पूरी दुनिया में गिरी भारत की साख !

कमल सेखरी
पिछले एक दशक से हम परिवर्तित भारत के बड़े-बड़े दावे करते हुए यह कहते नहीं थक पा रहे कि आज हमारा देश दुनिया के चुनिंदा ऊपरी देशों के साथ आकर खड़ा हो गया है। हमारे देश का मान-सम्मान और ख्याति पूरे विश्व में मजबूती के साथ आंकी जा रही है। लेकिन हमारे उसी देश में पिछले 5-6 दिनों से जो लाखों हवाई यात्रियों के साथ गुजर रहा है उस पर दुनिया के सभी देशों के प्रमुख समाचार पत्रों में प्रथम पृष्टों पर प्रमुखता से छप रहा है और अधिकांश बड़े देशों के टीवी चैनल भी बड़ी प्रमुखता से उस दुर्दशा को दिखा रहे हैं जो भारत के लगभग सभी राज्यों के प्रमुख हवाई अड्डों पर इंडिगो एयरलाइंस की अवैधता और अनियमितता की वजह से कई लाख हवाई यात्री हृदय विदारक पीड़ा झेल रहे हैं। इसी माहौल के बीच यात्रियों के साथ जो आपाधापी और लूटपाट मच रही है उसे लेकर बीते दिन एनडीए के प्रमुख दल जेडीयू के बड़े नेता पूर्व सांसद केसी त्यागी ने एक राष्टÑीय चैनल पर सार्वजनिक रूप से एक बयान जारी कर अपनी पीड़ा जताते हुए यह धमकी भी दे दी कि अगर उनके साथ न्याय नहीं हुआ तो वो भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे। श्री त्यागी का कहना था कि इंडिगो एयरलाइंस की वजह से जो हवाई यात्रियों के साथ असहनीय वातावरण में पीड़ादायक और दर्दनाक घटनाएं घटित हो रही हैं उसे लेकर वो पीड़ित हैं और इस बीच अन्य हवाई सेवा जो लूटपाट मचा रही हैं उससे उनका परिवार भी प्रभावित हुआ है। श्री त्यागी ने बताया कि दिल्ली से मुंबई जो हवाई टिकट सरकारी निर्देशानुसार अधिकतम 15 हजार रुपए में मिलनी चाहिए उस यात्रा पर उनकी अपनी बेटी 15 हजार रुपए की जगह 42 हजार रुपए की टिकट लेकर मुंबई गई हैं। श्री त्यागी लूटी गई रकम के इस अंतर को अविलंब वापस चाहते हैं वरना वो एयर इंडिया के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे। ऐसा किसी एक के साथ नहीं दस लाख से अधिक भारत में घरेलू हवाई यात्रा करने वाले दस लाख से अधिक यात्रियों के साथ हुआ है जिनमें लगभग 20 हजार विदेशी पर्यटक भी हैं। इस पूरे मामले में क्या कुछ और किस सीमा तक जाकर यात्रियों के साथ हुआ यह देश का मीडिया पिछले 5 दिनों से बड़ी प्रमुखता से दिखा रहा है। लेकिन अभी तक इंडिगो और एयर इंडिया कंपनी के संचालकों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी है, इसका मुख्य कारण चुनिंदा धनाड्य कंपनियों के हाथों में भारत की हवाई यात्रा का एकाधिकार दिया जाना है। भारत में इंडिगो के पास हवाई यात्रियों के 65 फीसदी तक का यात्रा शेयर है जबकि एयर इंडिया के पास यह हिस्सा 32 प्रतिशत तक का है। ऐसा अन्य मुल्कों में बिल्कुल नहीं है। अमेरिका में 19 निजी क्षेत्र की हवाई कंपनियां इस व्यवसाये में लगी हैं जबकि यूरोप के प्रमुख देशों में सौ से अधिक निजी क्षेत्र की कंपनियां यह काम कर रही हैं। पूरी दुनिया के किसी भी देश में निजी क्षेत्र की किसी एक कंपनी के पास 25 फीसदी से अधिक यात्रियों के उड़ान की अनुमति कोई सरकार नहीं दे रही है। इंडिगो एयरलाइंस जिसे लेकर भारत में ऐसी दुर्दशा पैदा हुई है उस कंपनी ने 2014 में यह व्यवसाये शुरू किया था तब उस समय इंडिगो कंपनी की कुल पूंजी 22 हजार करोड़ थी। लेकिन पिछले दस वर्षों में उसकी पूंजी का यह आकार दस गुणा से अधिक बढ़ गया और आज इंडिगो कंपनी की वर्तमान पूंजी 2 लाख 27 हजार करोड़ की है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस कंपनी ने मरैजूदा सरकार को भारी रकम चंदे के नाम पर देकर इस व्यवसाये में एकाधिकार बना लिया है। अब यह मामला कब और कैसे निपटेगा यह तो समय ही बताएगा क्योंकि कुछ ऐसी सियासी तस्वीरें भी सामने आ रही हैं कि यह सब सियासी सांठगांठ के साथ हो रहा है और संभावना यह भी है कि जल्द ही इंडिगो का विकल्प ढूंढ लिया जाए और ऐसे ही एकाधिकार के साथ यह व्यवसाये किसी और बड़ी कंपनी को करने की इजाजत दे दी जाए। अभी फिलहाल संसद के सदनों में वंदेमातरम गीत और चुनाव सुधार प्रक्रिया पर लंबी बहस होनी है उसके बाद यह मामला संसद में पुरजोरता से गूंज सकता है।

