यूपी के वोटरों में इतना बड़ा अंतर क्यों?

कमल सेखरी
11 दिसंबर का दिन पूरा हुआ तो साथ ही एसआईआर की बढ़ाई गई अवधि भी पूरी हो गई। मुख्य चुनाव आयुक्त ने पहले एसआईआर की तारीख 4 दिसंबर से बढ़ाकर 11 दिसंबर की और अब कुछ राज्यों में एक सप्ताह और बढ़ाकर 18 दिसंबर कर दी लेकिन यूपी में अब 26 दिसंबर तक एसआईआर के फार्म जमा हो सकेंगे। इन सबके बीच पश्चिम बंगाल में एसआईआर की तारीख अन्य राज्यों की तरह नहीं बढ़ाई गई और वो 11 दिसंबर को अंतिम रूप से पूरी हो गई। अब ममता दीदी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस शोर मचा रही है कि हमारे यहां अन्य राज्यों की तरह फार्म जमा करने की तारीख क्यों नहीं बढ़ाई गई। इसको लेकर टीएमसी संसद में भी शोर मचा रही है और सार्वजनिक बयानों में भी यह आरोप लगाना शुरू कर दिया है कि चुनाव आयोग सत्ता दल के हाथों में खेलकर पश्चिम बंगाल के साथ षडयंत्र रच रहा है। उत्तर प्रदेश में फार्म जमा करने की तारीख जो अब दूसरी बार बढ़ाकर 15 दिन और आगे कर दी गई है उसे लेकर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव इसे अपनी जीत बता रहे हैं। लेकिन पिछले दो दिनों में उत्तर प्रदेश को लेकर देश के मुख्य चुनाव आयुक्त कार्यालय और उत्तर प्रदेश के निर्वाचन कार्यालय ने जो बयान जारी किए हैं वो एकदम एकदूसरे के विपरीत हैं। देश का मुख्य चुनाव आयुक्त यह कह रहा है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश में पहले चरण के कुछ ही दिनों में 99.47 प्रतिशत मतदाताओं तक एसआईआर फार्म भिजवा दिए हैं। अब बीते दिन उसी मुख्य चुनाव आयुक्त कार्यालय ने एक और प्रेस नोट जारी कर यह बताया कि बांटे गए फार्मों में से 99.24 प्रतिशत फार्म भरकर वापस आ गए और उन्हें अपलोड भी कर दिया गया है। अब अगर इतना सबकुछ हो गया तो फिर उत्तर प्रदेश में फार्म भरने की तारीख 15 दिन आगे क्यों बढ़ा दी गई। वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के निर्वाचन कार्यालय ने अपने ही मुख्य चुनाव कार्यालय की पोल पट्टी खोलकर रख दी। प्रदेश निर्वाचन कार्यालय ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर बताया कि प्रदेश में 19.38 प्रतिशत सूची में दर्ज मतदाताओं के फार्म अभी तक वापस नहीं आए हैं। यानी 15 करोड़ 43 लाख बांटे गए फार्मों में से दो करोड़ 91 लाख मतदाताओं के फार्म अभी बीएलओ को प्राप्त नहीं हुए हैं। प्रदेश चुनाव निर्वाचन अधिकारी को यह भी लिखा है कि इनमें से लगभग 86 लाख मतदाता प्रदेश से कहीं ओर शिफ्ट हो गए हैं और एक करोड़ 21 लाख मतदाताओं का पता नहीं मिला है और वो लापता हैं।
अगर इतनी बड़ी संख्या में यूपी में मतदाताओं का कोई पता नहीं लग पा रहा है तो फिर मुख्य चुनाव आयुक्त यह कैसे कह सकता है कि हमने 99.24 प्रतिशत फार्म वापस प्राप्त कर लिए हैं। जो फार्म अभी तक प्राप्त नहीं हो पाए हैं उनकी संख्या 2.91 करोड़ सरकारी तौर पर बताई जा रही है उसे देखते हुए तो यही निकलकर सामने आ रहा है कि कुल विधानसभा क्षेत्रों को मिलाकर औसतन 70 हजार मतों का प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के हिसाब से अंतर पड़ रहा है जिसे लेकर सपा मुखिया अखिलेश यादव पहले से ही कुछ ऐसे संकेत दे रहे थे कि चुनाव आयोग उत्तर प्रदेश में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में से 50 हजार मत काट देगा और वो कटी हुई मत पीडीए के पक्ष की ही होंगी। अब ये कैसा मजाक है कि या फिर कोई खेल खेला जा रहा है क्योंकि जब एक करोड़ 21 लाख वोटर के पते ही नहीं मिल पाए तो उन्हें एसआईआर के फार्म प्राप्त कैसे हो गए क्योंकि मतदाताओं को प्राप्त हो चुके फार्मों की संख्या मुख्य चुनाव आयुक्त के हिसाब से 99.47 प्रतिशत है तो जब लोगों के पते ही मालूम नहीं हैं तो फिर फार्म दे किन्हे दिये गये, जब फार्म ही नहीं पूरे बंटे तो फिर 99.24 प्रतिशत भरे हुए फार्म कैसे वापस प्राप्त हो गए। ये जादूई संख्या क्या कोई जांच का विषय नहीं है। क्योंकि प्रदेश के निर्वाचन अधिकारी ने मीडिया को यह भी बताया है कि वोटों के इस अंतर में कोई अधिक फर्क पड़ने नहीं जा रहा है। लेकिन हमें अब भी विश्वास है कि बढ़ाए गए 15 दिनों में यह जो बड़ा अंतर आ रहा है वो ठीक हो पाएगा। यदि यह सुधार बचे दिनों में पूरा हो पाता है तो यह उन बीएलओ को सही मायने में श्रद्धांजलि होगी जिनकी एसआईआर पूरा करने के दबाव में जान चली गई या जिन्होंने काम के दबाव के चलते आत्महत्याएं कर लीं।

