी भाग लिया है जो कि एआईसीटीई, इसरो और आईआईटी बॉम्बे द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक नक्शा बनाने की प्रतियोगिता है। उन्होंने यह भी बताया कि वे भविष्य में अंतरिक्ष पर्यटन को बढ़ावा देने की उम्मीद करते हैं और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अधिक धन और सफलता प्राप्त करने के लिए एनआईटी कुरुक्षेत्र के साथ जुड़ना भी चाहेंगे।
    डा. विभव कुमार सचान (डीन आरएंडडी, एचओडी ईसीई) ने बताया कि सरकार भारत के बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए गति शक्ति योजना के साथ काम कर रही है, जो कि रिमोट सेंसिंग और एआई एवं एमएल के एकीकरण के बिना कभी भी संभव नहीं है।
    प्रो. (डॉ.) ब्रह्मजीत सिंह (इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार इंजीनियरिंग के प्रोफेसर, डीन योजना और विकास, एनआईटी कुरुक्षेत्र क्षेत्रीय समन्वयक, अंतरिक्ष के लिए क्षेत्रीय शैक्षणिक केंद्र (आरएसी-एस) इसरो और एनआईटी कुरुक्षेत्र की एक संयुक्त पहल) ने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने सभी युवाओं को मौसम की भविष्यवाणी की सटीकता बढ़ने हेतु स्पेस टेक्नोलॉजीज, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और मशीन लर्निंग पर ध्यान केंद्रित करने को कहा।
    एसी माथुर (सेवानिवृत्त समूह निदेशक, अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र, अहमदाबाद), डॉ. एस के श्रीवास्तव (मुख्य महाप्रबंधक (क्षेत्रीय केंद्र), राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, अंतरिक्ष विभाग, भारत सरकार, नई दिल्ली), जीपी सिंह (सेवानिवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिक, सैक, इसरो), डा. विनय सहगल (प्रधान वैज्ञानिक, आईएआरआई), डा. आलोक माथुर (पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक सैक इसरो), और डा. विष्णु चंद्र (सेवानिवृत्त उप निदेशक जनरल, एनआईसी) आदि उपस्थित थे।
    संगोष्ठी के साथ-साथ स्कूल और कॉलेज के छात्रों के लिए एक अंतरिक्ष प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसमें जीएसएलवी, मार्स आॅर्बिटर मिशन और क्रायो इंजन के मॉडल सहित अंतरिक्ष से संबंधित विभिन्न मॉडल प्रदर्शित किए गए। डॉ. खुशबू मिर्जा (वरिष्ठ वैज्ञानिक, एनआरएससी इसरो) ने छात्रों को विभिन्न अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के बारे में समझाने का कार्यभार संभाला। इसरो के वैज्ञानिकों द्वारा भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी, रिमोट सेंसिंग, और कृषि और मौसम की भविष्यवाणी के लिए इसके अनुप्रयोग, भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी, और शासन अनुप्रयोगों के लिए सेवा प्लेटफार्मों आदि जैसे विभिन्न विषयों पर विशेष वार्ता भी आयोजित की गई थी।
    कार्यक्रम का समापन डॉ. परवीन कुमार कौशिक के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिन्होंने सभी सम्मानित अतिथियों, डीन, हेड्स एवं फैकल्टी सदस्यों का धन्यवाद किया।

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