नीतीश से किनारा, हिन्दू-मुस्लिम का सहारा !

कमल सेखरी
बिहार का चुनाव जितनी तेजी से बदलकर हर रोज नए पैंतरे सामने ला रहा है उसको देखने से यही लग रहा है कि अगले चार महीने तो गहमा गहमी के बीच निकलेंगे ही साथ ही चार महीनों में जो समीकरण तेज रफ्तार से बदलेंगे वो समूचे देश को सकते में डाल देंगे। मतदाता पुननिरीक्षण तो कल आरंभ हो गया लेकिन जो और बदलते समीकरण हैं वो अधिक मायने रख रहे हैं वे ये हैं कि भाजपा इस बार के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार को एक किनारे लगा देगी और उनका ठीक वही हाल होगा जो महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे का हुआ है। दूसरा जो बड़ा पहलु सामने आ रहा है वो ये कि बिहार के चुनाव में हिन्दू-मुस्लिम का जो कार्ड खेला जाएगा वो अब तक ना तो लोकसभा के चुनाव में खेला गया और ना ही पिछले कुछ महीनों में हुए विधानसभा के चुनावों में देखने को मिला। हालांकि ये कोई नई बात नहीं कि भाजपा के शीर्ष नेता खुलकर यह नहीं बोल रहे कि बिहार में चुनाव तो नीतीश कुमार के नेतृत्व में होंगे लेकिन नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री बनेंगे इस पर बड़े नेता सार्वजनिक बयान देने में परहेज कर रहे हैं। अभी तक नीतीश कुमार को लेकर जेडीयू ने अलग-अलग संदेशों के साथ नीतीश कुमार की तस्वीर लगाकर सरेआम यह कहा है 25 से 30 फिर से नीतीश,इसके अलावा भी नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बताते हुए कई तरह के पोस्टर जेडीयू ने पटना सहित पूरे बिहार में चिपकाए हैं। लेकिन अब एनडीए ने नए पोस्टर मार्केट में डाल दिए हैं, उन आधा दर्जन पोस्टरों में केवल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ही फोटो और उन्हीं के संदेश से प्रचार किया जा रहा है। पहली बार ऐसा हुआ है कि जेडीयू के मुख्यालय पर भी एनडीए का वो पोस्टर चिपका है जिस पर सिर्फ प्रधानमंत्री की फोटो है नीतीश कुमार की नहीं है लिहाजा बिहार जेडीयू और भाजपा की दो समानंतर प्रचार प्रणालियों ने काम करना शुरू कर दिया है। दूसरी ओर अभी से भाजपा के कई बड़े नेताओं ने हिन्दू-मुस्लिम का कार्ड खेलने के साथ-साथ मुस्लिम समुदाये के लिए फिर उसी पुराने आचरण और भाषा शैली को अभी से अपना लिया है जो पूर्व के चुनावों में इस्तेमाल की जाती रही है। तीन दिन पहले पटना के गांधी मैदान में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने वक्फ बोर्ड पर लाए गए बिल के विरोध में एक रैली आयोजित की। तेजस्वी यादव ने कहा कि हमारी सरकार आई तो हम वक्फ बोर्ड का यह बिल फाड़कर कूड़े की टोकरी में फेंक देंगे। बस फिर क्या था, भाजपा के कई छोटे-बड़े नेताओं ने तेजस्वी को आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया। सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने यह तक कह डाला कि वक्फ बोर्ड की सारी जमीनें देश की संपत्ति हैं, हम इन्हें मुल्ला-मौलवियों के हाथ नहीं जाने देंगे। मौलाना तेजस्वी चाहे जो कहते फिरें ना तो सत्ता में आएंगे और ना ही ऐसा कुछ कर पाने की हिम्मत कर पाएंगे जैसा बोल रहे हैं। इसी के साथ-साथ बड़बोले सांसद गिरिराज सिंह ने भी एक कदम आगे बढ़ाकर मुस्लिम समुदाये पर प्रहार करते हुए तेजस्वी को चुनौती दे डाली। अभी चार महीने बाकी हैं। नीतीश कुमार से धीरे-धीरे किनारा करना भाजपा शुरू कर दिया है और बिहार के चुनाव को पूरी तरह से हिन्दू-मुस्लिम बनाकर अपना अभियान अभी से छेड़ दिया है। ऐसे में आने वाले अगले चार महीने और बिहार विधानसभा का चुनाव किस माहौल से होकर गुजरेगा इसके संकेत अभी से मिलने शुरू हो गए हैं।



