भाजपा और हिन्दू संगठनों की सोच में इतना फर्क क्यों !

कमल सेखरी
केन्द्र में देश की सत्ता की व्यवस्था संभाले बैठी भारतीय जनता पार्टी के मुखिया प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 25 दिसंबर को क्रिसमस-डे पर एक राष्ट्रीय संदेश जारी कर देश के समूचे ईसाई समुदाय को क्रिसमस-डे की शुभकामनाएं दीं और स्वयं दिल्ली के एक चर्च में जाकर बड़े दिन की प्रार्थना सभा में एक घंटे से अधिक समय तक प्रभु ईसा की प्रार्थना में भाग लिया और चर्च में गाए जा रहे ईसा के भजनों पर भी खुलकर बुदबुदाकर अपनी हाजिरी दर्ज की और मोमबत्ती जलाकर प्रभु ईसा की स्मृति में अपनी आस्था भी प्रकट की। प्रधानमंत्री श्री मोदी के इस व्यवहार को देखकर देश का समूचा ईसाई समुदाय गदगद हो उठा। लेकिन वहीं दूसरी ओर भाजपा से जुड़े विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल व अन्य हिन्दू संगठनों ने क्रिसमस डे की सुबह देश में कई जगह चर्च के बाहर जाकर हंगामा खड़ा किया और ऊंचे स्वर में वहां हनुमान चालीसा का पाठ किया साथ ही यह घोषणा भी की कि देश में आज का यह दिन तुलसी दिवस के नाम से जाना जाएगा। इतना ही नहीं क्रिसमस-डे से तीन-चार दिन पहले जहां-जहां भी ईसाई समुदाय के लोगों ने किसी भी सार्वजनिक स्थल पर अपने धार्मिक दिवस का आयोजन किया उनमें से कई स्थानों पर इन्हीं हिन्दू संगठनों ने वहां पहुंचकर ना केवल हंगामा खड़ा किया बल्कि ईसाई समुदाय के लोगों के साथ मारपीट करते हुए उनका कार्यक्रम रद्द करा दिया। अब हमें यह देखना चाहिए कि हमारे देश के सत्ता दल भाजपा और उसके साथ जुड़े हिन्दू संगठनों की सोच और नीतियों में इतना फर्क क्यों है। प्रधानमंत्री एक अलग सार्थक व्यवहार करते नजर आते हैं वहीं उनके सहयोगी दल उसी अवसर पर एकदम विपरीत नकरात्मक सोच के साथ हिंसक रूप अपनाते नजर आते हैं। इनमें से कौन सही है और कौन गलत है या फिर इनकी सोच और नीतियों में इतना फर्क क्यों है यह आम आदमी की समझ से बाहर है। माना हम हिन्दू हैं और हिन्दुस्तान में बहुसंख्यक के तौर पर एक बड़ी आबादी के साथ इस देश में रह रहे हैं लेकिन हमारे देश के संविधान में तो सभी धर्मों को बराबर का स्थान दिया गया है और सभी धर्म स्वतंत्रता से अपने धार्मिक त्योहार मना सकते हैं इसलिए हम एक सेक्यूलर देश कहलाते हैं। हमारा हिन्दुत्व हमें यह अनुमति कहां देता है कि हम अपने मुस्लिम भाइयों, सिख या ईसाई भाइयों से अपनी सोच में एक अंतर मानकर चलें। हम हिन्दू एक नकारात्मक सोच के साथ अन्य धर्मों के अनुयायियों के साथ जो व्यवहार करते हैं तो कैसे भूल जाते हैं कि दुनिया के बड़े हिस्सों में मुस्लिम और ईसाई भी रहते हैं वो भी अगर हम जैसी नकारात्मक सोच अपनाकर इस तरह का दुर्व्यवहार हिन्दुओं के साथ करने लग जाएं तो नुकसान किसका होगा। ये हिन्दू संगठन जो आज क्रिसमस-डे और सेंटा क्लाज का सड़कों पर जो विरोध करते नजर आ रहे हैं उन सभी के बच्चे अंग्रेजी माध्यम या क्रिश्चयन मिशनरी के स्कूलों में पढ़ रहे हैं और उनमें से अधिकांश सेंटा क्लाज की टोपियां पहनकर अपने-अपने स्कूलों में जा रहे हैं और इस दिन यही टोपियां पहनकर अपने घरों में भी घूम रहे हैं। इन हिन्दू संगठन के अधिकांश नेताओं के घरों में जाकर देखा जा सकता है कि उनके घरों में क्रिसमस ट्री सजाकर रखा गया है। हम यह दोगला व्यवहार क्यों करते हैं, हिन्दू धर्म का मतलब ही आपसी सौहार्द, आपसी समन्वय, आपसी प्रेम और आपसी भाईचारे के साथ शांति के वातावरण में रहना है। इन हिन्दू नेताओं को हनुमान चालीसा पहले अपने घर में पढ़नी चाहिए और हर रोज हनुमान चालीस पढ़कर ही घरों से निकलना चाहिए।

