चर्चा-ए-आम

खेल-कला जगत में भी कूदे हिन्दू संगठन !

कमल सेखरी

हम तो दुआएं मांग रहे हैं कि बीमारी दूर हो और बीमार स्वस्थ हो जाएं। नया साल 2026 उस मानसिक बीमारी का शिकार ना हो जिसके चलते हमने 2025 में और उससे भी पहले के कुछ सालों में जिस बीमारी का दंश धार्मिक उन्माद के रूप में बर्दाश्त किया है। लेकिन लग रहा है कि दुआएं छोटी पड़ रही हैं और मानसिक बीमारी जो एक वायरस बनकर विकराल रूप धारण कर चुका है वो अब विकरालता की चरमता को छूने जा रहा है। क्योंकि ये वायरस कोई आम संक्रामक रोग नहीं है ये हमारे सियासी नेताओं की वो देन है जो सत्ता में बने रहने के अपने स्वार्थों को साधने के लिए पुरजोरता से फैला रहे हैं। हिन्दू-मुस्लिम का फैलाया जा रहा यह सियासी वायरस अब देश के कला और खेल जगत में भी अपना घर बनाना शुरू कर रहा है। आईपीएल की वो क्रिकेट लीग जिसने क्रिकेट खेल में भारत की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से लाकर खड़ी कर दी है उस आईपीएल लीग में जो क्रिकेट खिलाड़ियों का चयन हुआ है उसमें भी हिन्दू संगठनों और देश के संत समाज ने अपनी दखल दर्ज कर दी है। बांग्लादेश के क्रिकेट खिलाड़ी मुस्तफिजुर रहमान को पिछले दिनों लगी खिलाड़ियों की बोली में कोलकाता नाइट राइडर्स ने 9.2 करोड़ में खरीदा। इस क्रिकेट लीग में भारत सहित कई देशों के खिलाड़ियों को देश के अलग-अलग क्लब उनके खेल के आधार पर बोली लगाकर खरीदते हैं और यह क्रिकेट लीग विश्व में सबसे लोकप्रिय बन चुकी है और इससे भारत का नाम पूरे विश्व के क्रिकेट खेल जगत में एक अलग पहचान बना चुका है। बांग्लादेश के इस खिलाड़ी को क्यों खरीदा गया जबकि बांग्लादेश में हिन्दुओं पर इन दिनों कई अत्याचार हो रहे हैं, इसी को आधार बनाते हुए कुछ हिन्दू संगठनों और देश के संत समाज के कुछ स्वयंभु नेताओं ने विरोध करना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि हम बांग्लादेश के खिलाड़ी मुस्तफिजुर रहमान को भारत की धरती पर खेलने नहीं देंगे और उसे बैरंग वापस लौटा देंगे। जबकि पिछले दिनों हमारी भारतीय क्रिकेट टीम ने पाकिस्तान की क्रिकेट टीम के साथ कई मैच खेले हैं और महिला विश्वकप में भी हमारा सामना पाकिस्तान की महिला क्रिकेट टीम से हुआ है और अभी हाल में खेले गए विश्व अंडर-19 क्रिकेट प्रतियोगिता के फाइनल मैच में भारत और पाकिस्तान आमने-सामने रहे हैं। भारत की क्रिकेट टीम और पाकिस्तान की क्रिकेट टीम के बीच तो मैत्रीपूर्ण श्रंखला भी खेली गई है तब किसी ने ऐतराज नहीं किया। क्या इसका कारण यह रहा कि क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष गृहमंत्री अमित शाह के सुपुत्र जय शाह हैं और पाकिस्तान के साथ हमारे सभी मैच उन्हीं की देखरेख में खेले गए हैं। अब अगर हमें बांग्लादेश से इतनी ही नफरत और परहेज है तो हमने बांग्लादेश में हुए तख्ता पलट के समय देश छोड़कर बाहर निकलीं शेख हसीना को भारत में सियासी पनाह क्यों दे रखी है जबकि बांग्लादेश में जो लोग हिंसा फैला रहे हैं वो भारत से शेख हसीना की वापसी की मांग भी कर रहे हैं। अब अगर चारों ओर दिमाग दौड़ाया जाए तो यह निकलकर भी सामने आता है कि आईपीएल लीग में जिस केकेआर क्लब ने बांग्लादेश के खिलाड़ी मुस्तफिजुर रहमान को खरीदा है उसका मालिक भारत का प्रसिद्ध अभिनेता शाहरुख खान है। क्योंकि जो लोग बांग्लादेश के खिलाड़ी को वापस भेजने की बात कर रहे हैं वही लोग फिल्म अभिनेता शाहरुख खान को भी खुली जुबान से धमकी दे रहे हैं और उन्हें देश का गददार बता रहे हैं और यह कहते हुए धमका रहे हैं कि अगर हमने उसे हीरो बनाया है तो हम उसे जीरो भी बना देंगे। अब प्रश्न ये उठते हैं कि अगर हमें इस्लामिक मुल्क बांग्लादेश और पाकिस्तान से इतना ही परहेज है तो हम उनके साथ अन्य आयोजनों में क्रिकेट के मैच खेल ही क्यों रहे हैं। अगर हम बांग्लादेश से नाराज हैं तो मजबूरी में निकलकर आई उनकी पूर्व राष्टÑपति शेख हसीना को हमने सियासी पनाह दे ही क्यों रखी है जबकि शेख हसीना बांग्लादेश में हो रही मौजूदा हिंसा की एक मुख्य कड़ी हैं जिसमें हिन्दुओं पर अत्याचार हो रहा है। क्या हम यह विरोध इसलिए कर रहे हैं कि बांग्लादेश के खिलाड़ी को खिलाने वाला एक मुसलमान है। अगर इस खिलाड़ी को नीता अंबानी, प्रीति जिंटा या शिल्पा शेट्टी जैसे लोग अपने क्लबों के लिए खरीद लेते तब भी क्या इतना ही शोर मचता। शायद ऐसा नहीं होता। हमें देश को धार्मिक उन्माद की आग जो सुलगनी आरंभ हुई है उसे लपटों में घिरने से पहले बचाना होगा। घर-घर जाकर तलवारें बांटने वाले, चर्च और ईसाई स्कूलों में तोड़फोड़ करने वाले, लव जिहाद के नाम पर युवाओं को सार्वजनिक स्थल पर मारने-पीटने जैसी सोच रखने वाले लोगों से देश के खेल जगत और देश के कला जगत को बचाना होगा।

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