एसआईआर: जिसका डर था वही बात हो गई !

कमल सेखरी
जिसका डर था बेदर्दी वही बात हो गई। अब ये बेदर्दी कौन है और किसके कहने पर ये दर्द दिया गया है और ये दर्द हुआ किसे है ये सब बातें अभी प्रश्न जाल में उलझी हुई हैं। उत्तर प्रदेश में एसआईआर की गणना पूरी होने का समय दो बार बढ़ाया गया और दूसरी बार समय बढ़ने के बाद भी परिणाम वही निकलकर सामने आया जो अपेक्षित था और जिस पर सियासी चर्चाएं चल रही थीं। प्रदेश के प्रमुख विपक्षी दल के मुखिया अखिलेश यादव पहले ही कह चुके थे कि प्रदेश की सूची से दो करोड़ नब्बे लाख वोट काटे जा रहे हैं और वो इतनी बड़ी संख्या में कटने वाले इन वोटों को अपने समर्थन के मतदाता बता रहे थे और कह रहे थे कि चुनाव आयोग भाजपा सरकार के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों को हराने के लिए यह षडयंत्र रच रहा है। इसके विपरीत अभी एक सप्ताह पहले ही भाजपा के कार्यकर्ताओं की एक बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश में कुल 16 करोड़ वोटर हैं जिनमें से 4 करोड़ वोटर काटे जा रहे हैं और इन चार करोड़ वोटरों में से 85 फीसदी वोटर हमारी पार्टी यानि भाजपा के हैं। श्री योगी ने भाजपा के सभी कार्यकर्ताओं से अपील की कि अभी कुछ समय बाकी है वो मुस्तैदी से काम करें और घर-घर जाकर अपने समर्थन के मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में शामिल कराएं। अब इन दो विपरीत बयानों में से कौन सही है और कौन गलत ये अनुमान लगा पाना कठिन हो रहा था। अब जब 26 दिसंबर को पूर्व घोषणा अनुसार एसआईआर की रिपोर्ट सामने आई तो पता चला कि सियासी नेताओं में जो चर्चा थी वो किसी हद तक ठीक थी क्योंकि एसआईआर की पहली सूची जो सामने आई उसमें 2 करोड़ 90 लाख मतों की कटौती पाई गई, उस सूची की तुलना में जिसके आधार पर 2022 का विधानसभा चुनाव और 2024 का लोकसभा का चुनाव कराया गया था। इन 2 करोड़ 90 लाख मतों की कटौती में जहां औसतन 50 से 60 हजार वोट हर विधानसभा क्षेत्र में कटते नजर आ रहे हैं वहीं लखनऊ लोकसभा और गाजियाबाद लोकसभा क्षेत्रों में यह संख्या अपेक्षाकृत तीन गुणा है। इन दोनों लोकसभा क्षेत्रों में कुल मतदाता संख्या का तीस फीसदी मत एसआईआर प्रक्रिया में फर्जी पाया गया और उसे घोषित नई सूची से बाहर कर दिया गया। मौजूदा स्थिति को देखते हुए विपक्षी दल सपा के मुखिया अखिलेश यादव खुश नजर आ रहे हैं और यह कहते दिखाई दे रहे हैं कि ये जो इतनी बड़ी संख्या में वोट काटे गए हैं ये भाजपा का चुनाव आयोग से मिलकर मुख्यमंत्री श्री योगी के खिलाफ षडयंत्र है और भाजपा खुद ही उन्हें 2027 के चुनावों में हराना चाहती है। इसकी पुष्टि मुख्यमंत्री श्री योगी भी कुछ दिन पहले यह कहकर कर चुके हैं कि बड़ी संख्या में कट रहे वोटों का 85 फीसदी हिस्सा हमारा ही कट रहा है। अब ये दर्द योगी जी को दिया गया है या विपक्ष को दिया गया है,यह तो वक्त आने पर ही सामने आएगा लेकिन यह तय है कि जिसका डर था बेदर्दी वही बात हो गई। अब ये बदर्दी कौन होगा और दर्द किसे पहुंचेगा यह भी समय ही बताएगा।

