हम क्यों सहन करें ट्रंप की दबंगई !

कमल सेखरी
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पूर्व घोषणा के अनुसार बीते दिन भारत पर अमेरिका भेजे जाने वाले सामान पर निर्यात शुल्क 50 फीसदी लगा दिया गया है। जबसे ट्रंप ने यह घोषणा की कि 50 प्रतिशत का नया टेरिफ 27 अगस्त 2025 से लागू कर दिया जाएगा तभी से भारत से अमेरिका जा रहा कपड़ा, चमड़ा, सजावटी ज्वैलरी और दवाइयों का व्यापार प्रभावित होना शुरू हो गया। बीते दिन तक की स्थिति यह बनी कि दस लाख मिलियन डालर की जगह भारत का यह निर्यात 4 लाख डालर तक गिर गया है और अब लगता है कि अगले एक दो हफ्ते में यह व्यापार दस लाख मिलियन डालर की जगह मात्र तीन लाख मिलियन डालर तक ही रह जाएगा। देश के प्रभावित व्यवसायी और विपक्षी दल के नेता आरोप लगा रहे हैं कि जब डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर अपना आयात शुल्क बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया तो भारत अभी तक उससे अमेरिकी सामान पर आयात शुल्क 9.4 प्रतिशत ही क्यों लगा रहा है। ट्रंप जब भारत के साथ इस तरह का व्यवहार कर रहे हैं तो भारत अमेरिका के साथ वैसा व्यवहार ना करके उस पर अभी तक मेहरबानियां क्यों कर रहा है। बीते दिन अमेरिका का यह नया 50 फीसदी का टैरिफ लागू होते ही हमारे देश के स्टॉक एक्सचेंज में अचानक 569 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। आम आदमी पार्टी के संयोजक एवं पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज बृहस्पतिवार को एक प्रेस कान्फ्रेंस कर यह आरोप भी लगाया कि भारत ने अमेरिका से आयात होने वाले कपास पर आयात शुल्क शून्य कर दिया है इससे भारत के कपास किसानों पर बड़ा बुरा असर पड़ेगा और वो पहले से भी और अधिक बदहाली के हाल में पहुंच जाएंगे। केजरीवाल ने यह आरोप भी लगाया कि हमारे प्रधानमंत्री डोनाल्ड ट्रंप के सभी दुर्व्यवहारों को मजबूरी में सहन कर रहे हैं। उनका आरोप था कि अमेरिकी अदालत में हमारे देश के सबसे बड़े उद्योगपति गौतम अडानी पर मुकदमा चल रहा है और उनके गिरफ्तारी वारंट भी जारी हो चुके हैं। अमेरिका कहीं अडानी की गिरफ्तारी की मांग भारत से ना कर ले ऐसी स्थिति से अडानी को बचाने के लिए प्रधानमंत्री डोनाल्ड ट्रंप की ऐसी नाजायज नाराजगी को सहन कर रहे हैं। इस संबंध में एक तथ्य और यह भी सामने आ रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप इस बात से नाराज हैं कि भारत रूस से अपनी आवश्यकता से अधिक पेट्रोल खरीदकर दूसरे देशों को बेच रहा है। इससे रूस की बिगड़ती आर्थिक स्थिति को तो सहायता मिल ही रही है और भारत इसमें अलग से मुनाफा कमा रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि रूस से यह पेट्रोल भारत नहीं खरीद रहा बल्कि हमारे दो बड़े उद्योगपति अंबानी और अडानी यह खरीदारी कर रहे हैं और इसे अपनी रिफाइनरी में उपयोग योग्य बनाकर अन्य देशों को बेच रहे हैं। इस खरीद-बेच में जो भी मुनाफा हो रहा है वो अंबानी और अडानी को हो रहा है इसमें भारत सरकार को कुछ भी प्राप्त नहीं हो रहा है। लेकिन रूस से पेट्रोल की इस खरीद और अन्य देशों को की जा रही बिक्री से अमेरिका की जो नाराजगी है वो भारत सरकार को झेलनी पड़ रही है। हमारी सरकार को चाहिए वो डोनाल्ड ट्रंप को जैसे को तैसा नीति के आधार पर खुलकर जवाब दे और अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ के बदले अमेरिका पर भी 50 फीसदी ही टैरिफ लगा दे। अब वो दिन गए जब यह नीति और सिद्धांत माना जाता था कि कोई अगर आपके एक गाल पर थप्पड़ मारे तो आप दूसरा गाल आगे कर दें। अब समय आ गया कि कोई अगर किसी दबंगई से आपको एक थप्पड़ मारे तो आप जवाब में उसे चार थप्पड़ जड़ दें। 140 करोड़ आबादी का यह नया भारत विश्व की किसी भी ताकत के आगे घुटने टेककर जनहित का आहत करे वो जनता सहन नहीं कर पाएगी।

