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भारत-पाक सीमा पर तनाव को लेकर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने ली तीनों सेनाओं के प्रमुखों की अहम बैठक

नई दिल्ली। भारत-पाक सीमा पर हालिया तनावपूर्ण घटनाओं और ड्रोन हमलों की श्रृंखला के बीच, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को तीनों सेनाओं थल सेना, नौसेना और वायुसेना के प्रमुखों के साथ अहम बैठक की। यह बैठक देश की सुरक्षा स्थिति की गहन समीक्षा के लिए बुलाई गई थी, जिसमें वर्तमान हालात के साथ-साथ भविष्य की रणनीतियों पर भी चर्चा की गई। सूत्रों के अनुसार, यह बैठक केवल परामर्श या समीक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें जवाबी रणनीति और सैन्य स्तर पर तैयारियों को मजबूत करने के ठोस कदमों पर भी मंथन हुआ। रक्षा मंत्री ने सेना प्रमुखों से सीमावर्ती क्षेत्रों की ताजा स्थिति, सैन्य जवाबी कार्रवाई और भविष्य में संभावित खतरों के बारे में विस्तृत जानकारी ली। 8 और 9 मई की मध्यरात्रि को पाकिस्तान द्वारा पश्चिमी सीमाओं पर ड्रोन और अन्य हथियारों के माध्यम से किए गए हमलों ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर भी बार-बार सीजफायर उल्लंघन किए गए हैं। हालांकि भारतीय सेनाओं ने सभी हमलों को सफलतापूर्वक निष्फल कर दिया और दुश्मन को करारा जवाब दिया। रक्षा सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान के इन प्रयासों को न केवल तकनीकी क्षमता से रोका गया, बल्कि भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान के आतंकवादी ठिकानों को भी निशाना बनाया है। आॅपरेशन सिंदूर के तहत अप्रैल के अंतिम सप्ताह में आतंकवादियों पर की गई कार्रवाई इसका एक बड़ा उदाहरण है। भारत सरकार ने न केवल सीमा पर जवाब दिया है, बल्कि सूचना के क्षेत्र में भी पाकिस्तान के मनोवैज्ञानिक युद्ध को विफल किया है। पाकिस्तान समर्थित सोशल मीडिया अकाउंट्स और मुख्यधारा की मीडिया द्वारा भारत में डर फैलाने और अस्थिरता पैदा करने की कोशिशें की गईं। लेकिन भारत सरकार और रक्षा प्रतिष्ठानों ने इन दुष्प्रचार अभियानों का सटीक जवाब देते हुए देशवासियों को सच्चाई से अवगत कराया। भारतीय सशस्त्र बलों ने दोहराया है कि वे देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। रक्षा मंत्री के साथ हुई बैठक में भी यह स्पष्ट किया गया कि भारत किसी भी नापाक मंसूबे को बर्दाश्त नहीं करेगा और हर चुनौती का जवाब दृढ़ता और शक्ति से दिया जाएगा। यह बैठक ऐसे समय पर हुई है जब सीमा पर हालात तेजी से बदल रहे हैं और पाकिस्तान की ओर से उकसावे की कार्यवाहियां लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में तीनों सेनाओं का एक मंच पर आकर समन्वय स्थापित करना भारत की सुरक्षा नीति का एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

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