चर्चा-ए-आम

सुप्रीम कोर्ट के दो सुप्रीम फैसले

कमल सेखरी

ओ बासंती पवन हमारे घर आना बहुत दिनों के बाद खिड़कियां खोली हैं। राष्ट्र कवि स्वर्गीय कुअंर बेचैन जी की ये दो पंक्तियां यकायक जहन में उभर आर्इं। जब बहुत दिनों के बाद देश में दो अच्छी खबरें एक साथ सुनने को मिलीं। ये दो खिड़कियां माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने एकसाथ एक-एक घंटे के अंतराल से खोलकर लंबे समय से कुछ अच्छा सुनने के लिए तरस गए कानों को एक बड़ी राहत पहुंचाई। पहली खिड़की खोलकर जो राहत देश के सामने आई वो सत्ता दल के उस बाहुबली विधायक से जुड़ी थी जिसने 8 साल पहले अपने विधानसभा क्षेत्र उन्नाव में एक मासूम नाबालिग गरीब लड़की को अपनी हवस का शिकार बनाया था। इस बाहुबली विधायक कुलदीप सेंगर को कुछ दिन पहले ही दिल्ली हाईकोर्ट से जमानत मिली थी जबकि इसे निचली अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी और वो उसी के चलते जेल में बंद था। दूसरी बड़ी राहत उस खिड़की के खुलने से मिली जिस पर दिल्ली से लेकर राजस्थान के दूसरे सिरे तक लोग आंदोलित थे और सु्रपीम कोर्ट के 19 दिसंबर के उस आदेश से नाराज थे जिसके चलते अरावली हिल जो दिल्ली से लेकर राजस्थान तक 690 किलोमीटर लंबी है उसकी पहाड़ियों के खनन के आदेश केन्द्र सरकार की सिफारिश पर दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने जनआक्रोश से उभरी जनभावनाओं को गंभीरता से लिया और स्वत: संज्ञान लेते हुए अपने ही दिये आदेश को आज वापस ले लिया। 2025 वर्ष का यह अंतिम दौर कई त्रासदियों से गुजरता हुआ आखिर में ये दो खुशखबरियां दे गया जिससे जनभावनाओं को तो एक बड़ी राहत मिली ही साथ ही देश के आवाम दिल के में सुप्रीम कोर्ट के लिए विश्वास और अधिक प्रगाढ़ हुआ और एक संदेश मिला कि देश में सर्वोच्च न्यायालय के स्तर पर न्याय अभी जिंदा है। सर्वोच्च न्यायालय ने जिस तरह अरावली हिल के मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए अपने दिये आदेशों को खुद वापस ले लिया अगर यह प्रचलन देश में जाग्रत हो उठे तो संभवत: अधिकांश समस्याओं का हल निकल आए और देश को अपने स्वार्थों के लिए आग में झुलसा रहे इन सियासी नेताओं की इस निरंकुशता पर भी अंकुश लग सकेगा और देश को बस एक इसी आधार पर उम्मीद बाकी है।

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