राष्ट्रीय
दमन साहित्य महोत्सव में स्वर्ण मुकुट पहनाकर पंडित सुरेश नीरव को किया गया सम्मानित

- मुंबई की साहित्यिक संस्था अंतर्राष्ट्रीय भाषा अकादमी ने साहित्य दधीचि सम्मान से अलंकृत किया पंडित सुरेश नीरव को
- साहित्यकार विनय कुमार और मधु मिश्रा के व्यक्तित्व और कृतित्व पर केन्द्रित बहुराष्ट्रीय पत्रिका प्रज्ञान विश्व का हुआ लोकार्पण
- बेंगलुरु कर्नाटक की कवयित्री डॉ मंजु गुप्ता के काव्य संग्रह मेरे गीत तुम्हारे लिए का भी हुआ लोकार्पण
दमन। अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति का तीन दिवसीय बाईसवां राष्ट्रीय अधिवेशन पूरी दिव्यता और भव्यता के साथ एक उत्सवधर्मी वातावरण में सफलता पूर्वक संपन्न हुआ। उद्घाटन सत्र में संस्था का परिचय और स्वागत भाषण का दायित्व गुरुग्राम हरियाणा से आए लोकप्रिय कवि एवं शिक्षा विद् मदन साहनी ने संभाला और उद्घाटन वक्तव्य महाराष्ट्र, मंबई के प्रतिष्ठित साहित्यकार अंतर्राष्ट्रीय भाषा अकादमी और नीलांबरी फाउंडेशन के अध्यक्ष पंडित सागर त्रिपाठी ने दिया। इस अवसर पर विश्व विख्यात साहित्यकार प्रज्ञान पुरुष पंडित सुरेश नीरव को भारत की समग्र भाषाओँ के संवर्धन हेतु किए गए उल्लेखनीय रचनात्मक अवदान हेतु संस्था के प्रतिष्ठित अलंकरण साहित्य दधीचि सम्मान से अलंकृत किया गया। यह सम्मान हिंदी उर्दू के लब्धप्रतिष्ठत पंडित सागर त्रिपाठी ने स्वयं मुंबई से आकर अपने कर कमलों से कर्नाटक शैली में पति -पत्नी दोनों को बैठालकर प्रदान किया। बेंगलुरु से आए प्रतिष्ठित गीतकार ज्ञान चंद मर्मज्ञ के निर्देशन में कर्नाटकी शैली में यह सम्मान पंडित सुरेश नीरव को दिया गया।
पंडित सुरेश नीरव के साहित्य साधना के 75 वर्ष पूरे होने पर रचनाकारों की ओर से मुंबई से आईं डॉक्टर दमयंती शर्मा ने श्री नीरव को मुकुट पहनाया। प्रतिष्ठित पत्रकार और इटावा टाइम्स के संपादक अतुल वीएन चतुर्वेदी ने विशालकाय जन्मदिन केक भेजकर सभी को हतप्रभ कर दिया। प्रथम सत्र में सर्वभाषा कवि सम्मेलन हुआ जो अत्यंत सफल रहा। जिसकी अध्यक्षता लोक प्रिय मालवी कवि डॉ प्रकाश उपाध्याय ने की। दूसरे दिन देश भर से आए साहित्यकारों का सारस्वत सम्मान किया गया और लंच के बाद दूसरे सत्र में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता प्रतिष्ठित गीतकार ज्ञान चंद मर्मज्ञ ने की। दोनों दिन के कार्यक्रमों का सभागार से लाइव प्रसारण किया गया जिसे विश्वभर के साहित्य प्रेमियों ने आनंद के साथ सुना।



