नफरत के बीजों से निकल आए हिंसा के अंकुर !
The seeds of hatred gave rise to seeds of violence!

कमल सेखरी
पिछले लंबे समय से हमारे राजनेता और देश के मीडिया का एक बड़ा हिस्सा मिलकर देश में जो नफरत के बीज बो रहा था उन बीजों के अंकुर बीती रात नागपुर की सड़कों पर फूट फूटकर निकलने शुरू हो गए हैं। जिस नागपुर में बीती रात हिंसा की कई जगह जो घटनाएं हुईं उस नागपुर में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का मुख्यालय भी है और वहीं से महाराष्ट्र सरकार के मुख्यमंत्री जो गृहमंत्री भी हैं वो भी वहां से चुनकर आए हैं। इस तरह की हिंसा कल रात से पहले नागपुर में 56 वर्ष पूर्व 1968 में हुई थी। विश्व हिन्दू परिषद और हिन्दुओं के कुछ और संगठन मिलकर नागपुर की सड़कों पर यह कहते हुए आंदोलन कर रहे थे कि मुंबई में स्थित औरंगजेब की कब्र को हटाया जाए और वो इस बात पर आमादा थे कि वो वहां जाकर कार सेवा करके उस कब्र को अपने हाथों से हटा देंगे। बताया जाता है कि निकाले जा रहे इस जुलूस में आंदोलनकारियों के हाथों में हरे कपड़े में लिपटा ऐसा कुछ था जिसे उन्होंने वहां सड़क पर जलाया। उस हरे कपड़े में क्या लिपटा था यह तो अभी तक सामने नहीं आया लेकिन वहां से ये अफवाह फैली या फैलाई गई कि आंदोलनकारियों ने कुरान को जला दिया है। यह अफवाह आग से भी तेज गति से चारों ओर फैली और अलग-अलग बारह थाना क्षेत्रों से दूसरे संबंधित समुदाय के लोग उग्र होकर घरों से निकले और उन्होंने आक्रोश में कई जगह तोड़फोड़ की, कई घरों पर पथराव किया। सड़कों पर खड़े कई वाहनों और दुकानों को जला दिया। बताया जाता है कि इनमें से अधिकांश लोगों के हाथों में कुल्हाड़ी, डंडे, तलवारें और भाले थे। हालांकि बाद में घरों से निकले इन लोगों की आमने-सामने कोई मुठभेड़ हिन्दू संगठनों के आंदोलनकारियों से नहीं हुई लेकिन पुलिस के साथ हुई झड़पों में भारी पथराव हुआ और बीस से अधिक पुलिसकर्मी इसमें घायल हुए। विपक्षी दलों का कहना है कि ये आंदोलनकारी उस शासन व्यवस्था से जुड़े हैं जो स्पष्ट बहूमत के साथ महाराष्ट्र की सत्ता में है। तो ऐसे में उन्हें सड़कों पर आंदोलन करने और कार सेवा करके अपने हाथों से औरंगजेब की कब्र हटाने की क्या जरूरत थी। ये लोग चाहते तो अपनी सरकार पर दबाव डालकर अपनी मंशा पूरी करा सकते थे। बीती रात नागपुर में जो घटना हुई उस पर लग रहा था कि आज सुबह विधानसभा आरंभ होते ही विपक्षी दल शोर मचाएंगे और सरकार को इस हिंसा के लिए घेरने का काम करेंगे। लेकिन हुआ विपरीत, विधानसभा आरंभ होते ही सत्ता दल से जुड़े विधायकों और मंत्रियों ने मिलकर शोर मचाना शुरू कर दिया और अपना समर्थन बीती रात की घटना के आंदोलनकारियों के साथ जोड़ते हुए खुद भी औरंगजेब की कब्र हटाने के लिए सड़कों पर आंदोलन करने का ऐलान विधासनसभा के सदन में ही कर दिया। वो सरकार जो स्पष्ट बहुमत से महाराष्ट्र की सत्ता में बैठी है उसके विधायकों को अपनी मांग पूरी कराने के लिए सड़कों पर उतरकर अपनी सरकार के खिलाफ आंदोलन करने की क्या जरूरत है। महाराष्ट्र सरकार चाहे तो किसी भी समय विशेष अध्याधेश लाकर सरकारी तौर पर उस कब्र को तुड़वाने का काम कर सकती है, ऐसे में सरकार को खुद सड़कों पर उतरकर अपने ही खिलाफ आंदोलन करने की क्या जरूरत है,इससे स्पष्ट है कि महाराष्ट्र की सरकार इस समस्या का हल सदन से नहीं निकालना चाहती बल्कि सड़कों पर उतरकर हिन्दू-मुस्लिम जो माहौल एक लंबे समय से बनाने की कोशिश की जा रही है उस माहौल को कायम रखना चाहती है। शिव सेना उद्धव गुट के सांसद और सामना अखबार के संपादक संजय राऊत ने आज सुबह एक सार्वजनिक बयान देते हुए यह स्पष्ट किया है कि नागपुर में जो दंगा हुआ है वो भाजपा और आरएसएस ने मिलकर हिन्दुओं पर हिन्दुओं से ही हमला करा दिया है। नागपुर से नफरत की जो चिंगारी बीती रात निकलकर सड़कों पर आई है उसे अगर तुरंत रोकने की कोशिश नहीं की गई तो वो लपटों में बदलकर देश को जला भी सकती है। बिहार में इसी साल 2025 के अंत में विधानसभा चुनाव होना है, चार महीने बाद ही 2026 के प्रारंभ में पश्चिम बंगाल में राज्य का चुनाव होगा और कुछ महीनों बाद 2027 में देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव का होना निर्धारित है। बिहार, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश हमारे देश के तीन बड़े महत्वपूर्ण सूबे हैं और इन तीनों सूबों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों में भाजपा और सहयोगी दलों ने हिन्दू-मुस्लिम के मुददे को ही अपना मुख्य आधार चुना है जबकि इंडिया गठबंधन जातीय जनगणना, आरक्षण, और संविधान की सुरक्षा को अपना मुख्य आधार मानकर चल रहा है। देश में बेरोजगारी का क्या हिसाब है, महंगाई किस ऊंचाई तक पहुंच रही है, भारतीय मुद्रा डालर के मुकबाले कितनी निरंतर गिर रही है, देश के सभी राज्यों पर और केन्द्र सरकार पर कितने लाख करोड़ रुपयों का ऋण चढ़ा हुआ है, हम आम व्यक्ति के लिए कितने अस्पताल खोल रहे हैं और बच्चों की शिक्षा और युवाओं की तकनीकि शिक्षा के क्षेत्र में हम क्या कर रहे हैं इस पर ना तो कोई बात हो रही है और ना ही कोई हिसाब दिया जा रहा है। भारत धर्म और जाति प्रधान देश बनकर रह गया है, विकास की कोई बात ना सरकारें कर रही हैं और ना मीडिया बता रहा है। देश किस दिशा में जा रहा है यह सोचकर हर चिंतनशील व्यक्ति चिंता करने के अलावा कुछ और कर नहीं पा रहा।