भारत ने तोड़ा ट्रंप का सपना

- ट्रंप के पक्ष में पाक की संस्तुति भी काम नहीं आ रही
- टूट रहा है ट्रंप के विश्व शांति पुरस्कार पाने का सपना
- इरान लंबी जंग लड़ने के मूड में
कमल सेखरी
बीते दिन पाकिस्तान की सरकार ने डोनाल्ड ट्रंप को विश्व शांति पुरस्कार देने की संस्तुति की है। उनका कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप की पैरवी पर भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे छदम युद्ध को ट्रंप के रोकने का प्रयास सफल हुआ है। लिहाजा उन्हें विश्व शांति पुरस्कार से नवाजा जाना चाहिए। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप अपने पिछले कार्यकाल में भी विश्व शांति पुरस्कार पाने की इच्छा रखते हुए पुरजोर प्रयास लगाते रहे लेकिन उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हुई क्योंकि अमेरिका के पूर्व राष्टÑपति बराक ओबामा को अपने पहले कार्यकाल के पहले नौ महीने में ही विश्व के इस सर्वश्रेष्ठ सम्मानजनक पुरस्कार से नवाजा जा चुका है इसलिए ट्रंप में भी यह इच्छा बड़ी प्रबलता से जागी हुई थी कि वो किसी तरह विश्व शांति पुरस्कार प्राप्त कर ले। अपने इसी प्रयास में उन्होंने रूस और यूक्रेन के बीच तीन साल से चल रहे युद्ध को भी रुकवाने की जोरदार वकालत की लेकिन काफी कोशिश करने पर भी ट्रंप सफल नहीं हो पाए। अब पाकिस्तान की संस्तुति पर यह पुरस्कार उन्हें मिल पाएगा इसका विश्वास स्वयं डोनाल्ड ट्रंप को भी नहीं है। क्योंकि भारत-पाक युद्ध में जो सीज फायर हुआ और ट्रंप ने उसका क्रेडिट लेने की पुरजोर कोशिश की उसके लिए पाकिस्तान तो ट्रंप के मुताबिक राजी हो गया लेकिन भारत ने मामले को हां और ना के बीच में लटका कर इसका पूरा क्रेडिट ट्रंप को नहीं लेने दिया। जबकि ट्रंप ने अपनी मध्यस्थता की यह वकालत अपने पक्ष में एक बार नहीं सौलह बार लगातार बयान देकर निरंतर की लेकिन दोनों पक्षों की सहमति एक सी ना मिलने पर ट्रंप का यह प्रयास विफल हो गया। अब ट्रंप ने इरान को कई बार धमकाते हुए और खुद युद्ध में कूदने की धमकी भी देते हुए इरान-इजराइल युद्ध को रुकवाने की लगातार कोशिशें तो की लेकिन दोनों देश इसके लिए राजी नहीं हुए, अब ट्रंप ने अपने आपको दो सप्ताह के लिए इस लड़ाई से अलग रखने की नीयत से यह बयान तो दे दिया कि वो कोई भी फैसला अब दो हफ्ते बाद ही करेंगे। लेकिन उन्हें लग रहा है कि इरान-इजराइल जिस तरह से जिद में अड़कर आपस में जंग लड़ रहे हैं वो दो सप्ताह में भी कहीं खत्म होती नजर नहीं आ रही है। इसलिए ट्रंप ने कहना शुरू कर दिया है कि भले ही पाकिस्तान मेरे पक्ष में विश्व शांति पुरस्कार दिये जाने की हिमायत कर रहा है लेकिन यह पुरस्कार मुझे मिलने वाला नहीं है क्योंकि उनके खाते में वर्तमान में चल रही छह मुल्कों के बीच तीन महाजंग अभी किसी अंजाम पर ट्रंप के मुताबिक पहुंचती नजर नहीं आ रही है। इरान जैसी घोषणा कर चुका है वैसी करनी भी करने लगा है। अब वो इजराइल को ना तो जंग के बीच में से निकलने का मौका दे रहा है और ना खुद युद्ध विराम करने पर विचार कर रहा है। क्योंकि इरान जानता है कि वो इजराइल से क्षेत्रफल और आबादी में सत्त्तर गुणा अधिक बड़ा है और उसके पास धन की भी कमी नहीं है लिहाजा वो इजराइल से कहीं अधिक लंबे समय तक युद्ध लड़ने की क्षमता रखता है। इरान के नागरिकों का स्वभाव है कि वो किसी भी आपात स्थिति में घरों में छिपकर बैठने के आदी हैं जबकि इजराइल के लोग घरों में बैठने के आदी ही नहीं हैं। उन्हें रोज खाने-पीने के लिए घर से बाहर निकलने की आदत है और हर रोज खासतौर पर सप्ताह के अंत में समुद्री बीच पर बैठकर पिकनिक मनाने का शौक है। लिहाजा वो अधिक दिनों तक अपने देश के छोटे क्षेत्रफल में इतनी बड़ी जंग को खामोश रहकर नहीं झेल सकते लिहाजा इजराइल में लोगों ने सड़कों पर उतरकर अपनी सरकार के खिलाफ मुहिम चलाकर जंग तुरंत रोकने की अपीलें करनी शुरू कर दी हैैं। इरान-इजराइल की जंग अभी नौ दिन तक ही चली है कि इजराइल के लोगों ने शोर मचाना शुरू कर दिया है। अगर यह जंग रूस-यूक्रेन की तरह इतने लंबे समय तक चल गई तो इजराइली नागरिक खुद ही सड़कों पर उतर कर अपनी सरकार का तख्ता पलटने की कोशिशों में लग जाएंगे। इरान, इजराइल में ऐसी ही परिस्थितियां बनने का इंतजार कर रहा है और जंग को लंबे समय तक जारी रखने की कोशिश कर रहा है।



