लेटेस्टविचार

अब पूतिन खुद बात करें झेलेंस्की से

डॉ. वेदप्रताप वैदिक
यूक्रेन से हजारों भारतीय सुरक्षित लौट आए, यह खुशखबर है। रूस और यूक्रेन ने उन्हें बाहर निकलने के लिए सुरक्षित बरामदा दे दिया है। बदले में भारत इस वक्त यूक्रेन और रूस दोनों की मदद करे, यह जरुरी है। यह काम न अमेरिका कर सकता है, न चीन और न ही अन्य यूरोपीय राष्ट्र, क्योंकि वे इस या उस पक्ष से जुड़े हुए हैं। रूसी हमले को अब दो सप्ताह होने को आए हैं। अब दोनों देशों का दम फूलने लगा है। रूस में भी हजारों लोग पूतिन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और उधर यूक्रेन के राष्ट्रपति झेलेंस्की ने अब ऐसा बयान दे दिया है कि उसे वह महिने-दो महिने पहले दे देते तो रूसी हमले की नौबत ही नहीं आती। उन्होंने न सिर्फ नाटो के जबानी-जमा-खर्च की पोल खोल दी बल्कि अपनी गलती भी स्वीकार की। उन्होंने नाटो के फुसलावे में आकर रूस से झगड़ा मोल ले लिया। अब उन्होंने एबीसी टीवी को दिए गए एक इंटरव्यू में साफ-साफ कह दिया है कि यूक्रेन के नाटो में शामिल होने का सवाल ही नहीं उठता। नाटो किस काम का है? उसने यूक्रेन का इतना-सा निवेदन भी नहीं माना कि वह यूक्रेन के हवाई-क्षेत्र पर प्रतिबंध लगा दे ताकि रूसी विमान यूक्रेन पर बम न बरसा सकें। वे ऐसे देश के राष्ट्रपति नहीं बने रहना चाहते हैं, जो घुटने टेक कर अपनी सुरक्षा की भीख मांगे। झेलेंस्की ने दोनबास क्षेत्र के दो जिलों को स्वतंत्र राष्ट्र बनाने की रूसी घोषणा की दो-टूक भर्त्सना नहीं की। उन्होंने कहा कि दोनेत्स्क और लुहांस को रूस के अलावा किसी ने भी मान्यता नहीं दी है। इन दोनों क्षेत्रों के भविष्य के बारे में भी हम बातचीत कर सकते हैं। लेकिन वहां के निवासियों में जो लोग यूक्रेन के साथ रहना चाहते हैं, उनके बारे में भी सोचना होगा। झेलेंस्की के इस बयान के बावजूद यदि पूतिन अपनी जिद पर डटे रहते हैं तो अनेक तटस्थतावादी देशों और बुद्धिजीवियों के बीच उनकी छवि विकृत होती चली जाएगी। इस समय जो चीन बराबर रूसी रवैए के प्रति सहानुभूति दिखाता रहा है, उसने भी रूस से अपील की है कि वह संयम का परिचय दे। तुर्की और चीन भी अब मध्यस्थता की कोशिश में लगे हैं। आशंका यही है कि कहीं पाकिस्तान के इमरान खान इस मामले में हमारे नरेंद्र मोदी से आगे न निकल जाएं। वे हमले के वक्त मास्को में पूतिन के मेहमान भी थे और भारत की तरह वे तटस्थ भी रहे हैं। जहां तक झेलेंस्की का सवाल है, उनकी हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी। वे अफगानिस्तान के अशरफ गनी की तरह देश छोड़कर भागे नहीं हैं। न ही वे कहीं जाकर छिप गए हैं। इस वक्त वे जहां रह रहे हैं, उस स्थान का पता उन्होंने खुद ही सार्वजनिक कर दिया है। ऐसे झेलेंस्की से अब बात करने में पूतिन को कोई एतराज क्यों होना चाहिए?

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button