37 दिन हो गए-धनखड़ कहां खो गए !

कमल सेखरी
37 दिन हो गए-धनखड़ कहां खो गए?, विपक्षी दल के लगभग सभी नेताओं ने अब यह सार्वजनिक रूप से कहना शुरू कर दिया है कि इतने दिन हो गए इस्तीफा देने के बाद हमारे उपराष्ट्रपति जाने अचानक कहां खो गए। ऐसा कहा जाता है कि हमारे उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने ठीक 37 दिन पहले अपने राज्यसभा स्थित कार्यालय से उठकर देरशाम राष्टÑपति भवन पहुंचकर अचानक अपना इस्तीफा महामहिम राष्ट्रपति को सौंप दिया। विपक्षी दलों का कहना है कि यह इस्तीफा हस्थलिखित था, कार्यालय के किसी कंप्यूटर से टाइप नहीं हुआ था। इस पर विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह इस्तीफा बहुत ही कम समय में और जल्दबाजी में दिया गया होगा। इस संबंध में विपक्ष के एक नेता ने राष्ट्रपति भवन में जन सूचना के अधिकार के तहत यह जानना चाहा कि श्री धनखड़ का इस्तीफा कब और किस समय हुआ । राष्ट्रपति भवन से यह जवाब मिला कि हमको इसकी जानकारी नहीं है। जबकि शायद उपयुक्त उत्तर यह मिलना चाहिए था कि यह सूचना सार्वजनिक नहीं की जा सकती है। यदि ऐसा उत्तर दिया होता तो कुछ अटकलों पर विराम लग जाता। यह मामला भी विपक्षी नेताओं के बीच चर्चा का एक विषय बना हुआ है। अब धनखड़ जी इन 37 दिनों के दौरान निरंतर अस्वस्थ चल रहे हैं या उनके स्वास्थ्य में कोई सुधार हुआ, उनके स्वास्थ्य को लेकर कोई हेल्थ बुलेटिन अब तक जारी क्यों नहीं किया गया है जबकि उपराष्ट्रपति जैसे ऊंचे स्तर के पद पर आसीन रहे व्यक्ति के अचानक ऐसे अस्वस्थ हो जाने पर यह प्रोटोकोल है कि समय समय पर उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी सार्वजनिक की जाती है। अभी यह भी नहीं मालूम की श्री धनखड़ दिल्ली स्थित अपने सरकारी निवास पर रह रहे हैं या फिर अपने मूल निवास राजस्थान चले गए हैं। इन 37 दिनों के दौरान कोई एक मीडियाकर्मी भी उनसे मिल नहीं पाया है ना ही उनके ट्वीटर हैंडल पर कोई संदेश ही सार्वजनिक हुआ है। हालांकि प्रारंभ में उनके ट्वीटर हैंडल पर यह संदेश आया था कि वो स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दे रहे हैं। इस संदेश के साथ उपराष्ट्रपति के लैटरपेड पर टाइप किया हुआ इस्तीफा भी संलग्न किया गया था। तब से लेकर अब तक उनके मोबाइल पर उनसे किसी की भी बात नहीं हो पा रही है। इन 37 दिनों के दौरान विपक्षी दल के लिए तो शायद मुमकिन नहीं था लेकिन सत्ता दल से जुड़ा कोई छोटा-बड़ा नेता भी उनका हाल पूछने उनके पास नहीं गया। अब ऐसे में विपक्षी दल के नेता कई तरह के आरोप लगा रहे हैं कि श्री धनखड़ से जबरन इस्तीफा लिया गया है और उनके बिना ही राष्ट्रपति भवन पहुंचाया गया है। इतना ही नहीं विपक्षी दल के नेता राहुल गांधी ने तो यह सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया है कि श्री धनखड़ को भाजपा ने ‘हाउस अरेस्ट’ करके रखा है। ना किसी को उनसे मिलने दिया जा रहा है और ना ही उनका मोबाइल उनके पास है। विपक्षी दलों के नेता जो निरंतर आरोप लगा रहे हैं उसके जवाब में देश के ग़ृहमंत्री अमित शाह ने बीते दिन एक बयान देकर यह स्पष्ट किया है कि निवर्तमान उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य के कारणों से इस्तीफा दिया है, इसके साथ ही उन्होंने श्री धनखड़ के कार्य अवधि की प्रशंसा भी की। कांग्रेस के नेता जयराम रमेश ने गृहमंत्री के इस बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि रहस्य और गहरा गया है। कुछ विपक्षी नेताओं का यह भी कहना है कि जब तक श्री धनखड़ सामने नहीं आते तब तक उपराष्ट्रपति पद के चुनाव का क्या औचित्य है क्योंकि नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति कार्यभार तो श्री धनखड़ से ही लेंगे। ऐसे मामले में विपक्ष को अलग-अलग चुनावी मंचों से बयान देने की जगह कुछ ऐसा करना चाहिए कि कई विपक्षी नेता मिलकर श्री धनखड़ के निवास पर जाएं और उनसे मिलकर उनके स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्राप्त करें। क्योंकि श्री धनखड़ अपने उपचार के लिए अभी तक किसी अस्पताल में तो दाखिल नहीं हुए हैं। सरकार को भी इन सभी अटकलों पर विराम लगाने के लिए प्रतिदिन श्री धनखड़ के स्वास्थ्य पर एक बुलेटिन जारी कर लोगों को इस संबंध में अवगत कराना चाहिए।

