चर्चा-ए-आमस्लाइडर

क्यों दिया उपराष्ट्रपति धनखड़ ने इस्तीफा?

कमल सेखरी

जब कभी भी अचानक कोई घटना घटित होती है और वो भी ऐसी घटना जिसकी ना तो कल्पना की जा रही हो और ना ही उसके अचानक होने का कोई कारण बन रहा हो तब वो घटित घटना चर्चा का विषय तो बनती ही है साथ ही सबको हैरानी भी होती है और लोगों की यही जिज्ञासा रहती है कि पता किया जाए कि इसका कारण क्या रहा होगा। उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति जगदीश धनखड़ जो आदतन स्वभाव से काफी कठोर निर्णय लेने वाले और अपने परायों के बीच बेबाकी से खुलकर बोलने वाले ही जाने जाते थे। लेकिन बीते दिन देरशाम अपने खराब स्वास्थ्य का कारण बताते हुए श्री धनखड़ ने अचानक उपराष्ट्रपति पद और राज्यसभा के सभापति के पद से इस्तीफा दे दिया। शाम 5 बजे तक वो राज्यसभा परिसर में बिल्कुल स्वस्थ नजर आ रहे थे और अपने रोजमर्रा के कार्यों को हर रोज की तरह ही कर रहे थे। फिर दो घंटे में ऐसा क्या हो गया कि सबकुछ बदल गया और उन्होंने राष्ट्रपति भवन जाकर अपना इस्तीफा महामहिम को सौंप दिया। मीडिया में यकायक हलचल मच गई सभी टीवी चैनलों ने एक सिरे से श्री धनखड़ के इस्तीफे पर चर्चा शुरू कर दी। कई टीवी चैनलों पर इस मुददे को लेकर डिबेट भी शुरू हो गई। अटकलों का बाजार अभी तक गर्म है लेकिन इस्तीफे का असली कारण पूरा मीडिया ढूंढने में लगा हुआ है। मीडिया और कुछ विपक्षी दल के नेताओं का कहना है कि भाजपा के शीर्ष नेताओं की नाराजगी की जो हंडिया पकी वो सोमवार यानी सत्र के पहले दिन ही दो तीन घटनाओं के कारण ही इस स्थिति तक पहुंची। दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के घर जो जले हुए नोटों की पांच बोरियां मिलीं उस पर भाजपा लोकसभा में महाअभियोग लाने की तैयारी कर रही थी। इसके लिए भाजपा के 145 विधायकों ने हस्ताक्षर भी कर दिये थे और यह आने वाले एक दो दिन में भाजपा की तरफ से प्रस्ताव बनाकर लोकसभा में रखा जाना था लेकिन राज्यसभा के सभापति जगदीश धनखड़ ने 21 जुलाई को सत्र आरंभ होते ही कांग्रेस के अनुरोध पर जस्टिम वर्मा के खिलाफ महाअभियोग की दायर याचिका को श्री धनखड़ ने स्वीकार कर लिया और उस पर बहस के लिए जल्द ही कोई तारीख निश्चित करने का आश्वासन दिया। इसी दौरान विपक्ष से पहले वक्ता के तौर पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकाजुर्न खड़गे बोलने के लिए खड़े हुए। इस दिन श्री खड़गे का जन्मदिन भी था और धनखड़ जी ने उनके बोलने से पहले उन्हें जन्मदिन की शुभकामना भी दी। श्री खड़गे ने आपरेशन सिंदूर पर बोलना शुरू किया , वो अभी दो मिनट ही बोल पाए थे कि सत्ता दल के पक्ष से भाजपा के अध्यक्ष जेपी नड्डा एकदम से खड़े हुए और उन्होंने श्री खड़गे के आपरेशन सिंदूर पर बोलने पर ऐतराज दर्ज किया और तीन मिनट कांग्रेस के खिलाफ बोलते हुए उन्होंने कहा कि आपरेशन सिंदूर पर बहस के लिए कोई अलग समय तय किया जाएगा। श्री नड्डा ने यह भी कहा कि जो श्री खड़गे बोले हैं उसे राज्यसभा के मिनिट्स में ना लिया जाए और जो मैंने कहा है वो मिनिटस में दर्ज किया जाए, संभवत: श्री धनखड़ को अध्यक्ष नड्डा की यह बात नगवार गुजरी होगी क्योंकि उन्होंने यह बात अनुरोध के तौर पर नहीं बल्कि निर्दिशत भाव के साथ कही। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार सत्र के इस पहले दिन तीसरी घटना शाम को घटित हुई जब दो बार सदन स्थगित होने के उपरांत 4 बजे फिर कार्रवाई शुरू हुई तब कांग्रेस की तरफ से यह प्रस्ताव रखा गया कि पिछले शीतकालीन सत्र में उन्होंने जस्टिस शेखर यादव के खिलाफ हेट स्पीच के मामले में महाअभियोग लाने का प्रस्ताव रखा था और अनुरोध किया कि इस सत्र में उस प्रस्ताव को स्वीकार किया जाए। सभापति श्री धनखड़ ने उन्हें आश्वासन दिया कि ठीक है हम इसे कल स्वीकार कर लेंगे। बताया जाता है कि इन तीनों घटनाओं को लेकर भाजपा शीर्ष नेताओं ने नाराजगी प्रकट की और स्थिति बिगड़ते-बिगड़ते शाम 5 बजे से लेकर शाम 7 बजे के बीच इतनी बिगड़ गई कि सभापति जगदीश धनखड़ वहां से सीधा राष्ट्रपति भवन पहुंचे और महामहिम को अपना इस्तीफा सौंप दिया। श्री धनखड़ के इस्तीफे के 36 घंटे के अंदर ही चुनाव आयोग ने घोषणा कर दी कि जल्द ही उपराष्ट्रपति चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी और देश को अगले 32 दिनों के अंदर नया उपराष्ट्रपति मिल जाएगा। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि आज तीन दिन बीत जाने पर भी भाजपा का कोई सांसद या मंत्री श्री धनखड़ के खराब स्वास्थ्य का हाल जानने उनके घर नहीं गया है। प्रधानमंत्री ने दो लाइन के अपने ट्वीट में उनके स्वास्थ्य के ठीक होने की कामना की है। बताया जाता है कि श्री धनखड़ के इस्तीफे के पीछे जो भी राज छिपा है उसका खुलासा अगले कुछ दिनों में हो सकता है। बरहाल यह तय है कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व श्री धनखड़ से काफी नाराज है।

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