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नवसृजन चैरिटेबल ट्रस्ट ने किया भक्ति योग कार्यक्रम का भव्य एवं सफल आयोजन

गाजियाबाद। कविनगर रामलीला मैदान के जानकी भवन में नव सृजन चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में भक्ति योग कार्यक्रम का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विजय मोहन, डी.के. गोयल, अमरीश त्यागी, गणेश गुप्ता (मॉडर्न ट्रांसफार्मर), अशोक शर्मा, सुरेश कनोडिया, सीए विनय मित्तल एवं एडवोकेट मोहित बंसल ने संयुक्त रूप से किया। दीप प्रज्जवलन एवं प्रभु स्मरण के साथ किया। गुरुजी का स्वागत पुष्पमालाओं और बुके से अनिल अग्रवाल सांवरिया, अतुल जैन, रूपचंद नगर, अभिषेक शर्मा, डॉ. विपिन अग्रवाल, अनंत अग्रवाल एवं सचिन अग्रवाल ने किया। गुरु वर्चस दिनेश कुमार, गुरुमाता श्रीमती विनीता जी एवं उनकी समस्त टीम का स्वागत देवेंद्र हितकारी, सुमन भारती, मीना चोपड़ा, मीता खन्ना, वीणा बोहरा, प्रमिला सिंह, रितु गुप्ता, प्रियंका त्यागी आदि ने फूलों एवं अंगवस्त्र भेंट कर किया। गीता श्लोकों का मधुर गायन श्रीमती रश्मि सिन्हा, मीनाक्षी मिश्रा, चंदा गर्ग, हरप्रीत कौर एवं भारती जी ने किया, जिससे वातावरण भक्तिमय बन गया। गुरुजी ने श्रीमद् भागवत गीता के श्लोकों के माध्यम से जीवन के व्यावहारिक पालन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने संकट प्रबंधन के विषय में कहा कि चंदन का तिलक केवल शोभा नहीं, बल्कि मां लक्ष्मी की कृपा का प्रतीक है। गुरुजी ने बताया कि हर परिस्थिति में मन को स्थिर रखकर समान भाव से कर्म करने वाला व्यक्ति ही सच्ची सफलता प्राप्त करता है। गुरुजी ने स्पष्ट किया कि बलि का अर्थ पशु बलिदान नहीं, बल्कि बुरे संग, बुरे कर्म और बुरी आदतों का त्याग है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखकर समाज की सच्ची सेवा का सामर्थ्य प्राप्त करना चाहिए।
कर्मयोग की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि पहले संकल्प, फिर विचार और उसके बाद कर्म करें। निष्काम कर्म का अर्थ यह नहीं कि लाभ न लिया जाए, बल्कि यह है कि अपने वचनों और दायित्वों को पूर्ण निष्ठा से निभाया जाए। उन्होंने कहा कि सन्यासी वस्त्रों से नहीं, बल्कि अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाने वाला व्यक्ति होता है। उन्होंने कहा कि भगवान भय का नहीं, प्रेम का प्रतीक हैं।
उद्यमिता पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि गीता का सार यही है कि असुरक्षा की भावना को त्यागकर कर्म करते हुए देश में उद्योग स्थापित करें और खुशहाली लाएं। महाभारत का उदाहरण देते हुए गुरुजी ने कहा कि जैसे भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन के सारथी बनकर उन्हें धर्म के मार्ग पर ले गए और अधर्म पर विजय दिलाई, वैसे ही हर व्यक्ति को अपने जीवन में सही दिशा का चयन करना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में आॅनलाइन एवं आॅफलाइन माध्यम से उपस्थित साधकों ने प्रश्न पूछे। वीना जी ने पूछा शरीर अस्वस्थ होने के कारण सेवा नहीं कर पाती, क्या करें? गुरुजी ने उत्तर दिया कि शरीर भगवान का मंदिर है। पहले शरीर को स्वस्थ करें, तभी मन और भाव दोनों सेवा के लिए तत्पर होंगे। एक अन्य प्रश्न पर गुरुजी ने कहा — क्षमता आत्मदर्शन से जाग्रत होती है। अपने दिन का विश्लेषण करें, असफलता से न डरें और प्रयास करते रहें जब तक सफलता न मिले। गुरुजी ने कहा कि पति परमेश्वर हैं और पत्नी जगदंबा है, नारी ही आदि शक्ति है। कार्यक्रम के अंत में गुरुजी ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी और सभी उपस्थित साधकों को आशीर्वाद प्रदान किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, समाजसेवी एवं अनेक प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे। प्रसाद वितरण की व्यवस्था में सचिन अग्रवाल का विशेष योगदान रहा। रिसेप्शन गेट पर स्वागत व्यवस्था में गणेश दत्त जोशी, राकेश गुप्ता, नरेंद्र चौधरी, संजीव अग्रवाल, ऋषभ अग्रवाल, त्रिलोक कुमार, प्रदीप गुप्ता, गजेंद्र शर्मा, एम.के. गिरधर, आर.के. गोयल, सौरव गर्ग, सुनील गर्ग, सुभाष प्रधान, एस.पी. शर्मा आदि सक्रिय रहे। महिला मंडल से श्रीमती नीलम शर्मा, निशि अग्रवाल, नेहा, रितु गुप्ता, रवीना, उषा जी, स्वाती जी, डॉली जी, कोमल शर्मा, वैभव जी, के.के. त्यागी, शशि, रिया, लक्ष्मी, विभूति, गीता, पूनम, उषा सिंह, लता, अंजू, कल्पना, निशा अग्रवाल, सोनिया जैन, नेहा जैन, विनीता सिंह आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा। विशिष्ट अतिथियों में के पी गुप्ता, आदि नारायण गुप्ता, दीपक कांत गुप्ता, राकेश गुप्ता, अजय गर्ग, बसंत अग्रवाल, विनीत शर्मा, विनोद त्यागी, राजेश सिंघल, प्रवेश सिंहवाल, आशीष त्यागी, अरुण त्यागी, वी.के. अग्रवाल एवं नरेश गोयल आदि उपस्थित रहे। नवसृजन चैरिटेबल ट्रस्ट सोनीपत से आए जगदीश, हरिओम उपाध्याय, अजीत शुक्ला, सीमा ओझा ने सभी का धन्यवाद किया। कार्यक्रम का संचालन कविता सूरी ने किया।

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