अध्यात्म

6 जून को अमृत सिद्घि योग और रवि योग में रखा जाएगा निर्जला एकादशी का व्रत

गाजियाबाद। 26 एकादाशियों में सर्वश्रेष्ठ मानी जाने वाली निर्जला एकादशी का व्रत छह जून को अमृत सिद्घि योग और रवि योग में रखा जाएगा। ंिहंदू पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि की शुरूआत छह जून को अर्धरात्रि में दो बजकर 15 मिनट पर होगी और तिथि का समापन सात जून को सुबह 4 बजकर 47 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार छह जून को ही निर्जला एकादाश्ी मनाई जाएगी। पारण का समय सात जून को दोपहर एक बजकर 44 मिनट से लेकर शाम 4 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। पूजन का ब्रहम मुहूर्त सुबह 04 बजकर 02 मिनट से 04 बजकर 42 मिनट तक, विजय मुहूर्त, दोपहर 02 बजकर 39 मिनट से 03 बजकर 35 मिनट तक, गोधूलि मुहूर्त, शाम 07 बजकर 16 मिनट से 07 बजकर 36 मिनट तक और निशिता मुहूर्त, रात 12 बजे से 07 जून को रात 12 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। शिव शंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र गाजियाबाद के आचार्य शिवकुमार शर्मा ने कहा प्राचीन ग्रंथों में निर्जला एकादशी का बहुत ही बड़ा महत्व माना गया है। ऐसा कहा गया है कि वर्ष भर की 24 अथवा 26 एकादशियों का जो पुण्य व्रतियों को मिलता है वहीं पुण्य ज्येष्ठ मास की शुल पक्ष की निर्जला एकादशी के व्रत करने से मिलता है। सूर्य जब प्रचंड गर्मी बरसाता है। इस अवसर पर निर्जला एकादशी भी एक तपस्या के समान है। इस व्रत में जल पीना भी वर्जित है।

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