Beginning of the end विश्व खात्मे की शुरूआत

कमल सेखरी
Beginning of the end यानी विश्व खात्मे की शुरूआत आरंभ। विश्व की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए एक लंबे समय से यह अनुमान लगाया ही जा रहा था कि जल्द ही कुछ कारण ऐसे बनेंगे जो विश्व युद्ध को प्रेरित करेंगे और उस स्थिति में परिस्थितियां ऐसी बन जाएंगी कि विश्व के खात्मे की शुरूआत होती नजर आएगी। हमने भी इस संबंध में एक लेख हाल ही में इसी स्तंभ में लिखा था। पिछले 5 दिनों से मिडिल ईस्ट के दो मुल्कों के बीच ईजराइल और ईरान में जो महायुद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है वो अगर अगले कुछ दिन और ऐसे ही बनकर चलती रही तो हालात ऐसे भी निकलकर सामने आ सकते हैं कि ये परिस्थितियां तीसरे विश्व युद्ध में बदल सकती हैं। ईरान अपने आपको परमाणु शक्ति में परिवर्तित करना चाहता है और पूरे खाड़ी क्षेत्र में अकेला यहूदी देश ईजराइल देश इस पर सिर्फ इसलिए आपत्ति कर रहा है कि अगर ईरान ने परमाणु शक्ति अर्जित कर ली तो वो उसका इस्तेमाल ईजराइल के खिलाफ करेगा। जबकि इजराइल खुद से परमाणु हथियार बना चुका है लेकिन उसने अभी तक अपनी इस परमाणु शक्ति को लेकर अंतरराष्टÑीय स्तर पर कोई लिखित अनुबंध साइन नहीं किया है। उधर दूसरी ओर अमेरिका जो खाड़ी देशों में अपनी दादागिरी कायम रखना चाहता है उसने इजराइल को मित्र भाव में हर तरह का समर्थन पिछले कई दशकों से निरंतर दिया है और वर्तमान युद्ध में भी वो इरान के खिलाफ इजराइल को लगातार हथियार सप्लाई कर रहा है। अमेरिका के राष्टÑपति डोनाल्ड ट्रंप जो मानसिक रूप से अश्वेतों और मुस्लिमों के खिलाफ हैं वो अब इजराइल-इरान की इस भयंकर लड़ाई में जो भूमिका निभा रहे हैं उसको रूस और चीन बड़ी बारीकी से देख रहा है और समय आने पर दोनों देश कोई बड़ा फैसला भी ले सकते हैं। अमेरिका ने पिछले दिनों भारत का साथ छोड़कर पाकिस्तान को नया दोस्त बना लिया और उसे अपनी तीन वित्त निगमों के मार्फत ढाई हजार करोड़ रुपया मदद में दिया यह कहकर कि एशिया में वो किसी तरह तालिबान को रोककर रखे और विश्व में अन्य आतंकी गतिविधियों को नियंत्रित करने का पूरा जिम्मा पाकिस्तान को सौंप दिया। इस पर यूएनओ में भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने पुरजोर मुखालफत की यह कहकर कि अमेरिका पाकिस्तान को इतने अधिकार देकर बिल्ली को दूध की निगरानी पर बैठा रहा है। इतनी बड़ी रकम अमेरिका से लेने के बाद पाकिस्तान ने अपनी आंखें बदल लीं और इरान-इजराइल युद्ध में खुलकर इरान का साथ देने का बयान दे दिया। पाकिस्तान के खुलकर साथ आने के बाद खाड़ी क्षेत्र के सभी मुस्लिम देशों ने एक सुर में इरान का समर्थन देने की बात कहनी शुरू कर दी। भारत जो आबादी के हिसाब से विश्व का सबसे बड़ी मुल्क है वो अभी खामोशी साधे हुए है। आपरेशन सिंदूर में उसने अमेरिका के खिलाफ इजराइल से बड़ी संख्या में ड्रोन और दूसरे हथियार सहायता के नाम पर लिये हैं। वहीं दूसरी ओर इरान से उसकी सैकड़ों नहीं हजारों साल पुरानी दोस्ती है। जब वस्तुओं के आदान-प्रदान पर व्यापार होता था तब भारत परसियन मुल्क इरान के साथ उस समय भी व्यापार करता था। वर्तमान समय में भी उसे इरान से सबसे सस्ता तेल मिल रहा है, इरान सबसे निकट होने की वजह से भाड़ा भी कम पड़ता है और इरान डालर की जगह भारतीय रुपयों में भी लेनदेन कर लेता है। जी-7 अधिकांश मुल्क और अधिकतर युरोपियन देश अब खुलकर इजराइल के साथ हैं। एशियन देशों में भी भारत को छोड़कर अधिकतर देश इरान के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। ऐसे में अगर अमेरिका इस युद्ध को लेकर कोई पैंतरेबाजी करता है तो चीन और रूस और इनके साथ खाड़ी क्षेत्र के मुस्लिम देश इरान के साथ खड़े हो जाएंगे। भारत अकेला अलग-थलग सा नजर आएगा। विश्व इसाई मुल्कों और मुस्लिम मुल्कों के बीच बंटकर इरान-इजराइल के बीच इस महायुद्ध की आग में धार्मिक आधार पर टूटकर शामिल हो सकते हैं। जैसा कि हमारे सभी गं्थों में वर्णन किया गया है कि कलयुग की समाप्ति होगी और नया युग कल्कि अवतार के अवतरण से पुन: निर्मित होगा। हालांकि इन धार्मिक आधारों में मानव प्राणी के पापी कर्मों की परिकाष्ठा से जोड़कर कलयुग की समाप्ति का वर्णन है और यह भी कहा गया है कि यह परिवर्तन जल थल एक होने के बाद नवरूप में आएगा। परसों इजराइल ने अपने लड़ाकू जहाजों से इरान में जो मिसाइलें दागी हैं उससे 2.5 रिएक्टर स्केल का बराबर धरती में कंपन हुआ है और लोगों ने उसे जलजले का नाम दिया है। हम अनुमान लगा सकते हैं कि जिन आठ-दस देशों के पास परमाणु हथियार हैं और वो उनका एक साथ इस्तेमाल करते हैं तो निसंदेह धरती पर ऐसा जलजला होगा कि जलथल एक होने की संभावनाएं भी बन जाएंगी इससे इनकार नहीं किया जा सकता है।



