मुनीर का अमेरिका में स्वागत, ट्रंप के साथ किया भोजन

- भारत की नजर में आतंकी नेता ट्रंप की नजर में हीरो
- ट्रंप ने मुनीर के सम्मान में पढ़े कई कसीदे
- पाक ने सीज फायर के लिए मेरी बात मानी: ट्रंप
कमल सेखरी
पाकिस्तान के जिस सेनाध्यक्ष आसिफ मुनीर को भारत अब तक पाक में पनप रहे विश्व के नामी आतंकियों का मुख्य पोषक और प्रेरक मानकर यह दावा करता रहा है कि समय आने पर ऐसे आतंकी पोषकों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी और उन्हें मिट्टी में मिलाने का काम किया जाएगा। हमारी नजर में उस नंबर एक आतंकी जो पहले आईएसआई का मुखिया था और निरंतर आतंकवादियों को उकसाकर भारत की सीमा में प्रवेश कराकर जगह-जगह हमले कराने का काम करता था। उस आसिफ मुनीर को दुनिया के सबसे बड़े देश अमेरिका के सबसे बलशाली राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कल दोपहर व्हाइट हाउस में अपना विशेष अतिथि बनाकर उसके साथ अलग से भोज किया। डोनाल्ड ट्रंप की ऐसी सोच और कार्रवाई को हम क्या समझें जबकि हम अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप को भारत का सबसे घनिष्ठ मित्र बताने का दम भरते आए हैं। एक तरफ हम अपना प्रतिनिधि मंडल अमेरिका भेजकर आपरेशन सिंदूर में भारत की सेना ने जो शौर्य का काम किया उसे बताने का भरपूर प्रयास कर अभी भारत लौटे हैं कि अमेरिका ने पाकिस्तान को आतंकी गतिविधियों पर रोक लगाने की निगरानी की जिम्मेदारी सौंप दी और इसके लिए भीख का कटोरा लेकर अमेरिका पहुंचे पाकिस्तान को बोरियां भरकर कई हजार करोड़ रुपए की मदद कर दी। अब बीते दिन पाक सेना के चीफ आसिफ मुनीर जो स्वयंभु फील्ड मार्शल बना बैठा है उसे पापा ट्रंप का विशेष अतिथि बनाकर व्हाइट हाउस में ट्रंप के साथ दोपहर का भोजन कराया गया। इस मौके पर डोनाल्ड ट्रंप ने आसिफ मुनीर की शान में कई कसीदे भी पढ़े। ट्रंप ने यह तक कहा कि मेरे कहने पर पाकिस्तान ने सीज फायर के लिए हामी भर दी मैं उनका इसके लिए शुक्रगुजार हूं और वो मेरे अच्छे दोस्तों में से हैं। ऐसा पहली बार हुआ है कि अमेरिका के इतिहास में विश्व के किसी भी देश के सेनाध्यक्ष को व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति के साथ भोजन करने का न्यौता भेजा गया हो। क्योंकि ट्रंप जानते हैं कि पाकिस्तान की सरकार तो महज कठपुतली है और देश की पूरी सत्ता वहां सेना के ही हाथ में है। अब क्योंकि अमेरिका, इजराइल के समर्थन में इरान के खिलाफ युद्ध में उतरना चाहता है इसके लिए उसे इरान के निकटतम देश पाकिस्तान में अपना सैनिक अड्डा बनाने की जगह चाहिए और यह काम सिर्फ पाक के सेनाध्यक्ष आसिफ मुनीर ही कर सकते हैं क्योंकि वहां के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री में ऐसा फैसला लेने की हिम्मत नहीं है। पाकिस्तान जो अपने आपको इस्लामिक देशों का बड़ा नेता मानने लगा है ऐसे में इरान के खिलाफ युद्ध लड़ने के लिए पाकिस्तान में जमीन देने का फैसला वो कर भी कैसे सकता है। इसलिए आसिफ मुनीर जो भले ही अपने आपको इस्लामिक धर्म का एक बड़ा अनुयायी मानता हो लेकिन फिर भी अमेरिका के पास ऐसा फैसला लेने के लिए मुनीर के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। डोनाल्ड ट्रंप के साथ भोजन करने का आकर्षण और असर अगर मुनीर पर इतना पड़ गया कि वो ट्रंप के मुताबिक कोई फैसला लेने की हिम्मत जुटा पाया तो इजराइल और इरान के बीच चल रही महाजंग की शक्ल ही बदल जाएगी और वो विश्व के चुनिंदा तानाशाहों के सिरफिरे फैसलों से प्रभावित तीसरे विश्व युद्ध को प्रेरित कर ही देगा। क्योंकि अमेरिका के पास ऐसी मिसाइलें हैं जो धरती के नीचे कई सौ किलोमीटर की मारक क्षमता रखती हैं और नीचे जाकर विस्फोटक शक्ति भी रखती है। अगर ऐसा हुआ तो अपने आप ही धरती के नीचे पाताल में जो फिश प्लेट्स हैं वो बुरी तरह हिल जाएंगी और दूर तक जलजले की शक्ल में बदल जाएंगी। मुंह दिखाई तो अब रुस ने भी कहना शुरू कर दिया है कि इरान को परमाणु शक्ति अर्जित करने से दूर रहकर विश्व शांति की सोचनी चाहिए जबकि रूस खुद पिछले तीन साल से लगातार यूक्रेन के खिलाफ अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर रहा है और एक सुंदर देश को खत्म करने पर तुला हुआ है। आज की परिस्थिति में लग रहा है कि विश्व की सभी महाशक्तियां दूसरों को रास्ता दिखा रही हैं और खुद विश्व को अपनी ताकत दिखाने की निरंतर कोशिश कर रही है। नेता किसी देश के हों अपने-अपने मुल्कों के अवाम के साथ झूठ ही नहीं बड़े-बड़े झूठ बोल रहे हैं। विनाश काले बुद्धि विपरीत की बन रही येपरिस्थितियां दुनिया को बड़ा नुकसान भी पहुंचा सकती हैं।


