गाजियाबाद

हिंदी भवन समिति ने हिंदी के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को किया सम्मानित

  • सिर्फ एक दिवस नहीं, सब दिन हिंदी के हों’
  • कवि सम्मेलन में देश के नामचीन कवियों ने काव्य पाठ कर मंत्रमुग्ध किया
    गाजियाबाद। हिंदी भवन समिति की तरफ से आयोजित हिंदी दिवस समारोह में हिंदी में अच्छे अंक लाने वाले 60 विद्यार्थियों और 7 शिक्षकों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन में जहां विख्यात रचनाकारों में श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया, वही कवियों एवं वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि हिंदी के लिए सिर्फ एक दिवस नहीं बल्कि सभी दिन होने चाहिए।
    मुख्य वक्ता प्रख्यात साहित्यकार एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉक्टर विनय विश्वास ने कहा कि हिंदी के उत्थान के लिए औपचारिकता नहीं, अब दिल से कार्य करने की आवश्यकता है। मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री बालेश्वर त्यागी ने कहा कि हिंदी को लेकर किसी भी स्तर पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। कुछ राजनीतिज्ञ राजनीतिक लाभ के लिए हिंदी का विरोध करते हैं जो कि सरासर गलत है। विशेष अतिथि विख्यात हास्य कवि डॉ. सर्वेश स्थान ने कहा कि हिंदी के लिए कार्य करने वाले शिक्षक और अच्छे अंक लाने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाना सराहनीय कार्य है। हिंदी भवन समिति के अध्यक्ष ललित जायसवाल, महामंत्री सुभाष गर्ग और अतिथियां ने हिंदी में अच्छे अंक लाने वाले 60 से अधिक विद्यार्थियों और हिंदी के सात शिक्षक शिक्षिकाओं को प्रमाण पत्र, स्मृति चिन्ह एवं नकद धनराशि देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन का श्रोताओं ने खूब आनंद लिया।
    डॉ. प्रवीण शुक्ल की इन पत्तियों पर खूब तालियां बजी- खरे करता है सारे काम, कुछ खोटा नहीं करता
    अहम का अपने चारों ओर, परकोटा नहीं करता, बड़ा है आदमी सच में वही किरदार से अपने जो अपने सामने वाले का कद छोटा नहीं करता।
    डॉ. सर्वेश अस्थाना ने परिवार का महत्व इन शब्दों में व्यक्त किया-
    रिश्तों में तकरार बहुत है
    लेकिन इनमें प्यार बहुत है
    सारी दुनिया खुश रखने को
    बस अपना परिवार बहुत है
    राज कौशिक को इस शायरी पर खूब दाद मिली-
    जरूरी ये नहीं जो है, सब अपना ही वो हो जाए
    करो कोशिश जो अपने पास है बस वो न खो जाए
    गरीबी में ये आशा है कि अच्छा वक़्त आएगा
    अमीरी खौफ लाती है बुरा कुछ अब न हो जाए
    आगरा से आईं डॉ रुचि चतुवेर्दी को इन पंक्तियों पर बहुत प्रशंसा मिली-
    हर निराशा किनारे धरो।
    और विश्वास खुद में भरो।
    चाहे संघर्ष हो भूमि सा,
    हौसला आसमां सा करो।
    कामां, राजस्थान से पधारे डॉ भगवान मकरन्द द्वारा हिंदी के सम्मान में पढ़ी गई ये पंक्तियां बहुत पसंद की गईं-
    जिसको हिन्दी से नहीं प्यार, वो कैसा हिन्दुस्तानी है?
    हिन्दी भारत की है शान, यही जन-जन कल्याणी है ।।
    कवयित्री अंजू जैन का एक गीत बहुत सारा गया-
    तुम कहो तो भेज दूं मैं हिचकियां भी डाक से
    साथ में कुछ बचपने की कश्तियां भी डाक से
    हिंदी दिवस समारोह का संचालन कार्यक्रम संयोजक राज कौशिक ने और कवि सम्मेलन का संचालन डॉ प्रवीण शुक्ल ने किया। कार्यक्रम में बतौर अतिथि पृथ्वी सिंह कसाना, हिमांशु लव, अतुल जैन, विष्णु सक्सेना व अन्य कवि प्रेमी उपस्थित रहे ।

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