चर्चा-ए-आमस्लाइडर

सियासी दंगल पर भारी पड़ी आवारा कुत्तों की आवाज !

कमल सेखरी

किस को यकीन था, किसने ऐसी कल्पना की होगी कि आवारा कुत्तों का वजूद और उनके समर्थन में उठाई जा रही कथित ‘डाग लवर्स’ की आवाजें देश में चल रहे सियासी महासंग्राम से भी ऊपर उठकर गूंजेगी। सर्वोच्च न्यायालय के दो जजों की बेंच ने आदेश पारित किया कि दिल्ली एनसीआर और देश में भी आवारा कुत्तों को पकड़कर उन्हें शैल्टर होम बनाकर उसमें रखा जाए ताकि सड़कों पर और आबादी क्षेत्र में खुलेआम घूम रहे आवारा कुत्ते जो हर रोज ही हजारों लोगों को अपना शिकार बनाते हैं और उनके काटने से फैलने वाली रैबीज हर साल देश में हजारों लोगों की जान ले लेती है। इन आवारा कुत्तों से छोटे बच्चों और बुजुर्गों को एक बड़ा खतरा बन गया है जो इनसे अपनी स्वयं की रक्षा नहीं कर पाते। सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश के पालन के लिए देश के सभी नगर निगमों को निर्देश दिए कि वो दो सप्ताह में आवारा कुत्तों को पकड़कर शैल्टर होम में पहुंचाया जाए। सुप्रीम कोर्ट के इन आदेशों पर नाराजगी जाहिर करते हुए देश में जगह-जगह ‘डाग लवर्स’ सड़कों पर उतर आए और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का विरोध करते हुए सोशल मीडिया पूरी तरह से भर दिया। ऐसा पहली बार हुआ कि इस किस्म के मामले में सुप्रीम कोर्ट को अपने आदेशों को लेकर पुन: विचार करना पड़ा और दो जजों के आदेश पर विचार करने के लिए तीन जजों की बेंच बैठी जिसमें चीफ जस्टिस ने भी हिस्सा लिया। आज सुबह बड़ी गहमा गहमी वाली बहस चली आवारा कुत्तों पर प्रतिबंध लगाने के पक्ष में तुषार मेहता जैसे बड़े वकील पैरवी करते नजर आए जबकि आवारा कुत्तों के पक्ष में देश के कई बड़े वकील जिसमें कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी के अलावा और भी कई नामी अधिवक्ताओं ने सुनवाई कर रही इस विशेष बेंच के समक्ष आवारा कुत्तों पर कार्रवाई करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को रोकने की पैरवी की है। देशभर के मीडिया में पिछले तीन दिन से आवारा कुत्तों का यह मामला सुर्खियों में बना हुआ है और इन सुर्खियों वाली खबर के चलते देश में जो मतदाता पुनरीक्षण पर सियासी हलकों में जो दंगल छिड़ा हुआ है उसकी खबरें आवारा कुत्तों की चल रही खबरों के आगे बौनी पड़ गई हैं। यानी आवारा कुत्तों का वजूद इन दिनों बेलगाम सियासी नेताओं की चर्चाओं को काफी पीछे छोड़कर आगे निकल गया है। बताया जाता है कि देश में करोड़ों की संख्या में आबादी के बीच घूम रहे आवारा कुत्तों का खतरा इतना बढ़ गया है कि इनके काटने से 33 लाख से अधिक लोग हर साल शिकार हो रहे हैं। दस हजार लोग प्रतिदिन इन आवारा कुत्तों का शिकार होते हैं जिनमें 85 फीसदी संख्या छोटे बच्चों और बुजुर्गों की है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि आवारा कुत्तों की यह संख्या सियासी व्यवस्था में चल रहे नगर निगमों और नगर पालिकाओं की लापरवाही की वजह से बढ़ रही है। हमने पहले यह आदेश दिये थे कि देशभर में इन आवारा कुत्तों की नसबंदी करके उनका बधियाकरण किया जाए ताकि निरंतर तेजी से बढ़ रही आवारा कुत्तों की संख्या पर अंकुश लग सके। इसके साथ ही व्यवस्था की यह कमजोरी भी रही कि उन्होंने आवारा कुत्तों को ‘एंटी रैबीज’ का इंजेक्शन भी नहीं लगवाया जिसके कारण हर साल देश में 18 हजार लोगों की मौत हो रही है। आवारा कुत्तों को प्यार करने वाले ये ‘डाग लवर्स’ इन कुत्तों के प्रति अपना प्यार इसलिए भी दिखाते हैं क्योंकि वो हर रोज जो आहार खा रहे हैं उसके शेष बचे हिस्से को निस्तारित करने में ये आवारा कुत्ते उनके सहायक बने हुए हैं। देश की कुल आबादी 145 करोड़ में से 104 करोड़ लोग मांसाहारी हैं जो हर दिन बकरा, मुर्गा और मछली आदि खाने के बाद उनकी हड्डियां अपने घर के बाहर घूम रहे आवारा कुत्तों को डाल देते हैं। समाज के एक वर्ग का यह भी मानना है कि अधिकांश ‘डाग लवर्स’ ये मांसाहारी लोग ही हैं। अगर आवारा कुत्तों को प्यार करने का इतना शौक इन प्यार जताने वाले लोगों में है तो उन्हें चाहिए कि वो किसी एक आवारा कुत्ते को अपने घर में शरण दे और उसका पालन-पोषण करे। वो आवारा कुत्ता यह शरण पाकर ‘स्ट्रीट डाग’ से ‘पेट डाग ’ यानी पालतू कुत्तों की श्रेणी में आ जाएंगे। शरण देने वाले ऐसे लोगों को चाहिए कि वो शरण में लिये इन कुत्तों का नगर निगम से लाइसेंस बनवाए और उन्हें एंटी रैबीज का इंजेक्शन भी लगवाए। ऐसा करने पर घर की बात घर में रह जाएगी और बची हडिडयों के अवशेष घर में पल रहा यह कुत्ता ही खा लेगा और इस तरह देश में आवारा कुत्तों की समस्या भी हल हो जाएगी। इस तरह देश में आवारा कुत्तों को गोद लेकर पालने का चलन बढ़ेगा और सड़कों पर बढ़ रहा यह खतरा भी खत्म हो जाएगा। इसी तरह से देश में आवारा पशुओं की भी समस्या थी जिनमें गौवंश की समस्या सबसे अधिक थी लेकिन जगह-जगह प्रदेश सरकारों ने और गौवंश प्रेमियों ने गौशालाओं का निर्माण करके इस समस्या को काफी हद तक हल कर लिया इसी तरह अलग-अलग सामाजिक संस्थाओं को और प्रदेश सरकारों को जगह-जगह आवारा कुत्तों के लिए शैल्टर होम बनाने पर विचार करना चाहिए, खाली सड़कों पर आकर सुप्रीम कोर्ट का विरोध करके आवारा कुत्तों के प्रति अपना प्यार जताने से यह समस्या हल होने वाली नहीं है। पूरी दुनिया में किसी भी विकासशील या विकसित देश में आपको कहीं भी सड़कों पर आवारा कुत्ते नजर नहीं आएंगे। हमें भी इसी तरह देश को सड़कों पर घूम रहे इन आवारा कुत्तों की समस्या से मुक्ति दिलानी चाहिए।

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