गाजियाबाद

आईटीएस स्कूल आफ मैनेजमेंट ने ट्रैफिक पुलिस के लिए किया मैनेजमेंट डेवलेपमेंट कार्यक्रम का आयोजन

गाजियाबाद। ट्रैफिक पुलिस हेतु मैनेजमेंट डेवलेपमेंट प्रोग्राम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन आईटीएस – द एजुकेशन ग्रुप के वाइस चेयरमैन अर्पित चड्ढा, अतिरिक्त डीसीपी सच्चिदानंद सिंह, आईटीएस स्कूल आफ मैनेजमेंट के निदेशक डॉ. अजय कुमार, आईटीएस गाजियाबाद के निदेशक डॉ. सुनील कुमार पाण्डेय, प्रो. याचना मल्होत्रा एवं प्रो. शिल्पी राणा द्वारा पारंपरिक दीप प्रज्जवलन के साथ संपन्न किया गया। इस सत्र का संचालन प्रो. याचना मल्होत्रा एवं प्रो. शिल्पी राणा द्वारा किया गया, जो न केवल कुशल शिक्षिका हैं, बल्कि प्रेरणादायी मोटिवेशनल स्पीकर भी हैं जो अपने सत्रों में व्यावहारिक अनुभवों को साझा करती हैं। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक संवाद को प्रभावी बनाने एवं पुलिस अधिकारियों की व्यावसायिक दक्षता को सुदृढ़ करना था। कुल 59 ट्रैफिक पुलिस एवं अधिकारी इस प्रशिक्षण में सम्मिलित हुए। आईटीएस स्कूल आॅफ मैनेजमेंट के निदेशक प्रो. (डॉ.) अजय कुमार ने अतिथि सच्चिदानंद सिंह का पुष्पगुच्छ, शॉल और उपहार देकर स्वागत किया। तत्पश्चात उन्होंने स्वागत संबोधन दिया, जो प्रेरणादायक एवं भावनात्मक था। उन्होंने कहा कि ट्रैफिक पुलिस शहर की धड़कन है जो न केवल यातायात को नियंत्रित करती है, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा और सुविधा भी सुनिश्चित करती है। मौसम, समय या परिस्थिति कोई भी हो, ट्रैफिक पुलिस सदैव अपनी ड्यूटी पर तत्पर रहती है। उन्होंने यह भी कहा कि कठिन परिस्थितियों में काम करने के कारण अधिकारियों को मानसिक एवं शारीरिक थकान का सामना करना पड़ता है, ऐसे में प्रभावी संवाद कौशल, सार्वजनिक व्यवहार एवं मनोवैज्ञानिक सशक्तता अत्यंत आवश्यक है।
आई.टी.एस द एजुकेशन ग्रुप के वाइस चेयरमैन अर्पित चड्ढा ने कहा कि ट्रैफिक पुलिस शहर की आॅक्सीजन के समान आवश्यक, निरंतर एवं जीवनदायिनी है। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था की प्रगति का आधार टीमवर्क होता है और ट्रैफिक पुलिस शहर की सुचारु व्यवस्था की रीढ़ है। उन्होंने एडीसीपी सच्चिदानंद सिंह की सराहना करते हुए कहा कि वे सकारात्मक सोच रखते हैं और अपनी टीम की भलाई के प्रति संवेदनशील हैं। उन्होंने ट्रैफिक पुलिस के कठिन कार्य वातावरण को ध्यान में रखते हुए सभी को सत्र को खुला एवं संवादात्मक रखने के लिए प्रेरित किया तथा विश्वास व्यक्त किया कि यह कार्यक्रम प्रतिभागियों के व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक जीवन में अधिक से अधिक सकारात्मक परिवर्तन लाएगा।
उप-पुलिस आयुक्त (ट्रैफिक) सच्चिदानंद सिंह ने कहा कि प्रत्येक ट्रैफिक पुलिस अधिकारी विभाग की कार्यप्रणाली एवं सार्वजनिक सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि गाजिÞयाबाद शहर में 20 स्मार्ट ट्रैफिक बूथ स्थापित करने की योजना पर कार्य किया जा रहा है, जिससे ट्रैफिक प्रबंधन को दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के मानकों के अनुरूप लाया जा सके। उन्होंने आयोजन टीम की सराहना करते हुए डॉ. अजय कुमार से अनुरोध किया कि अगले चरण में कम-से-कम 100 अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया जाए, जिससे निरंतर क्षमता-विकास को बढ़ावा मिल सके। विशिष्ट अतिथि त्रिगुण बिशन, डीसीपी, ट्रैफिक गाजियाबाद ने इस कार्य क्रम की भूरि भूरि प्रशंसा की और सभी प्रतिभागियों को प्रोत्साहित कर उन्हें नए माहौल में व्यावहारिक और आत्मिक विकास के लिए प्रेरित किया। आईटीएस- द एजुकेशन ग्रुप के चेयरमैन डॉ.आर पी चड्ढा ने इस अवसर पर अपनी शुभकामनाएं दी और प्रतिभागियों के उज्जवल भविष्य के लिए शुभ कामनाएं दी। तत्पश्चात सभी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण चाणक्य लॉबी में प्रारंभ किया गया। प्रशिक्षण दो सत्रों में आयोजित किया गया।
पूर्वाह्न सत्र स्वयं नियंत्रण एवं जन-संपर्क तकनीक पर आयोजित किया गया।
इस सत्र में भावनात्मक अनुशासन, सार्वजनिक संवाद की प्रभावशीलता, एवं तनाव प्रबंधन पर चर्चा हुई। अधिकारियों को ड्यूटी के दौरान आने वाले व्यवहारिक तनावों को समझने, शांत रहने, धैर्य एवं मानसिक संतुलन बनाए रखने की तकनीकें सिखाई गईं। साथ ही माइंडफुलनेस अभ्यास, एकाग्रता के व्यायाम, और नागरिकों से सहानुभूति एवं अधिकारपूर्ण संवाद के तरीके भी सिखाए गए। प्रतिभागियों ने इंटरैक्टिव गेम्स, फीडबैक सत्रों एवं चिंतनात्मक गतिविधियों में भाग लिया।
अपराह्न सत्र चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य का रखरखाव विषय पर आयोजित किया गया।
इस सत्र में दृढ़ता निर्माण, शारीरिक फिटनेस, पोषण, और गैर-मौखिक संप्रेषण की भूमिका पर प्रकाश डाला गया। अधिकारियों को लंबे ड्यूटी घंटों में सतर्कता बनाए रखने, मौसम की विपरीत परिस्थितियों में स्वास्थ्य की रक्षा करने, तनाव कम करने हेतु लघु व्यायाम एवं भूमिका-निर्धारण जैसी तकनीकें सिखाई गईं। साथ ही व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक जीवन के संतुलन पर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम का समापन प्रतिबिंब एवं प्रतिक्रिया सत्र से हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए। प्रमाण पत्र वितरित किए गए, सामूहिक फोटो सत्र हुआ और अंत में निदेशक प्रो. (डॉ.) अजय कुमार ने प्रेरणादायक समापन संबोधन दिया।

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