पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित विकल्प हैं ग्रीन पटाखे : डा.बीपी त्यागी

गाजियाबाद। प्रसिद्ध ईएनटी सर्जन और शिक्षाविद् प्रोफेसर (डॉ.) बृजपाल सिंह त्यागी ने दीपावली के अवसर पर नागरिकों से अपील की है कि वे प्रदूषण रहित और पर्यावरण के अनुकूल ग्रीन पटाखों का ही प्रयोग करें। डॉ. त्यागी ने बताया कि पारंपरिक पटाखे जहाँ एक ओर वायु प्रदूषण बढ़ाते हैं, वहीं दूसरी ओर धुएं और गैसों के कारण गले, कान और सांस की नलियों पर भी बुरा प्रभाव डालते हैं। उन्होंने ग्रीन पटाखों की संरचना और उनके लाभों की विस्तृत जानकारी साझा की। डॉ. त्यागी ने कहा कि ग्रीन पटाखों में आॅक्सीडाइजर, ईंधन, बाइंडर और रंग देने वाले रसायन सभी को इस प्रकार नियंत्रित किया गया है कि ये पारंपरिक पटाखों की तुलना में 30 से 40 प्रतिशत कम प्रदूषण फैलाते हैं। पारंपरिक पटाखों में जहाँ पोटैशियम नाइट्रेट, बेरियम नाइट्रेट और भारी धातुएँ जैसे बेरियम व स्ट्रोंशियम उपयोग होते हैं, वहीं ग्रीन पटाखों में इनकी जगह सोडियम नाइट्रेट या पोटैशियम लवण सीमित मात्रा में प्रयोग किए जाते हैं ताकि धुआँ और जहरीली गैसें कम निकलें।
उन्होंने बताया कि इन पटाखों में सल्फर और एल्युमिनियम पाउडर की मात्रा नियंत्रित होती है, जिससे वातावरण में कार्बन डाईआक्साइड और नाइट्रोजन आक्साइड जैसी गैसों का उत्सर्जन काफी हद तक कम होता है। CSIR-NEERI द्वारा विकसित तकनीक से तैयार किए गए ये पटाखे प्रदूषण घटाने के साथ-साथ ध्वनि स्तर भी नियंत्रित रखते हैं।
डॉ. त्यागी ने बताया कि हालांकि ग्रीन पटाखे पारंपरिक पटाखों से कम हानिकारक हैं, लेकिन फिर भी इनमें उत्पन्न होने वाला नॉइज पोल्यूशन (ध्वनि प्रदूषण) एक गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि ग्रीन पटाखों से निकलने वाला शोर लगभग 124 डेसिबल तक पहुंचता है, जो अत्यधिक हानिकारक स्तर है। इस शोर में व्यक्ति 3 मिनट से अधिक समय तक नहीं रह सकता, क्योंकि इससे कानों के पर्दे पर दबाव, सुनने की क्षमता में कमी और मानसिक तनाव जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों के आस-पास पटाखे जलाने से बचें। डॉ. त्यागी ने बताया कि ग्रीन पटाखों में पारंपरिक रसायनों की जगह बायोडिग्रेडेबल बाइंडर और पर्यावरण-अनुकूल यौगिकों का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें कुछ प्रमुख उदाहरण रहअर (SWAS (Safe Water Releaser), STAR (Safe Thermite Crackers) और SAFAL (Safe Minimal Aluminum) हैं, जो धुएं और सूक्ष्म कणों (PM2.5, PM10 को कम करने में सहायक हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदूषण के कारण हर साल दीपावली के बाद लोगों को गले में खराश, खांसी, सांस लेने में तकलीफ और कानों में दर्द जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। डॉ. त्यागी ने कहा, डॉक्टर होने के नाते मैं लोगों से निवेदन करता हूँ कि स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ग्रीन पटाखों का ही उपयोग करें और बच्चों को भी इसके लिए जागरूक बनाएं।
डॉ. बी.पी. त्यागी ने कहा कि ग्रीन पटाखों का उपयोग न केवल पर्यावरण की रक्षा करता है बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि इस दीपावली पर ह्लकम प्रदूषण झ्र ज्यादा प्रकाशह्व का संदेश अपनाएँ और सुरक्षित, स्वस्थ व पर्यावरण-मित्र पर्व मनाएँ।



