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पाकिस्तान क्यों मना रहा है जीत का जश्न ?

  • क्या बौखला गया है पाकिस्तान
  • हमें सीमावर्ती क्षेत्रों में भी नुकसान को देखना चाहिए
  • आबादी क्षेत्रों और नागरिकों की हत्या को जीत मान रहा है नापाक पाकिस्तान
    मैं हर शिकस्त का साथ निभाता चला गया।
    हर हार को धुएं में उड़ाता चला गया।
    बर्र्बादियों का गम मनाना फिजुल था,
    बर्बादियों का जश्न मनाता चला गया।

    कमल सेखरी
    अब पाकिस्तान को क्या हो गया है यह तो खुदा ही जाने। वो अचानक बौखला गया है या फिर पगला गया है या भौरा गया है या फिर अपने अवाम को दिखाने के लिए दिखावा कर रहा है। हम अपनी नजर से जिसे उसकी शिकस्त मान रहे हैं वो उसका जश्न मना रहा है। पाकिस्तान की फौज के सर्वेसर्वा जो अब अचानक फील्ड मार्शल बना दिये गये उस आसिफ मुनीर ने बीते दिन जीत का जश्न मनाने के नाम से एक बड़ा रात का डिनर आयोजित किया जिसमें फौज के कई बड़े अधिकारियों के साथ-साथ प्रजीडेंट और प्राइम मिनिस्टर ने भी शिरकत की। हम भारत में पहले से ही जीत का जश्न मना रहे हैं और पूरे देश में विजयी तिरंगा यात्रा निकालकर भारतीय फौज के शौर्य को सलाम कर रहे हैं। इतना ही नहीं हमने बड़े-बडेÞ पोस्टर छपवाकर और कई जगह बड़े-बड़े होर्डिंग लगाकर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की फौजी यूनिफोर्म पहने कई जगह तस्वीरें भी प्रचारित कीं। अब यह समझ से बाहर है कि आपरेशन सिंदूर के नाम से लड़े गये इस चार दिन के छदम युद्ध में कौन जीता-कौन हारा। यह तो उस कुश्ती की तरह हो गया जो चित या पट के परिणाम तक पहुंचने से पहले बीच में रुक जाती है और दोनों पहलवान इसे अपनी-अपनी जीत मानकर अपने लोगों के बीच अपनी जीत का इजहार करते नजर आते हैं। कुश्ती हो या बाक्सिंग, किसी भी फाइट में यह नियम होता है कि वो दस राउंड तक चलती है। दस राउंड चलने वाली कुश्ती या बाक्सिंग में जो भी पहलवान पूरे दस राउंड तक हिम्मत और जोश के साथ लड़ता नजर आता है तो उसकी हिम्मत को अंकों के आधार पर विजयी घोषित कर दिया जाता है या फिर दोनों में से कोई एक पहलवान दस राउंड पूरे होने से पहले ही दूसरे को बीच में ही चित कर देता है तो वो स्वत: ही विजयी कहलाता है। भारत और पाकिस्तान के बीच छिड़ी ये जंग अगर कुश्ती के इंटरनेशनल नियमों के अनुसार दस दिन चल जाती तो पाकिस्तान का नामोनिशान ही मिट जाता। अगर यही जंग और तीन-चार दिन और आगे चली जाती तो भारत पाकिस्तान को ऐसी पटखनी लगा देता कि वो चारों खाने चित हो जाता। तो ऐसे में जीत का जश्न सिर्फ भारत में मनाया जाता, पाकिस्तान का चेहरा बचता ही नहीं कि वो जीत के जश्न की बात कहीं कह सुन सकता। अभी जंग का चौथा दिन आरंभ ही हुआ था कि अचानक दुनिया का सबसे बड़ा रेफरी पापा ट्रंप बीच में आ कूदा और उसने जोर से विसल बजाकर दोनों देशों यानी दोनों पहलवानों को धमकी देते हुए अलग कर दिया। पिटा पहलवान तो पहले से ही चाह रहा था कि कुश्ती बीच में रोक दी जाए लेकिन नुकसान उस पहलवान का हुआ जो मजबूती से जीतता दिखाई दे रहा था और अगर वो पहलवान ऐसी ही मजबूती से रेफरी की बात माने बिना युद्ध में डंटा रहता तो अगले तीन-चार दिन में ही पाकिस्तान की सांसें फूल जातीं और वो भारत से भीख मांगकर युद्ध विराम की गुहार लगाता। फिर ऐसे में उसकी हिम्मत नहीं होती कि वो अपने देश में अवाम को दिखाने के लिए एक बड़ी डिनर पार्टी आयोजित करता और जीत का जश्न जो आज मना रहा है उसे मनाने की हिम्मत कर पाता। हम अपनी जीत के हिसाब में आतंकियों के उन नौ अड्डों को जोड़ रहे हैं जो हमने एक झटके में नेस्तानाबूद कर दिये या फिर पाकिस्तान के कुछ उन लड़ाकू हवाई अड्डों को नष्ट किया जहां से पाकिस्तान हम पर हमले कर सकता था। हमने नैतिकता का वो बड़ा संदेश बड़े फक्र के साथ दिया जिसमें हमने कहा कि हमने दुश्मन के किसी भी आबादी वाले क्षेत्र पर कोई हमला नहीं किया और ना ही कोई जान माल का नुकसान किया। लेकिन पाकिस्तान इसके विपरीत बड़े फक्र से कह रहा है कि हमने भारतीय सीमा में अस्पताल गिराया, गिरिजाघर गिराया, स्कूल का बड़ा भवन गिराया, गुरुद्वारा गिराया और मंदिर गिराने के साथ-साथ बड़ी संख्या में आबादी क्षेत्र में कई घरों को भी गिराया। इस बात की पुष्टि एक नेशनल न्यूज चैनल ने बीते दिन जम्मू कश्मीर के बार्डर क्षेत्र पुंछ से सीधा प्रसारण करके दिखाई। इस खबर में यह भी बताया गया कि पुंछ भारत-पाक सीमा से लगे गांवों में सबसे बड़ा आबादी वाला गांव है। पाकिस्तान से की गई गोलीबारी में यहां 14 नागरिक मारे गए हैं और पुंछ का कोई एक घर ऐसा नहीं बचा जो पाक से छोड़ी गई गोलाबारी में क्षतिग्रस्त ना हुआ हो। इस खबर में रिपोर्टर ने यह भी बताया कि इसी तरह पंजाब और राजस्थान से लगी भारतीय सीमाओं के गांवों में भी कुछ इसी तरह के नुकसान हुए हैं। पाकिस्तान द्वारा भारतीय सीमा में की गई अपनी गोलाबारी में इस तरह के जितने भी नुकसान हुए हैं और बड़ी संख्या में नागरिक मारे गए हैं अपनी इन नापाक हरकतों को भी अपनी जीत के जश्न में जोड़कर गिना रहा है। पाकिस्तान सच्चा या झूठा यह भी कह रहा है कि उसने हमारे कई लड़ाकू विमान भी इस युद्ध में गिराए हैं। भारत सरकार को संसद का एक विशेष सत्र बुलाकर स्थिति को स्पष्ट करना ही चाहिए, यह मानते हुए कि नफा नुकसान एक तरफ रहा, भारत की जनता पहले भी एकजुट हो भारतीय सेना के साथ थी, आज भी है और आने वाले समय में भी हमेशा साथ ही रहेगी।

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