चर्चा-ए-आमराष्ट्रीय

दिल्ली की आतंकी घटना ने दिए कई गंभीर संकेत!

कमल सेखरी

देश की राजधानी दिल्ली में बीती शाम ऐतिहासिक लाल किले के पास मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर एक के निकट भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में जो बम विस्फोट की घटना हुई उसने पूरे देश को पीड़ा तो पहुंचाई ही है साथ ही कई गंभीर प्रश्न भी खड़े कर दिए हैं। यह विस्फोट इतना घातक और खतरनाक था जिसमें वहां खड़ी कई कारों के परखच्चे उड़ा दिए और वहां आसपास उपस्थित कई लोगों को ना केवल गंभीर रूप से घायल किया बल्कि कई मानव शरीरों के टुकड़े-टुकड़े करके हवा में उड़ा दिए। इस घटना में जो भी जानकारी अभी तक मिली है उसके अनुसार 10 लोगों की मौत हो गई और तीन दर्जन से अधिक लोग बुरी तरह से घायल हुए जिनमें अभी भी कई लोग चिंताजनक स्थिति में है और मरने वालों की संख्या दस से बढ़कर अधिक भी हो सकती है। दिल्ली की इस घटना ने हमारे उन सभी दावों को खारिज कर दिया जो हम अभी तक कह रहे थे कि आतंकवाद भारत के सभी अन्य स्थानों से खत्म हो गया और केवल कश्मीर घाटी तक ही एक छोटी शक्ल में सिमटकर रह गया है। हमारी सरकार यह दावा भी करती रही है कि घाटी में भी आतंकवाद को वहां के नौजवान युवकों ने अलविदा कर दिया है और अब उन युवकों ने अपने हाथों से बंदूकें छोड़कर कंप्यूटर, लैपटाप और किताबें पकड़ी ली हैं। लेकिन कल की जो घटना राजधानी के बींचोबीच घटित हुई है उसने कई प्रश्नचिन्ह तो खड़े कर ही दिये हैं साथ ही हमें यह सोचने पर भी मजबूर कर दिया है कि क्या कभी हम अपने देश से उस आतंकवाद को खत्म कर पाएंगे जिसकी जड़ें हमारे अनुसार पड़ोसी देश पाकिस्तान से जुड़ी हैं और वहीं से भारत में हो रही आतंकी घटनाओं को संचालित किया जा रहा है।
कल की आतंकी घटना से कुछ घंटे पहले ही दिल्ली के पड़ोस में हरियाणा के शहर फरीदाबाद के एक मकान से बेशुमार तादाद में विस्फोटक सामग्री हमारी पुलिस को मिली है और इस छापेमारी में वहां से दो एक-47 बंदूकें भी बरामद हुई हैं। फरीदाबाद में मिली लगभग तीन हजार किलो विस्फोटक सामग्री के तार कश्मीर से जुड़कर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर और गोरखपुर के साथ हरियाणा के फरीदाबाद से श्रंखलाबद्ध जुड़े पाए गए हैं। इससे पूर्व गुजरात में भी एक आतंकी ठिकाने पर छापा मारकर पुलिस ने बड़े आतंकी ठिकाने का भंडाफोड़ किया था। कुल मिलाकर यह प्रमाण मिले कि कश्मीर घाटी में सिमटकर रह गए आतंकवाद का नेटवर्क हमारे कई प्रदेशों से होता हुआ राजधानी दिल्ली तक भी पहुंच गया जिसका परिणाम हमने बीती शाम लालकिले के सामने होते देखा है। चिंताजनक बात यह है कि इस पूरे नेटवर्क में अशिक्षित बेरोजगार युवक शामिल नहीं थे बल्कि पढ़े लिखे उच्च शिक्षित कई डाक्टर्स भी शामिल दिखाई दिए जो आर्थिक रूप से भी संपन्न हैं। लिहाजा इन शिक्षित संपन्न डाक्टरों ने आतंकवाद को जो कश्मीर घाटी से दिल्ली तक पहुंचाया वो कोई मजबूरी नहीं थी बल्कि वो निसंदेह एक सोच और दिमागी जिहाद का ही एक संयुक्त जुड़ाव है। इस समूचे नेटवर्क का संबंध पाकिस्तान में चल रहे आतंकी गुट जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े होने के प्रमाण भी मिल रहे हैं। तो क्या दिल्ली की कल की घटना और कई प्रदेशों तक फैले आतंकी नेटवर्क के तार जैश-ए-मोहम्मद के गुट से जुड़े हैं और क्या यह उस आपरेशन सिंदूर के जवाब में की गई प्रतिक्रिया है जिसमें हमने पाकिस्तान में संचालित कई आतंकी गुटों को नेस्तानाबूद किया था। आपरेशन सिंदूर के बाद हमारी सरकार ने यह दावा किया था कि हमने पहलगाम के नरसंहार का ऐसा जवाब आतंकियों को दे दिया है कि अब वो भविष्य में कभी भी भारत की ओर नजर उठाकर देखने का साहस नहीं कर पाएंगे। हमने इसी आपरेशन सिंदूर की शुरूआत पाकिस्तान में चल रहे आतंकी ठिकानों को खत्म करने के बाद सरकारी तौर पर कहा था कि भविष्य में भारत में अगर कोई भी आतंकी घटना फिर हुई तो हम उसे युद्ध का संकेत मानकर युद्ध से ही उसका जवाब देंगे। दिल्ली में कल हुई दर्दनाक आतंकी घटना को क्या हम ‘प्रोक्सी वार’ की श्रेणी में मानेंगे या फिर इसे ‘एक्ट आफ वार’ मानकर इसका जवाब देंगे। यह कोई हवाई हमला नहीं था ना ही दूर से मिसाइलें दागी गर्इं बल्कि आतंकियों ने एक सुनियोजित योजना बनाकर हमारे देश की राजधानी दिल्ली के बीचोंबीच पहुंचकर इस नरसंहार की आतंकी घटना को अंजाम दिया है। हमारी चुनौतियों के बाद आतंकियों के इस तरह के दुस्साहसिक कारनामें तो हम किस नजर से देखते हैं और इसका क्या जवाब देते हैं, देश की जनता को एक बार फिर इसी का इंतजार है कि हमारी सरकार जो बोलती है वो करती है।
इस घटना में जो लोग शामिल नजर आए हैं वो पढ़े लिखे पेशेवर डाक्टर्स सरीखे लोग हैं जिन्होंने किसी आर्थिक मजबूरी में यह काम नहीं किया है बल्कि सोच समझकर एक विचारधारा के तहत इसे अंजाम दिया है। हम पीओके वापस लाएंगे हमारे इस सियासी दावों का जवाब उनके काश्मीर को वापस लेने की बदनीयती से बनाई जा रही सोच का कहीं हिस्सा तो नहीं है, हमें इस दिशा में भी गंभीरता से सोचना चाहिए।

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