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आई.टी.एस. डेंटल कॉलेज में एक दिवसीय सीडीई एवं कार्यशाला आयोजित

गाजियाबाद। आई.टी.एस. डेंटल कॉलेज के प्रोस्थोडोंटिक्स एंड क्राउन एंड ब्रिज विभाग द्वारा फुल माउथ रिहैबिलिटेशन विषय पर एक दिवसीय सी.डी.ई. एवं कार्यशाला कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में देश के विभिन्न डेंटल कॉलेजों के 175 से अधिक बी.डी.एस. छात्र एवं एम.डी.एस. के विद्यार्थियों के साथ-साथ सभी दंत विभागों के दंत चिकित्सक शामिल थे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि व वक्ता डॉ दिविज खुल्लर थे, जो प्रोस्थोडोंटिक्स के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित नाम है। डॉ. दिविज के नाम एक विश्व रिकॉर्ड है, वह पहले पोस्ट ग्रेजुएट छात्र है जिन्होंने 54 फुल माउथ रिहैबिलिटेशन केस सफलतापूर्वक पूर्ण किये है। यह उनकी क्लीनिकल उत्कृष्टता व समर्पण का प्रतीक है। इस कार्यक्रम का शुभारम्भ अतिथि वक्ता डॉ दिविज खुल्लर, आई.टी.एस.-द एजुकेशन ग्रुप के चेयरमैन, डॉ. आर.पी. चड्ढा एवं वाईस चेयरमैन अर्पित चड्ढा द्वारा माँ सरस्वती के सामने दीप प्रज्जवलित करके किया गया। इस अवसर पर संस्थान के डायरेक्टर-प्रिंसिपल, डॉ देवी चरण शेट्टी के साथ-साथ संस्थान के सभी डीन्स, दंत विभागों के एचओडी एवं दंत चिकित्सक भी उपस्थित रहे।
कार्यशाला के दौरान डॉ. दिविज के द्वारा एक गहन और विस्तृत वैज्ञानिक विचार विमर्श प्रस्तुत किये गये। इसके बाद लाइव डेमोंस्ट्रेशन तथा हैंड्स-आॅन सत्र भी आयोजित किये गये, जिनमें प्रतिभागियों ने इन तकनीकों को व्यावहारिक रूप से सीखा। व्याख्यान के दौरान, उन्होंने फुल माउथ रिहैबिलिटेशन मामलों की पहचान करने, वर्टिकल डाइमेंशन का मूल्यांकन करने, वर्टिकल डाइमेंशन में कमी के क्लीनिकल परिणामों को समझने और डि-प्रोग्रामिंग की आवश्यकता पर चर्चा की। उन्होंने विभिन्न डि-प्रोग्रामिंग विधियों और सेंटरिक रिलेशन को पहचानने और रिकॉर्ड करने की तकनीकों पर भी विस्तार से बताया।
इसके अतिरिक्त उन्होंने सही सेंटरिक रिलेशन और आॅक्लूसल प्लेन की स्थापना और पैराफंक्शनल आदतों वाले रोगियों के उपचार योजना में आवश्यक संशोधन शामिल थे। इंडिजिनस तकनीक और पीएमएस तकनीक का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया, जिसमें दोनों की अपेक्षित फायदों और सीमाओं पर चर्चा की गई। इसमें फेसबों ट्रांसफर, लूसिया जिग फेब्रिकेशन, डि-प्रोग्रामिंग तकनीकों, आर्टिकुलेटर को जीरो करने और प्रोग्रामिंग के विवरण में लाइव डेमोंस्ट्रेशन शामिल थे। यह दंत चिकित्सकों को फुल माउथ रिहैबिलिटेशन के क्षेत्र में ज्ञानवर्धन और नवीन तकनीकों से अवगत कराने का एक शानदार अवसर था, जिससे वह भविष्य में मरीजों को बेहतर उपचार प्रदान कर सकें। कार्यक्रम के अंत में डॉ. दिविज ने फुल माउथ रिहैबिलिटेशन स्किल्स को सशक्त बनाने हेतु सभी प्रतिभागियों को प्रेरित किया। सभी प्रतिभागियों ने उनकी सराहना करते हुए कार्यक्रम की सफलता पर खुशी जताई। इस कार्यक्रम के माध्यम से सभी प्रतिभागियों को सर्वश्रेष्ठ क्लीनिकल ज्ञानवर्धक मंच प्रदान करने के लिये सभी ने आईटीएस- द एजुकेशन ग्रुप के चेयरमैन डॉ. आरपी चड्ढा तथा वाईस चेयरमैन अर्पित चड्ढा को धन्यवाद दिया।

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