क्या नीतीश कुमार मानसिक संतुलन खो चुके हैं?
Has Nitish Kumar lost his mental balance?

कमल सेखरी
बिहार में एक लंबे समय से आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव और उनके दल के और भी कई नेता निरंतर यह आरोप लगाते चले आ रहे हैं कि राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का स्वास्थ्य ठीक नहीं है वो लाचारी की अवस्था में काम कर रहे हैं और अधिकांश समय अचेत मुद्रा में रहते हैं। उन पर यह आरोप भी लगते रहे हैं कि वो शारीरिक क्षमता भी खो चुके हैं और उनका मानसिक संतुलन भी अब सामान्य नहीं रहा है। इन्हीं आरोपों के बीच बीते दिन बिहार में आयोजित एक खेल प्रतियोगिता में मुख्य अतिथि के तौर पर वहां गए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा लगाए जा रहे आरोपों में दम है यह लगभग प्रमाणित कर दिया। खेल प्रतियोगिता के लिए आयोजित सभा में मंच पर उपस्थित होने के बाद अचानक मुख्यमंत्री का मन बदला और उन्होंने अपने संग सहयोगियों से कहा कि कार्यक्रम बाद में आरंभ करेंगे पहले मैदान का एक चक्कर लगाकर आते हैं और वो अपने साथियों के साथ कार्यक्रम को बीच में ही छोड़कर साथियों सहित मैदान का चक्कर लगाने निकल गए। वापस लौटने पर मंच पर चढ़ने से पहले सुरक्षा के सभी नियमों को ताक पर रखकर उन्होंने सभागार में उपस्थित लोगों से हाथ मिलाना शुरू कर दिया और कई लोगों से हाथ मिलाने के बाद ही वे मंच पर चढ़े। कार्यक्रम आरंभ होने से पूर्व राष्ट्रगान आरंभ हुआ तो उस दौरान भी नीतीश कुमार सभागार में उपस्थित परिचितों को नमस्कार करते दिखाई दिये और हाथ हिलाकर उनका अभिवादन करते नजर आए। उनके सहयोगियों ने इशारे से उन्हें दो-तीन बार टोका लेकिन वो फिर भी राष्ट्रगान के दौरान हाथ जोड़ते और हाथ हिलाते नजर आते रहे। इससे पूर्व भी एक अन्य सार्वजनिक कार्यक्रम में मंच पर उपस्थित भाजपा के नेता रवि शंकर प्रसाद के पांव भी नीतीश कुमार ने छू लिये। जबकि रवि शंकर प्रसात उम्र और ओहदे में उनसे काफी छोटे हैं। ऐसा ही कुछ उन्होंने गत तीस जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में गांधी जी को माला पहनाकर श्रद्धांजलि देने के साथ ही खुद ही तालियां बजानी शुरू कर दी। ऐसे कई और मामलों में नीतीश कुमार ने रह रहकर ऐसा किया जिसे देखने से लगता था कि मुख्यमंत्री को अचानक यह क्या हो गया है। नीतीश कुमार के बीते दिन खेल प्रतियोगिता के दौरान किये गये व्यवहार को लेकर विपक्षी दलों के नेताओं ने विधानसभा में आज सुबह खूब हंगामा किया। विपक्षी नेता अपने हंगामे के दौरान चिल्ला चिल्लाकर आरोप लगा रहे थे कि नीतीश कुमार मानसिक संतुलन खो बैठे हैं उनका मानसिक स्वास्थ्य ठीक नहीं है। वो एक अचेता अवस्था में जबरन चलाए जा रहे लाचार मुख्यमंत्री हैं जो हर दिन अपनी इस तरह की कार्रवाइयों से बिहार को बड़ा नुकसान पहुंचा रहे हैं। विपक्षी दलों ने तुरंत ही मुख्यमंत्री का इस्तीफा लेकर बिहार में राष्ट्रगान शासन लागू करने की मांग की और यह भी कहा कि जल्द ही नीतीश कुमार की मानसिक स्थिति की डाक्टरी जांच कराकर उसे जनहित में अविलंब सार्वजनिक किया जाए। विपक्षी दलों के इस पुरजोर विरोध के चलते बिहार विधानसभा सदन की कार्रवाई आधे दिन के लिए स्थगित करनी पड़ी।
अब बिहार में जो कुछ हो रहा है जिसे लेकर नीतीश कुमार निरंतर विपक्ष के टारगेट पर हैं यह माहौल सत्ता दल और उनके सहयोगी भाजपा को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है, इस मामले को भाजपा के हाई कमान को गंभीरता से देखना चाहिए कि क्या वास्तव में नीतीश कुमार अस्वस्थ्य हैं और मानसिक संतुलन खो बैठे हैं तो ऐसे में बिहार की बागडोर उनके हाथों में सौंपे रखना राजनीतिक तौर पर एक बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है। अगर यह विपक्ष का प्रायोजित एजेंडा है तो मुहिम चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।