
कमल सेखरी
सरकार अब और क्या करे कि देश के खफा मुसलमान किसी तरह राजी हो जाएं और अपनी खुशहाली का इजहार करें। विपक्ष सरकार पर तुष्टिकरण के आरोप लगाता रहा लेकिन सरकार जैसा कहती आ रही थी कि सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास। अब ईद पर ऐसा ही कुछ करती नजर सी आ रही है। मोदी की सौगात के नाम से 32 लाख मुसलमानों को ईदी बांटी जा रही है। ईदी के इस पैकेट में ईद की सेवाइयां हैं, ड्राइफ्रूट्स हैं, खादय तेल का एक पैकेट है और भी कुछ छोटे-छोटे उपहार हैं। अब इतना करने पर भी मुसलमान विरोध करने से बाज नहीं आ रहे हैं। बड़ी मुश्किल से गिनती की दो चार रोजा इफ्तारियों का न्यौता आया और उसमें भी मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ-साथ आठ अन्य मुस्लिम संगठनों ने उन न्यौतों का बहिष्कार किया जिनके संबंध केन्द्र की भाजपा सरकार से जुड़ रहे थे। बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश बाबू और चिराग पासवान की रोजा इफ्तारी से इन मुस्लिम संगठनों ने दूरी बनाकर रखी। पूछे जाने पर इन संगठनों के नेताओं ने मीडिया से कहा कि हमें रोजा इफ्तारी नहीं चाहिए हमें मान-सम्मान और इज्जत प्यारी है,हमें देश का अच्छा नागरिक मानकर समान अधिकार दिया जाना चाहिए। ये सभी संगठन केन्द सरकार द्वारा मुस्लिम वक्फ बोर्ड के नियमों में संशोधन करने के लिए लाए जा रहे बिल का विरोध कर रहे थे और पिछले कई दिनों से बिहार सहित अन्य राज्यों में भी सड़कों पर उतरकर अपना यह विरोध जता भी रहे थे। इन मुस्लिम नेताओं का कहना था कि एक तरफ तो सरकार हमें खुश करने के लिए सौगात की ईदी दे रही है और हमारे सम्मान में रोजा इफ्तारी भी करा रही है वहीं हमारे त्योहारों पर कई तरह की पाबंदियां भी लगा रही है। दुर्गा नवरात्रों के नाम से ईद से दो दिन पहले मीट की दुकानों को बंद करने का जो दबाव भाजपा नेता मीट व्यापारियों पर डाल रहे हैं वो एक तरफ तो हमारे मीट व्यापारियों के व्यवसाय पर आर्थिक चोट है और दूसरा ईद से पहले ऐसी पाबंदी लगाना हम लोगों के त्योहार में एक खलल डालने का काम भी है। इसी के साथ-साथ ईद की नमाज को मस्जिद और ईदगाह की चार दीवारी से बाहर नमाजियों की अधिक संख्या होने पर भी सड़क पर बैठकर नमाज अदा करने पर रोक लगाना भी हमारी उस आजादी का हनन है जो हमें पिछले कई दशकों से मिलती आई है। ऐसे में अपने घर की छत पर नमाज पढ़ने पर रोक लगाना और मस्जिद से बाहर नमाज पढ़ने को अपराध की श्रेणी में डालना और नमाजियों के ड्राइविंग लाइसेंस व पासपोर्ट आदि को भी रदद करने की धमकी देना हमारी भावनाओं पर गहरी चोट पहुंचाता है। ऐसे में ईदी के पैकेट लेकर हम क्या करेंगे जबकि इस उपहार की आड़ में हमारी धार्मिक भावनाओं का हनन हो रहा हो। मुस्लिम वक्फ बोर्ड को बदलने का जो काला कानून केन्द्र सरकार लाने की कोशिश कर रही है उसके इस प्रयास में भाजपा के जो भी सहयागी दल उसका समर्थन करेंगे मुस्लिम समाज अगले सभी चुनावों में ऐसे सहयोगी दलों को अपना वोट नहीं देगा। ऐसे में थोड़ा देकर अधिक छीनने का जो प्रयास किया जा रहा है वो मुस्लिम नेताओं के मुकाबले उन्हें कबूल नहीं है। यहां हम यह भी बता दें कि कि सरकार ईद पर ईदी के नाम से कुछ दे तो रही है जबकि दुर्गा नवरात्रों में वो उपहार में हिन्दुओं को कुछ भी नहीं दे रही। कुछ हिन्दू नेताओं को मलाल है कि उन्हें भी उनकी सरकार सरकारी तौर पर नवरात्रों का कोई उपहार दे जिसमें कुट्टू और सिंघाड़े का आटा, चौलाई के लड्डू, व्रत के चावल, व्रत के नमक से बने नमकीन और एक लाल चुनरी पैकेट में डालकर देश के उन सभी सनातनियों को दे जो नवरात्रों पर उपवास रखते हैं। ऐसा करने पर ही सबका साथ-सबका विश्वास कायम रह पाएगा।