चर्चा-ए-आमस्लाइडर

कुछ सियासी तानाशाह विश्व के लिए बने खतरा

– 476 बार अमेरिका ने अड़ाई दूसरे देशों में अपनी टांग
– रूस ने 96 बार कराया गैर मुल्कों में युद्ध
– ईरान-इजराइल में हालात अभी भी सामान्य नहीं

कमल सेखरी

पहले कारण बनाओ फिर हालात पैदा करो और उसके बाद दो मुल्कों में जंग कराकर उन्हें विनाश और बर्बादी की कगार पर खड़ा करके अचानक बीच में कूद आओ और किसी मंझे हुए खेल रेफरी की तरह जोर से सीटी बजाकर लड़ रहे दोनों मुल्कों को जहां हैं वहीं रोक दो और इस युद्ध विराम कराने का क्रेडिट अपने आपसे अपने ऊपर लेकर अपनी पीठ खुद थपथपाने लग जाओ यह कहकर की हम विश्व शांति के हिमायती हैं और दुनिया में मानव जाति का नरसंहार और जंग में उतरे मुल्कों की संपत्तियां नष्ट होते नहीं देख सकते। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान और इजराइल के बीच छिड़ी जंग जो अब महाजंग का रूप ले चुकी है उसके बीच में अचानक कूदकर सीज फायर तो करा दिया लेकिन ये दोनों अड़ियल मुल्क डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे के साथ खड़े नजर नहीं आ रहे क्योंकि सीज फायर घोषित होने के कुछ घंटों बाद ही इजराइल और ईरान आपस में तलख टिप्पणियां तो कर ही रहे हैं साथ में हवाई हमले करके आपस में नुकसान पहुंचाने से बाज भी नहीं आ रहे। इजराइल-ईरान युद्ध के बीच अमेरिका ने क्या-क्या नाटक करके दिखाए उससे पूरा विश्व सकते में आ गया। उनका पहला टारगेट था कि ईरान परमाणु शक्ति अर्जित करने से बाज आए ऐसा करने के लिए अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर जबरदस्त हमला किया। इसके बाद ट्रंप ने कहना शुरू कर दिया कि हम ईरान को एक महान देश के रूप में देखना चाहते हैं लिहाजा इसके लिए वहां की सत्ता में परिवर्तन किया जाना अनिवार्य है और हम सत्ता परिवर्तन के प्रयास में खुद भी युद्ध में आ सकते हैं। कुछ ही घंटों बाद ट्रंप ने घोषणा कर दी कि नरसंहार रोकने और विश्व शांति कायम करने के लिए दोनों मुल्कों को सीज फायर करना चाहिए और भारत-पाक युद्ध की तरह उन्होंने फोरी तौर पर इन दो जानी दुश्मनों के बीच सीज फायर की घोषणा करा दी। ऐसा पहली बार नहीं हुआ कि अमेरिका ने दो गैर मुल्कों के बीच में जंग ना कराई हो और उनके नुकसान कराके उनके बीच सीज फायर भी करा दिया हो। अमेरिका ने अपनी स्थापना 4 जुलाई 1776 से लेकर अब तक 474 बार गैर मुल्कों के विवादों में अपनी टांग अड़ाई और उनके बीच भयंकर जंग छिड़वाकर बाद में सीजफायर कराया। इन कारणों में अधिकांश प्रयास दूसरे मुल्कों में सत्ता परिवर्तन कराकर अपनी पसंद की सरकार स्थापित कराने के ही रहे। मौजूदा स्थिति में भी खाड़ी क्षेत्र के 11 देशों में अमेरिका ने जबरन अपने सैनिक अड्डे बनाए हुए हैं और वहां साढ़े चार हजार से अधिक सैनिक तैनात किए हुए हैं। ऐसा ही उसने उत्तरी और दक्षिणी कोरिया के बीच किया है। पेनजांग क्षेत्र में साउथ और नार्थ कोरिया के बीच जो सीमा रेखा खींची गई है उसके दक्षिणी किनारे पर यानी साउथ कोरिया में 5 हजार से अधिक अमेरिकी सैनिक पिछले 50 सालों से तैनात किए हुए हैं। दो हजार से अधिक पैटन टैंक और तोपें अमेरिका ने साउथ कोरिया की रक्षा में वहां तैनात की हुई हैं, ऐसी स्थिति रूस की भी है। 26 दिसंबर 1991 में जब सोवियत संघ के अलग-अलग टुकड़े हुए और वो कई देशों में विभाजित हो गया उसके बाद से अब तक 96 बार रूस ने उन अलग हुए सभी देशों में अपनी टांग अड़ाकर वहां सैनिक जंग करवाकर वहां के देशों की सत्ता परिवर्तित कराई। अब ईरान-इजराइल के बीच आनन-फानन में सीज फायर तो करा दिया गया है लेकिन दोनों देशों के बीच दुश्मनी अभी भी बरकरार है और कभी भी विस्फोटक रूप ले सकती है। ऐसी ही भूमिका अमेरिका के आपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाक में छिड़े युद्ध को लेकर बनी जिसमें यकायक सीज फायर तो करा दिया गया लेकिन तलखी और दुश्मनी पहले की तरह ही बनी हुई। इस युद्ध के बाद भी सीज फायर घोषित होने के उपरांत दो ही घंटे बाद पाकिस्तान ने हिन्दुस्तान पर हमले जारी रखे और वो सारी रात अगले दिन सुबह तक भारत की कश्मीर घाटी क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइलों से हमले करता रहा। दुनिया की मौजूदा सियासी परिस्थितियों में कुछ सिरफिरे तानाशाह शासक ऐसे हैं जिनकी मानसिक स्थिति संतुलित नहीं है और वो विश्व के लिए कभी भी बड़ा खतरा बन सकते हैं।  

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