उत्तर प्रदेशगाजियाबाद

सावन मास के अंतिम सोमवार को दूधेश्वरनाथ मंदिर में उमड़ा भक्तों का सैलाब

गाजियाबाद। सावन मास के अंतिम सोमवार को सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर में सावन के अंतिम सोमवार को भक्तों का भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। भगवान दूधेश्वर के दरबार में हाजरी लगाने के लिए देश भर से आम से लेकर वीवीआईपी तक पहुंचे। सभी ने भगवान दूधेश्वर नाथ का दर्शन-पूजन कर उनका गंगाजल से अभिषेक किया व मंदिर के पीठाधीश्वर, श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े के अंतर्राष्ट्रीय प्रवक्ता व दिल्ली संत महामंडल के अध्यक्ष श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज से भेंटकर उनका आशीर्वाद लिया। मंदिर के मीडिया प्रभारी एस आर सुथार नें बताया कि सावन के अंतिम सोमवार को मंदिर में रात्रि 10 बजे से ही भक्तों की कतारें लगने लगी थीं। भीड़ को देखते हुए मंदिर के 500 स्वयंसेवकों ने श्रृंगार समिति के अध्यक्ष विजय मित्तल के नेतृत्व में भगवान का भव्य श्रृंगार किया। महाराजश्री ने भगवान की पूजाअर्चना की व उनका अभिषेक किया और 1 बजे मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खोला गया तो पूरा क्षेत्र ही भगवान दूघेश्वर के जयकारों से गूंज उठा। रात्रि 3 बजे रात्रि 3 बजे प्राचीन देवी मंदिर द्वारका पुरी दिल्ली गेट के महंत गिरिशानंद गिरि महाराज ने धूप आरती व दीप आरती की व भगवान को छप्पन व्यंजनों का भोग लगाया गया, जिसके पश्चात पुन: भगवान के दर्शन का सिलसिला शुरू हो गया। सांय 7 बजे भी भगवान का भव्य श्रृंगार हुआ और धूप-दीप आरती के बाद भगवान को छप्पन भोग लगाए गए। भीड़ के चलते भक्तों को भगवान के दर्शन के लिए घंटों इंतजार करना पडा। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, गुजरात आदि से आए लाखों भक्तों की भीड़ के बावजूद भक्तों को पूजा-अर्चना व जलाभिषेक करने में किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं हुई। श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज की अध्यक्षता व मार्गदर्शन में भक्तों के लिए की गई व्यवस्थाओं की सभी ने सराहना की व महाराजश्री का आभार व्यक्त किया। महाराजश्री ने मुख्यमंत्री का आभार जताया इस बार मंदिर में सावन माह, सावन के सोमवार व सावन शिवरात्रि में भक्तों की भीड़ ने सभी रिकार्ड तोड़ दिए, इसके बावजूद जलाभिषेक के दौरान भक्तों को कोई परेशानी नहीं हुई। भक्तों ने अहुत ही आसानी से भगवान के दर्शन किए। ऐसी शानदार व्यवस्था के लिए महाराजश्री ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ काविशेष आभार जताया। मुख्यमंत्री ने सभी व्यवस्थाओं पर नजर रखी और मंदिर में भगवान दूधेश्वर की पूजाअर्चना भी की। श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने कहा कि यह मुख्यमंत्री के प्रयासों का ही फल है कि इस बार की कांवड यात्रा ने महाकुंभ की तरह ही सफलता का इतिहास रच दिया। अधिकारियों ने भगवान के सेवक के रूप में सेवा की महाराजश्री ने जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मंदर, पुलिस आयुक्त जे रविन्दर गौड़, नगरायुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक समेत सभी विभागों के अधिकारियों का भी आभार जताया, जिन्होंने ना सिर्फ शानदार व्यवस्थाएं उपलब्ध कराईं, वरन सेवक की भांति सेवा भी की। मंदिर विकास समिति के अध्यक्ष धर्मपाल गर्ग, उपाध्यक्ष अनुज गर्ग, श्रृंगार सेवा समिति के अध्यक्ष विजय मित्तल समेत सभी स्वयंसेवकों का भी उन्होंने आभार जताया। साथ ही सभी पत्रकारों का भी आभार जताया, जिन्होंने पूरे सावन अपनी लेखनी से मंदिर के सावन महोत्सव को देश ही नहीं पूरे विश्व के लोगों तक पहुंचाया। जिला.पुलिस प्रशासन व नगर निगम के साथ मंदिर के स्वयंसेवक भी व्यवस्थाओं में पूर्ण सहयोग देंगे। मंदिर के मीडिया प्रभारी एस आर सुथार ने बताया कि सावन के अंतिम सोमवार भगवान दूधेश्वर नाथ के जलाभिषेक हेतु मंदिर में देश भर से भक्त पहुंचेंगे। इस बार भीड सावन के तीनों सोमवार की अपेक्षा और अधिक रहेगी। इसी के चलते मंदिर में इस बार खास तैयारियां की गई। रात्रि 10 बजे से भक्तों की कतारें लग जाएंगी। सबसे पहले श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज पूजा-अर्चना कर भगवान दूधेश्वर का अभिषेक करेंगे, उसके बाद रात्रि 12 बजे के बाद मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खोल दिए जाएंगे। रात्रि 3 बजे भगवान का भव्य श्रृंगार होगा। प्राचीन देवी मंदिर द्वारका पुरी दिल्ली गेट के महंत गिरिशानंद गिरि महाराज ने धूप आरती व दीप आरती करेंगे व भगवान को छप्पन भोग लगाया जाएगा। सांय 7 बजे भी भगवान का भव्य श्रृंगारए अभिषेकए आरती होगी और छप्पन भोग लगाया जाएगा। श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने कहा कि सावन का अंतिम सोमवार उन भक्तों के लिए भगवान दूधेश्वर की पूजा का स्वर्णिम अवसर है, जो किसी कारणवश सावन माह या सावन के सोमवार को उनका दर्शन पूजन नहीं कर पाए। अंतिम सोमवार को भगवान दूधेश्वर की पूजा अर्चना व जलाभिषेक पूरे सावन माह व सभी सोमवार के फल की प्राप्ति होगी। स्वार्थ सिद्धि योग, ब्रहम योग, इंद्र योग, अनुराधा नक्षत्र, चित्रा नक्षत्र जैसे शुभ संयोग के चलते सावन का अंतिम सोमवार और भी खास हो गया है। सबसे विशेष बात यह होगी कि 4 अगस्त को सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरूआत प्रात: 11 बजकर 41 मिनट से शुरू हो जाएगी और इसका समापन 5 अगस्त को दोपहर 1.13 बजे तक रहेगी। ऐसे में एकादशी तिथि भी रहेगी जिससे भक्तों को भगवान विष्णु की कृपा भी प्राप्त होगीए हालांकि सूर्याेदय कालीन एकादशी होने की वजह से एकादशी व्रत 5 अगस्त को रखा जाएगा। महाराजश्री ने कहा कि ऐसी कन्याएं जिनका विवाह नहीं हो पा रहा है, वे सावन के अंतिम सोमवार को व्रत रखकर भगवान शिव की पूजाअर्चना करें और दूध, दही, गंगाजल, शहद आदि से भगवान का अभिषेक करें, उन्हें योग्य जीवन साथी की प्राप्ति होगी। इसके अलावा जिस मनोकामना के साथ सावन के अंतिम सोमवार को भगवान दूधेश्वर की पूजा-अर्चना की जाएगी, वह अवश्य पूर्ण होगी।

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