चर्चा-ए-आम

देश में भड़क सकती है धार्मिक हिंसा!

हम कहां थे, कहां से कहां आ गए। जहां आ गए वहां से देश को कहां ले जाना चाहते हैं। हम परेशान हैं कि देश को अब और कहां ले जाएंगे। ना कोई दिशा है ना कोई लक्ष्य है और ना ही मंजिल नजर आ रही है। हमने देश की धरोहर अपने मासूम स्कूली बच्चों की शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए क्या करना है, इस पर कोई विचार नहीं हो रहा है। अपने देश के शिक्षित नौजवानों के हाथों को इस तरह रोजगार देना है, इस पर कोई सरकारी योजना बनती नजर नहीं आ रही। देश के अवाम की सेहत को कैसे बेहतर बनाकर रखा जाए इस विषय पर कोई राजनेता बात नहीं कर रहा। निरंतर बढ़ती महंगाई से घर परिवारों को कैसे राहत पहुंचाई जाए इस पर भी कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई। किस तरह और कैसे सत्ता बचाई जाए या सत्ता हासिल की जाए देश के राजनेताओं के विचारों और आचरण में इससे अलग हटकर कोई बात घर ही नहीं कर रही। अब सत्ता में रहने और सत्ता में आने के जो विनाशकारी तरीके हमारे राजनेताओं ने खोज निकाले हैं वो आने वाले समय में देश के लिए बड़े ही घातक संकेत दे रहे हैं। अपनी इस अनिष्ट सोच को अमलीजामा पहनाने के लिए धार्मिक उन्माद और जातीय मतभेद फैलाकर अपने सियासी लक्षय पूर्ति का सबसे सरल और सुगम रास्ता खोज निकाला है। पिछले कुछ दिनों से उत्तर प्रदेश में आरंभ हुए धार्मिक उन्माद ने अब देश के अन्य राज्यों में भी अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। जहां एक और मुस्लिम समुदाय पिछले जुमे के दिन आई लव यू मोहम्मद के पोस्टर लेकर सड़कों पर उतरा और प्रदेश की सत्ता ने बेरहमी से उन पर पुलिसिया कहर बरपाया तो वहीं अगले दिन हिन्दू संगठनों ने आई लव यू महादेव के पोस्टर हाथ में लेकर सड़कों पर प्रदर्शन किया। सड़कों पर उतरा मोहम्मद और महादेव के नाम से ये धार्मिक उन्माद देश के कई प्रदेशों में फैल गया। इस धार्मिक उन्माद ने जल्द ही राजनीतिक रंग पकड़ लिया और इस धार्मिक पोस्टरवार में कई राजनेताओं के नाम से भी पोस्टर छपकर दीवारों पर चिपक गए और सड़कों पर लहराने लगेञ आई लव यू योगी और आई लव यू बुल्डोजर जैसे पोस्टरों के जवाब में आई लव यू अखिलेश, आई लव यू समाजवाद और आई लव यू पीडीए के पोस्टर भी बड़ी संख्या में बाहर निकल आए। कांग्रेस भी कहां पीछे रहती । आई लव यू राहुल, आई लव संविधान, आई लव रोजगार जैसे पोस्टर भी मैदान में निकल आए। यानी मोहम्मद और महादेव के नामों से शुरू हुआ धार्मिक उन्माद कुछ राजनेताओं के नामों पर आकर सिमट गया। ऐसा ही कुछ अभी हाल ही में दुबई में खेली गई एशियन क्रिकेट प्रतियोगिता के बीच भारत और पाकिस्तान के मैचों के दौरान देखने को मिला। इन मैचों में भारत और पाक के क्रिकेट खिलाड़ियों ने जिस आचरण का प्रदर्शन किया वो निसंदेह खेल भावना के एक दम विपरीत था। पूरे विश्व के खेल प्रेमियों ने इस तरह के बरते गए व्यवहार की निंदा की है। कुल मिलाकर संक्षिप्त में यही कहा जा सकता है कि ऐसा परिस्थितियां यदि हमारे राजनेता अपने निजी सियासी स्वार्थों के लिए इस तरह की विनाशकारी हरकतें करने से बाज नहीं आए तो वो दिन दूर नहीं कि जब हमें जल्द ही देश की सड़कों पर धार्मिक हिंसा का तांडव देखने को मिलेगा। वैसे इस तरह की आशंका को लेकर पूर्व में भी हम अपने लेख में यह बात लिख चुके हैं।

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