विपक्ष को नहीं मिला अपने सवालों का जवाब!

कमल सेखरी
पहलगाम में हुए दर्दनाक नरसंहार की घटना के जवाब में केन्द्र सरकार ने पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए जो मुंहतोड़ जवाब देने के लिए आपरेशन सिंदूर चलाया था उसके बाद सीज फायर की घोषणा किए जाने से जहां एक ओर पूरे देश को हैरानी है वहीं सभी विपक्षी दल इस बात को लेकर सरकार से खफा हुए कि जब हमारी सेनाएं पराक्रम और अद्म साहस का परिचय देते हुए पाकिस्तान को घुटनों पर ले आई थी तो फिर अचानक सीज फायर की घोषणा क्यों की। इस आपरेशन सिंदूर के आरंभ होने से लेकर युद्ध विराम तक के बीच जो कुछ भी हुआ उस पर उन सभी विपक्षी दलों ने कई तरह की आपत्तियां जताई जो विपक्षी दल नरसंहार के समय से लेकर आपरेशन सिंदूर के सीज फायर होने तक चट्टान की तरह भारत सरकार के साथ खड़े थे। इतना ही नहीं आपरेशन सिंदूर ने जो हमारी सेनाओं ने खासतौर पर वायु सेना ने पाकिस्तान के अंदर चल रहे आतंकी अड्डों को नेस्तानाबूद किया उस सब की वास्तविकता दुनिया के कई देशों को बताने के लिए सात प्रतिनिधिमंडल भेजे गए, उनमें विपक्षी दल के भी कई प्रतिनिधि शामिल थे। उन सबने अपना पुरजोर प्रयास करके विश्व के कई देशों को आपरेशन सिंदूर में निशाना बनाए गए आतंकी ठिकानों की हकीकत समर्पित भाव और खुले दिल से बयां की। लेकिन विपक्षी दलों ने आपरेशन सिंदूर के दौरान बरती गई कई खामियों और अचानक किए गए सीज फायर को लेकर जांच की मांग की और सरकार से अनुरोध किया कि इस पर एक संसद का सत्र तुरंत बुलाया जाए और आपरेशन सिंदूर पर भी वैसे ही चर्चा की जाए जैसे 1962 में चीन के साथ युद्ध के दौरान और कारगिल युद्ध के बाद संसद सत्र बुलाकर खुली चर्चा कराई गई। लेकिन सरकार ने इस पर अपनी सहमति नहीं दी और संसद का विशेष सत्र बुलाने पर असहमति जताते हुए कहा कि इस विषय पर 21 जुलाई को बुलाए जा रहे सामान्य संसद सत्र में ही चर्चा संभव होगी। सरकार की इस घोषणा के बाद लगभग ढाई महीने इंतजार करने के उपरांत लग रहा था कि मानसून सत्र में जोरदार बहस होगी और विपक्षी दल जो रह रहकर सार्वजनिक सभाओं में कई तरह के आरोप लगा रहे हैं उस पर भी देश के लोगों को वास्तविकता जानने का अवसर मिलेगा। 21 जुलाई को आरंभ हुए मानसून सत्र में रोज की गहमा गहमी के बाद कल यानी मंगलवार 29 जुलाई को आपरेशन सिंदूर पर लोकसभा और राज्यसभा में बहस आरंभ की गई। विपक्ष ने 16 घंटे लोकसभा और 9 घंटे राज्यसभा में चली इस बहस के दौरान आपरेशन सिंदूर की प्रक्रिया में बरती गई कई खामियां और लापरवाहियों के कई संगीन आरोप सरकार पर लगाए। हालांकि सभी विपक्षी दलों ने तीनों सेनाओं के पराक्रम, साहस और शौर्य की प्रशंसा की लेकिन सरकार की नीति और नीयत पर कई गंभीर आरोप लगाकर संसद में उसका जवाब देश के सामने रखने को कहा। विपक्षी नेताओं ने जो आरोप लगाने थे वो लगाए लेकिन सरकार के तीन संबंधित मंत्रियों जिनमें राजनाथ सिंह रक्षा मंत्री ने 45 मिनट बोलकर और गृहमंत्री अमित शाह ने लगभग एक घंटे बोलकर इसके अलावा बहस के अंत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लगभग दो घंटे बोलकर उनमें से किसी एक सवाल का भी जवाब नहीं दिया जो विपक्षी नेता संसद के इस सत्र से पहले सार्वजनिक मंचों से पूछते चले आ रहे थे और बीते दिन लोकसभा में भी उन्होंने वही सवाल संसद के समक्ष भी रखे। उनके सवालों में जो खास पहलु थे वो ये कि जब हमारी सेनाओं का मनोबल इतना ऊंचा था तो अचानक सीज फायर क्यों घोषित किया गया और किसके कहने पर किया। विपक्षी नेताओं का कहना था अब जब हम इस विषय पर संसद में बात कर रहे हैं तो अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीस बार बोलकर यह सार्वजनिक रूप से कहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच मैंने व्यवसायिक डील की धमकी देकर सीज फायर कराया है। विपक्षी के नेता राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा कि मोदी जी आज जब संसद में बोलें तो स्पष्ट कर दें कि डोनाल्ड ट्रंप की इस सीज फायर में कोई भूमिका नहीं हैं और वो झूठ बोल रहे हैं। विपक्षी नेताओं ने यह भी पूछा कि आपरेशन सिंदूर के दौरान हमारे देश के कितने जहाज पाकिस्तान ने मार गिराए और चीन की मिसाइलों की उसमें क्या भूमिका रही। चीन ने इस छदम युद्ध में पाकिस्तान का कितना सहयोग किया है। अमेरिका जो अब से पहले हमारा सबसे निकट और प्रिय मित्र था उसने इस युद्ध में खुलकर पाकिस्तान की आर्थिक मदद क्यों की। आपरेशन सिंदूर को लेकर विश्च के कई देशों ने आतंकवाद की गतिविधियों की तो निंदा की लेकिन इस युद्ध को लेकर भारत का किसी एक देश ने भी समर्थन नहीं किया है। इसके अलावा भी और कई तकनीकि खामियों के प्रश्न सरकार से पूछे गए लेकिन सरकर के सभी मंत्रियों ने ऐसे किसी एक प्रश्न का उत्तर नहीं दिया। कल संसद में सरकार ने प्रतिउत्तर में जो कहा अगर वही सबकुछ कहना था तो विपक्ष को संसद का सत्र बुलाने के लिए ढाई महीने प्रतीक्षा में क्यों रखा। इस तरह का सामान्य उत्तर तो ढाई महीने पहले भी विशेष सत्र बुलाकर दिया जा सकता था। अधिकांश विपक्षी दल के नेता अब यही बोलते नजर आ रहे हैं कि सरकार के पास हमारे आरोपों का कोई जवाब नहीं है। हमें अपने सवालों का जवाब नहीं मिला।



