चर्चा-ए-आम

हफ्तेभर की जंग से ही बौखलाया ट्रंप !

कमल सेखरी

अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच महायुद्ध की तरह छिड़ी जंग को होते अभी सात दिन हुए हैं कि दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के सबसे ताकतवर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बौखला से गए हैं और रह रहकर बहके हुए बयान दे रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने दिए अपने एक बयान में यह कहा कि वो ईरान की आवाम को यह आह्वान करते हैं कि वो घर से निकलें और सरकार के खिलाफ बगावत करके तख्ता पलट दें। जो लोग भी ऐसा करेंगे अमेरिका की सरकार उनका हर तरह से सहयोग करेगी। हालांकि अमेरिका और इजराइल मिलकर ईरान में गृह युद्ध कराकर वहां की सत्ता पलटने का प्रयास पहले ही कर चुके हैं और उसमें सफलता ना पाने पर अपनी वही नाकाम कोशिश को फिर अपनाना चाहते हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने एक बयान में यह भी कहा है कि ईरान के नेता अली खामेनेई की मौत के बाद जो वहां वैकल्पिक व्यवस्था सत्ता चलाने के लिए बनाई गई है वो अमेरिका को स्वीकार नहीं है। उनका कहना है कि ईरान में जो भी नई सत्ता अब बनेगी उसमें अमेरिका सरकार की मंजूरी जरूरी होगी और जो उसे पसंद होगी वही सत्ता ईरान में कायम होगी। डोनाल्ड ट्रंप जो ऐसी बहकी हुई बातें कर रहे हैं उसके पीछे कुछ खास कारण हैं। हालांकि ईरान के धार्मिक नेता अली खामेनेई की हत्या की योजना नवंबर 2025 यानी तीन माह पहले ही इजराइल और अमेरिका ने मिलकर बनाई थी और अपने खुफिया तंत्रों को इस काम के लिए लगा दिया था। उन्हें उस समय लग रहा था कि खामेनेई की हत्या के बाद 4 दिन में ही जंग खत्म हो जाएगी और ईरान में सत्ता पलट करने में अमेरिका सफल हो जाएगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं, ईरान के धार्मिक नेता की मौत के बाद ईरान ने और अधिक मजबूती से जंग लड़नी शुरू की जिसका अनुमान अमेरिका और इजराइल पहले कभी लगाया ही नहीं था। बताया जाता है कि खामेनेई ने अपने जीवित रहते हुए 25 साल पहले ही यह अनुमान लगा लिया था कि अमेरिका भविष्य में कभी भी सत्ता पलट के लिए ईरान के शीर्ष नेताओं की सामूहिक हत्या कर सकता है। इसलिए ईरान ने 25 साल पहले ही अपनी फौजी व्यवस्था को 36 अलग-अलग ब्रिगेड में विभाजित करके उन्हें यह मानते हुए काम सौंप दिए थे कि भविष्य में जब कभी भी कुछ ऐसा होगा तो उसका सामना ईरान इस नीति के तहत मजबूती से करेगा। आज ईरान उसी 25 साल पहले बनाई नीति पर काम कर रहा है जिससे लगता है कि उसके लड़ने की क्षमता कम नहीं हो रही है और वो आने वाले कई दिनों तक ऐसे ही लड़ सकता है। इस जंग में अमेरिका की हताशा का दूसरा कारण यह है कि यह जंग अमेरिका और इजराइल के लिए तो आर्थिक रूप से तो बहुत भारी पड़ रही है और ईरान बहुत कम खर्चे पर ही इस जंग को तेजी से आगे ले जा रहा है। ईरान इस जंग में अपनी घातक मिसाइलों के अलावा जिन मारक ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है उसकी कीमत ईरान के लिए मात्र 18 लाख पड़ रही है जबकि उस ड्रोन को हवा में खत्म करने के लिए इजराइल जो मिसाइल छोड़ता है वो एक मिसाइल ही एक करोड़ 53 लाख की है। अब तक एक सप्ताह की जंग में अमेरिका सौलह लाख करोड़ का खर्चा कर चुका है जबकि इजराइल का खर्चा इन सात दिनों में नौ लाख करोड़ आया है और ईरान को यह जंग एक सप्ताह में मात्र 90 हजार करोड़ का नुकसान पहुंचा चुकी है। इस एक सप्ताह की जंग में अमेरिका के सामने सबसे बड़ी कठिनाई खाड़ी के उन तेरह देशों को लेकर आ रही है जहां अमेरिका ने अपने एयरबेस बनाए थे। अमेरिका ने ये एयरबेस यह आश्वासन देकर बनाए थे कि अमेरिका उन देशों के विकास के लिए तो आर्थिक मदद करेगा ही साथ ही ये एयरबेस बनाकर उनकी सुरक्षा भी करेगा। क्योंकि इनमें से अधिकांश देशों के पास अपनी सुरक्षा के लिए ना तो पर्याप्त फौज है और ना ही यंत्र। ईरान ने बहुत बुद्धिमत्ता से काम करते हुए खाड़ी के इन छोटे देशों में बनाए गए अमेरिकी एयरबेस को ही अपना शिकार प्रथम प्राथमिकता पर बनाया और एक के बाद एक लगभग सभी अमेरिकी सुरक्षा स्थलों को ना केवल भारी नुकसान पहुंचाया बल्कि उन्हें पूरी तरह नष्ट कर दिया। ईरान की इस कार्रवाई से खाड़ी क्षेत्र के इन सभी अमेरिकी समर्थक देशों में खलबलाहट सी मची हुई है और वो अमेरिका पर जोर दे रहे हैं वो किसी तरह इस जंग को बंद कराए वरना उनके देशों को भारी नुकसान होगा। अमेरिका अपने इन समर्थक देशों की हड़बड़ाहट से भी बुरी तरह बौखला गया है। खाड़ी की महायुद्ध जैसी दिखने वाली यह जंग अगर ऐसे ही चलती रही और ईरान इसी तरह जवाबी हमले करता रहा तो यह जंग महीनों भी चल सकती है। अगर यह जंग लंबे समय चलती है तो पूरी दुनिया में आर्थिक संकट आ जाएगा। विश्व के कई देश खाड़ी से तेल की आपूर्ति ना होने पर भारी संकट में आ जाएंगे और ऐसे में अमेरिका दुनिया के कई देशों में संकट की ऐसी स्थिति बनाने के लिए जिम्मेवार होगा। लिहाजा दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश और अपनी मनमानी और जिद पर अड़े दुनिया के सबसे ताकतवर राजा की बौखलाहट अब जगजाहिर होने लगी है और जल्द ही दुनिया में अमेरिका एक बड़ा तमाशा बन जाएगी इसमें संदेह नहीं है।

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