सबसे बड़े दल का सबसे छोटी उम्र का अध्यक्ष

कमल सेखरी
14 दिसंबर को जहां एक ओर कांग्रेस राजधानी दिल्ली में अपनी महारैली आयोजित कर रही थी उसी दौरान भाजपा ने एक बड़ी घोषणा करके सबको अचंभे में डाल दिया और मीडिया का पूरा ध्यान उस महारैली से हटवाकर अपनी उस घोषणा की ओर आकर्षित कर दिया। घोषणा में कहा गया कि भाजपा के नए कार्यकारी अध्यक्ष बिहार के विधायक और राज्यमंत्री नितिन नवीन को बनाया जा रहा है। इस नए नाम के अचानक मैदान में आने से सभी लोग अचंभित हो गए क्योंकि यह नाम दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी कहे जाने वाली भाजपा के अब तक के सबसे छोटी उम्र के अध्यक्ष का था जिस पर सभी का अचंभित होना स्वाभाविक ही था। भाजपा के अब तक के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा 2019 में अध्यक्ष बने थे और उनका कार्यकाल 2022 में पूरा हो गया था लेकिन क्योंकि कोई नया नाम इस पद के लिए आरएसएस और भाजपा के बीच निश्वित नहीं हो पा रहा था इसलिए श्री नड्डा को एक बार दो साल के लिए एक्सटेंशन दी गई और उसके बाद यह अवधि एक साल और बढ़ाई गई। लिहाजा 31 दिसंबर 2025 तक नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन होना अनिवार्य था और इसके लिए पिछले कई दिनों से कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं कि अगला भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा। इसके लिए कई दिग्गजों के नाम लिए जा रहे थे जिनमें धर्मेन्द्र प्रधान, धर्मेश चौधरी, मनोहरलाल खट्टर, सुनील बंसल और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम प्रमुखता से सामने आ रहे थे लेकिन इन सबके नाम दरकिनार कर बिल्कुल ही एक नया नाम अचानक सामने आया और उस नाम की घोषणा भी हो गई। नितिन नवीन 5 बार विधायक बन चुके हैं और उनके पिता भी बिहार में विधायक रह चुके हैं। बताया जाता है कि नितिन नवीन गृहमंत्री अमित शाह के बहुत ही करीबी हैं और उन्हीं का विश्वास लेकर उन्हें पिछले विधानसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाया गया था जहां भाजपा को सफलता भी मिली। मात्र 45 साल के नितिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से यह चर्चाएं भी तेजी से निकलकर सामने आ रही हैं कि भाजपा में अब युवाओं का एक नवीन दौर शुरू होने जा रहा है। 45 साल के राष्ट्रीय अध्यक्ष की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में निसंदेह पुराने उम्रदराज व्योवृद्ध तो शामिल होने नहीं जा रहे इसलिए अनुमान है कि मार्गदर्शक भाग एक की तरह जिसमें आडवाणी, जोशी, कलराज मिश्र जैसे बड़े नेताओं को मार्गदर्शक बनाकर किनारे लगा दिया था इसी तरह अब मार्गदर्शक भाग-2 में अधिक उम्र के पुराने खिलाड़ियों को भी मार्गदर्शक बनाकर भाजपा में किनारे लगा दिया जाएगा। क्योंकि भाजपा में पुराने दिग्गज नेताओं की जगह नए चेहरों को आगे लाने का नया चलन पिछले कुछ समय से चल रहा है जिसमें मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन सिंह यादव, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और दिल्ली प्रदेश की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को लाया गया है और ये सभी लोग पुराने दिग्गज भाजपा नेताओं की जगह बदले गए हैं। इसलिए 2027 के बाद योगी जी का भविष्य क्या रहेगा इस पर भी अटकलें लग रही हैं। क्योंकि उत्तर प्रदेश में जो नए अध्यक्ष पंकज चौधरी चुने गए उनके चयन का आधार भी कुछ ऐसा ही रहा। वे ना तो सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पसंद थे और ना ही आरएसएस की पसंद में आते थे लेकिन क्योंकि वो अमितशाह के अधीन राज्यमंत्री थे इसलिए केवल उन्हीं की पसंदगी को तरजीह दी गई। अब ना तो प्रदेश के अध्यक्ष और ना ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरएसएस की पसंद के हैं और उनके चयन का आधार केवल और केवल गृहमंत्री अमित शाह के माध्यम से निकलकर आता है इससे स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश के 2027 के चुनाव और केन्द्र के अगले संसदीय चुनाव श्री शाह के वर्चस्व के अधीन ही कराए जाएंगे और दोनों ही जगह प्रत्याशियों का चयन भी इसी माध्यम से होगा यह भी कुछ ऐसा ही तय सा लग रहा है। अटकलें यह भी लगाई जा रही हैं कि 2029 के बाद भाजपा के केन्द्रीय ढांचे में बड़ा फेरबदल संभव है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जगह अभी से अमित शाह के रास्ते तैयार किए जा रहे हैं।



