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वक्फ बिल से क्या मिलेगा मुसलमानों को ?

कमल सेखरी
एक हजार पृष्ठों से भी अधिक पृष्ठों पर अंकित कर तैयार किया गया मुस्लिम वक्फ बोर्ड का संशोधित बिल भले ही लोकसभा और राज्यसभा के सदनों में बहूमत से पारित करा लिया गया हो लेकिन अभी तक ना ही मुस्लिम समुदाय समझ पा रहा है कि इस बिल में उसके फायदे का क्या है और ना ही बिल को पढ़ने वाले पढ़कर ये बता पा रहे हैं कि आखिर ये बिल किसके लिए और क्यों कर लाया गया है। कल सुबह से ही लगभग सभी टीवी चैनलों पर इसी बिल को लेकर बहस हो रही है और उन सभी बहसों में जो प्रवक्ता इस नए बिल के पक्ष में बोल रहे हैं वो भी ये नहीं बता पा रहे कि इस नए बिल से मुस्लिम समुदाय को कौन से तीन फायदे मिलने जा रहे हैं जबकि विपक्ष में अपनी बात रखने वाले प्रवक्ता इस बिल के कई दोष गिना रहे हैं और कह रहे हैं कि यह केवल बहूमत के आधार पर मुस्लिम समुदाय को नीचा दिखाने के लिए लाया गया बिल है। वर्ष 1995 में आरंभ हुए मुस्लिम लॉ बोर्ड नियम में 1996 में कुछ तब्दीलियां हुर्इं उसके बाद 2005 और 2013 में इसमें काफी तब्दीलियां की गई। 2013 में इसमें किए गए संशोधनों के लिए बिल जो कांग्रेस सदन में लाई थी उसका उस समय के भाजपा सांसदों ने समर्थन किया था क्योंकि वर्ष 2013 के उस बिल में वक्फ बोर्ड की जमीनों को अवैध कब्जों से कैसे बचाया जा सके इस पर वो बिल लाया गया था। इससे स्पष्ट है कि 2013 तक भाजपा मुस्लिम वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को अवैध कब्जों में जाने से बचाने की पक्षधर थी। लेकिन अब नया बिल ये संदेश दे रहा है कि वक्फ बोर्ड की संपत्ति को वक्फ बोर्ड के रखवाले ही लूट रहे हैं अत: इस लूट से वक्फ बोर्ड की संपत्ति को बचाना जरूरी है। 2013 और अब 2025 में लाये गये नए संशोधन बिल में सियासी नेताओं का दृष्टिकोण ही बदल गया है। वक्फ बोर्ड की जमीनों को कौन लूट रहा है और कैसे लूट रहा है जबकि वक्फ बोर्ड के ट्रिब्यूनल में जिन जजों की नियुक्ति होती है वो सरकार करती है इसके सदस्यों का चयन भी सरकार द्वारा किया जाता है और हर राज्य में मुतवल्ली भी सरकार ही चुनती है। फिर जमीन की लूट कौन कर रहा है। अब नये संशोधित बिल में केवल मुस्लिम समुदाय के लोग ही दान दे सकते हैं और वो भी ऐसे मुसलमान जो ‘प्रेक्टिसिंग’ मुस्लिम हैं अत: जो पिछले 5 साल से नियमित नमाज पढ़ रहे हैं और इस्लाम की बाकी रवायतों को भी पूरा कर रहे हैं। अब ऐसा प्रमाण पत्र कौन दे सकता है कि वो इस तरह का असली मुसलमान है। वक्फ बोर्ड में अब सारे अधिकार किसी भी विवाद की स्थिति में जिलाधिकारी में निहित होंगे और अगर जिलाधिकारी मुस्लिम है तो उससे नीचे या ऊपर का गैर मुस्लिम अधिकारी इसके लिए नियुक्त होगा। इसी तरह वक्फ की प्रबंध समिति में दो गैर मुस्लिम सदस्य भी शामिल किए जाएंगे। अब इस एक हजार से ऊपर के पृष्ठों में लिखा गया यह संशोधित बिल अपने अंदर और क्या-क्या समेटे हुए है यह तो धीरे-धीरे बाद में ही पता चलेगा जब इसे अमल में लाया जाएगा। फिलहाल इस बिल को लेकर कई मुस्लिम संगठनों ने माननीय सुप्रीम कोर्ट में इसे खारिज कराने के लिए याचिकाएं डाल दी हैं। भाजपा के कई विरोधी दलों ने भी इसे चुनौती देते हुए माननीय सर्वोच्च न्यायालय में याचिकाएं डाली हैं। इस नए बिल के खिलाफ मुस्लिम समुदाय देश में कई जगह ऐसे ही सड़कों पर आ रहा है जैसे कभी तीन कृषि कानून को काला बिल बताते हुए रदद कराने के लिए देशभर के किसान सड़कों पर आए थे, सरकार को ये कृषि बिल वापस लेने पड़े थे। इस बिल को समर्थन देने के विरोध में बिहार के जेडीयू से जुड़े कई मुस्लिम नेताओं और रालोद के कुछ मुस्लिम नेताओं ने भी पार्टी से अपने इस्तीफे दे दिये हैं। अब आने वाले अगले कुछ दिनों में इस बिल की प्रतिक्रया में देशभर में कहां-कहां क्या-क्या होगा यह समय बताएगा। फिलहाल पश्चिम बंगाल में कल का रामनवमी का जुलूस कोई बड़ा गुल ना खिला दे इस संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।

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