सरकार मेहरबान तो अधिकारी पहलवान !

कमल सेखरी
हम एक लंबे समय से एक मुहावरा कहते और सुनते चले आ रहे हैं जिसका वर्तमान सियासी माहौल में मायने भी बदल गए और शब्द भी बदल गए। अब ये मुहावरा एक नया रूप लेकर यह कहा जाने लगा कि सरकार मेहरबान तो अधिकारी पहलवान। ऐसा कुछ हमने अभी हाल ही में संभल में पिछले दिनों हुए जामा मस्जिद के विवाद में होता देखा है। जिस विवाद ने सांप्रदायिक रूप लिया और वहां भड़के दंगों में पांच लोग मारे भी गए। उस समय वहां तैनात पुलिस के क्षेत्राधिकारी अनुज चौधरी की भूमिका को लेकर कई प्रश्न उठे और उन पर वहां का माहौल बिगाड़ने के आरोप भी लगे। उस समय ही एक पक्ष ने अनुज चौधरी के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए वहां की सीजेएम अदालत में एक याचिका डाली और चार महीने बाद वहां तैनाती पर आए नए सीजेएम महोदय ने दस दिन पहले संभल के पुलिस-प्रशासन को निर्देश देकर क्षेत्राधिकारी अनुज चौधरी के खिलाफ धारा 156/3 में मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए। इन अदालती आदेशों को एक सिरे से नकारते हुए वहां के पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया कि वो क्षेत्राधिकारी के खिलाफ कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं करेंगे और सीजेएम के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। दस दिन बीत जाने पर भी संभल के पुलिस-प्रशासन ने ना तो अपने अधिकारी के खिलाफ कोई रिपोर्ट दर्ज की है और ना ही अभी तक हाईकोर्ट में याचिका डाली है। लेकिन संबंधित सीजेएम विभुषण सुधीर का बीस जनवरी को तबादला कर दिया और उन्हें दो पद नीचे की नियुक्ति देते हुए सुल्तानपुर जिला अदालत में भेज दिया। इस मामले में एक और बड़ा खेल ये हुआ कि वो जज महोदय जिन्होंने चार माह पहले संभल की जामा मस्जिद का यह विवादित फैसला दिया था और वहां अधिक हंगामा मचने के कारण माननीय हाईकोर्ट ने उनका तबादला कर दिया था। अब वही पुराने जज साहब आदित्य सिंह फिर लौटकर उसी सीजेएम पद पर संभल भेज दिए गए हैं जहां पर उनके फैसले को लेकर एक बड़ा सांप्रदायिक माहौल बन गया था और जिसमें 5 लोग मारे भी गए थे। जो सीजेएम महोदय विभुषण सुधीर जिन्होंने पुलिस क्षेत्राधिकारी के खिलाफ आदेश दिए और जिसके अमल में आने से पहले ही उनका तबादला कर दिया गया उन जज साहब विभुषण सुधीर की विगत तेरह साल की सर्विस में सौलह बार तबादले किए जा चुके हैं। उनके साथ ऐसा इसलिए होता रहा कि उन्होंने कभी भी सरकारी दबाव में आकर किसी सरकार के पक्ष में अपना फैसला नहीं दिया। संभल में नाटकीय ढंग से हुए इन दो जजों के तबादलों को लेकर विपक्षी दल सपा तो मुखर हो ही रहा है साथ ही संभल के वकीलों ने सीजेएम विभुषण सुधीर के तबादले को लेकर अपना रोष प्रकट करते हुए अदालत परिसर में आंदोलन भी किया है। सरकार मेहरबान तो अधिकारी पहलवान इस नए सियासी मुहावरे के और भी कई मामले पिछले कुछ दिनों में उत्तर प्रदेश और अन्य राज्य के कई जिलों में देखे गए हैं जहां सत्ता पक्ष से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी अपने अधिकारों का दुरुपयोग करके सरकार की छवि खराब करने में लगे हुए हैं। हाल ही में दिल्ली से जुड़े उत्तर प्रदेश के महानगर नोएडा में 27 वर्ष के युवराज की हुई मौत जिसे आम नागरिक और मीडिया शासन-प्रशासन की व्यवस्था की लापरवाही मान रहे हैं इस मामले में भी छोटे अफसरों पर तो गाज गिर गई लेकिन लापरवाही के जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारी अभी तक पकड़ से बाहर हैं। क्योंकि इन सभी पर सरकार मेहरबान है इसलिए निरंकुश अधिकारी पहलवान है।



