होली के दर्द पर लगाया उर्दू का मरहम !
Urdu balm applied on the pain of Holi!

कमल सेखरी
तुम्ही ने दर्द दिया है तुम्ही दवा देना। नीतीश सरकार ने मौजूदा स्थिति को भांपते हुए होली पर्व से पहले प्रभावित समुदाय विशेष को एक बड़ी राहत का तोहफा देने की कोशिश की है। नीतीश सरकार ने होली से पहले यह सरकारी घोषणा कर दी कि बिहार में जगह-जगह या जिलेवार उर्दू भाषा सिखाने के शिविर सरकार आयोजित करेगी। इन शिविरों में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को उर्दू लिखने और पढ़ने का प्रशिक्षण दिया जाएगा, इसके साथ ही प्रदेश के अधिवक्ताओं, पत्रकारों, अध्यापकों और उन सभी इच्छुक नागरिकों को निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा जो उर्दू पढ़ना, लिखना और बोलना सीखना चाहते हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस सरकारी आदेशों की मुखालफत उनके सहयोगी दल भाजपा के नेताओं ने करनी शुरू कर दी है। राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि पिछले कई दिनों से होली पर्व को लेकर उत्तर प्रदेश और बिहार में जेडीयू के सहयोगी दल भाजपा के कई छोटे बड़े नेताओं ने बड़ी संख्या में रह रहकर जो बयान दिये हैं उससे मुस्लिम पक्ष काफी आहत नजर आया है। मुस्लिम मतदाताओं की यह नाराजगी आने वाले बिहार के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की पार्टी को ना झेलनी पड़ जाए, इसीलिए मुख्यमंत्री ने होली पर्व पर मिले दर्द पर मरहम लगाने के लिए बिहार में बड़ी संख्या में उर्दू भाषा प्रशिक्षण शिविर लगवाने की घोषणा की है। पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के संभल शहर में तैनात सीओ पद के अधिकारी अनुज चौधरी ने सार्वजनिक रूप से एक ऐसा अटपटा बयान दे दिया जिससे पहले से बिगड़े वहां के माहौल में और अधिक तनाव पैदा हो गया। हालांकि यह बयान सीओ पद के अधिकारी को देने का अधिकार नहीं था इस तरह की कोई भी बात केवल जिले के पुलिस कप्तान के माध्यम से ही जनता के बीच रखी जा सकती थी। माहौल बिगाड़ने वाले सरकारी अधिकारी के इस बयान को लेकर उत्तर प्रदेश और बिहार में जहां चुनाव कुछ महीने बाद होने हैं वहां के माहौल में भाजपा के कई नेताओं ने मिलकर तनावपूर्ण बयान देकर ऐसी स्थिति पैदा कर दी जिसे सुनकर और देखकर लग रहा है कि इस साल होने वाले होली के पर्व और उसके बाद अदा की जाने वाली जुमे की नमाज में शांति भी भंग हो सकती है। भाजपा के सौ से अधिक नेताओं ने अपना नाम और चेहरा चमकाने के लिए इस बिगड़े माहौल की आग में घी डालने का काम किया, किसी ने कहा कि अगर होली पर कुछ गलत किया गया तो मारपीट करने वालों को सीधे ऊपर पहुंचा दिया जाएगा। मंत्री स्तर के एक नेता ने यह तक कहा कि अगर मुसलमानों को रंग से परहेज है तो वो तिरपाल की बनी हिजाब पहनकर ही घरों से निकलें। भाजपा की एक महिला विधायक ने यह तक कह दिया कि अगर मुसलमानों को हमारी परंपराओं से परहेज है तो अस्पतालों में इनके अलग वार्ड बना दिये जाएं और अन्य सुविधाओं के लिए भी इनके स्थान अलग रखे जाएं। उत्तर प्रदेश के एक और अन्य मंत्री ने भी ऐसा ही कुछ कहते हुए बोला कि अगर मुसलमानों को हमारे त्योहार अच्छे नहीं लगते तो इन्हें पाकिस्तान भिजवा दिया जाए। ऐसे अनेकों नफरत भरे जहरीले बयान बड़ी संख्या में मीडिया के विभिन्न माध्यमों से लोगों तक पहुंचाने का काम किया गया। बिहार के विधायक और मंत्री भी इस काम में पीछे नहीं रहे। होली से पहले बिगड़े सांप्रदायिक सौहार्द पर मरहम लगाने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बड़ा पैंतरा खेला और जो घोषणा वो होली के बाद कभी भी कर सकते थे वो घोषणा उन्होंने बीते दिन अचानक कर दी, अब इस घोषणा के मुताबिक होली के तुरंत बाद बिहार में कई जगह उर्दू भाषा के प्रशिक्षण शिविर लगेंगे जिनमें सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की भागेदारी तो होगी ही होगी साथ अन्य कई वर्ग भी इन शिविरों का लाभ उठा पाएंगे। नीतीश कुमार की इस घोषणा से बिहार के कई भाजपा नेताओं में बड़ी तिलमिलाहट है और वो होली के बाद नीतीश कुमार के इस आदेश पर हमला भी बोल सकते हैं।