नीतीश का विकल्प बनकर बिहार आ रहे हैं चिराग!

- चिराग बहुता छोड़ेंगे तो बहुता पाएंगे
- तेजस्वी की टक्कर पर चिराग ही होंगे युवा चेहरा
- क्या बिहार चुनाव के बाद खत्म हो जाएगी जेडीयू
कमल सेखरी
थोड़ा छोड़ बहुते को जाये, बहुता मिले ना थोड़ा पाये। ये कहावत हम दशकों से सुनते आ रहे हैं लेकिन बिहार में जो नए समीकरण निकलकर सामने आ रहे हैं उनको देखकर हमारी धारणा भी बन रही है और यह मानना भी एक नई शक्ल लेने जा रही है कि बहुता छोड़ थोड़े को आवे, इस बलिदान में बहुत कुछ पावे। चिराग पासवान का अचानक यह मन बनाना कि वो सांसद की कुर्सी छोड़कर कैबिनेट मंत्री का मोह त्यागकर बिहार आएंगे और अगला विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। अब ये कौन मान लेगा कि कोई भी नेता सांसद का पद छोड़कर विधायक बनेगा और अगर बिहार की नई सरकार में मंत्री बना भी दिया गया तो भी केन्द्र के मंत्री पद को छोड़कर राज्य का मंत्री पद क्यों स्वीकार करेगा। इसके पीछे बड़ा खेला है। क्योंकि वर्तमान परिस्थितियों में चिराग पासवान का कोई दूसरा विकल्प फिलहाल भाजपा के पास नहीं है जिसे वो आगे लेकर चल सके और जिस दिशा में एक साल से लगातार प्रयास कर रही है यानी नीतीश कुमार के विकल्प को ढूंढने का वो केवल और केवल चिराग पासवान के जरिये ही पूरा होता नजर आ रहा है। चिराग पासवान भी कई मौकों पर कह चुके हैं कि प्रधानमंत्री श्री मोदी मेरे पिता तुल्य हैं और मैं उनका हनुमान हूं। मेरे दिल में मोदी जी की तस्वीर वैसे ही अंकित है जैसे हनुमान के हृदय में प्रभु श्री राम अंकित थे। इससे ज्यादा अपना और वफादार प्रधानमंत्री को बिहार के सीएम के रूप में और कौन मिल सकता है। वैसे भी नीतीश कुमार अब 75 वर्ष के हो गए उनकी सेहत और मानसिक स्थिति कहा जाता है दोनों ही संतुलित नहीं हैं। ऐसे में आरजेडी के युवा नेता तेजस्वी यादव के सामने किसी युवा नेता को उतारने से ही एनडीए के दाल गल पाएगी। इसके लिए चिराग पासवान से बेहतर कोई दूसरा विकल्प फिलहाल एनडीए के पास नहीं है।
नीतीश कुमार को पिछले एक साल में बिहार भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने कई मौकों पर अपमानित किया और उनके खिलाफ कोई ना कोई साजिश रचने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। इतना ही नहीं नीतीश कुमार जिस कुर्मी समाज के प्रमुख नेता हैं और जिसके आधार पर पिछले बीस वर्षों से उनकी पार्टी निरंतर जीतती चली आ रही है उन्हें उस कुर्मी समाज में भी बिहार भाजपा के नेताओं ने अपमानित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। नीतीश कुमार को बताए बिना भाजपा के एक विधायक जो कुर्मी समाज से हैं उनके नाम से कुर्मी समाज का एक बड़ा सम्मेलन बुला लिया गया और नीतीश कुमार को सूचना दिये बिना पोस्टरों पर उनकी फोटो तो छाप दी लेकिन उन्हें सम्मेलन में आमंत्रित नहीं किया गया। ऐसे ही एक अन्य सार्वजनिक कार्यक्रम में जो गांधी जी की स्मृति में नीतीश कुमार ने स्वयं आयोजित किया उसमें भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपमानित किया गया। आयोजन में एक महिला गायिका को आमंत्रित किया गया था और जब उस गायिका ने महात्मा गांधी जी के सबसे प्रिय भजन रघुपति राघव राजा राम पतित पावन सीता राम, ईश्वर अल्लाह तेरो नाम, यह पंक्ति के गाते ही भाजपा के कार्यकर्ताओं ने पूरे आयोजन में हंगामा मचा दिया यह कहकर कि गायिका ने ईश्वर के साथ अल्लाह का नाम कैसे ले दिया। काफी देर हंगामा होने के बाद गायिका को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी और अपनी उस कथित विवादित पंक्ति को बदलकर यह गाना पड़ा कि ईश्वर श्री राम तेरा नाम, सबको सन्मति दे भगवान। यह आयोजन नीतीश कुमार के नाम से आयोजित किया गया था और जो हंगामा मचा उसे नीतीश कुमार बड़ी विवशता से देखते रहे, उनके कई बार खामोश कराने पर भी भाजपा का कोई कार्यकर्ता खामोश नहीं हुआ। इस दौरान नीतीश कुमार के ऐसे दिन भी निकले जब उनके युवा पुत्र निशांत कुमार ने अपने पिता नीतीश कुमार के लिए पहली बार बिहार की जनता से निरंतर कई दिन यह अपील की कि वो मेरे पिता का साथ दें और उन्हें दोबारा मुख्यमंत्री बनाने में अपना सहयोग प्रदान करें। अब चिराग पासवान यह कह तो जरूर रहे हैं कि वो केवल बिहार के प्रति अपने प्यार से जुड़कर ही केन्द्र सरकार में मिले इतने बड़े पदों को छोड़कर विधायिकी का चुनाव लड़ने आ रहा हूं लेकिन मेरी कोई मंशा मुख्यमंत्री बनने की नहीं है। हमारे मुख्यमंत्री पहले भी नीतीश कुमार थे आज भी नीतीश कुमार हैं और कल एनडीए के बहुमत में आने के बाद भी नीतीश कुमार ही रहेंगे। यह बात किसी भी बुद्धिजीवी के गले से नीचे नहीं उतर रही। सभी राजनीतिक विशेषज्ञों का आंकलन यही है कि प्रधानमंत्री मोदी चिराग पासवान को नीतीश कुमार का विकल्प बनाकर ही बिहार विधानसभा चुनाव में उतार रहे हैं। यह पहले से ही अनुमानित है कि जेडीयू 2025 के आखिर तक यानी बिहार के विधानसभा चुनाव होने के साथ ही अपना अस्तित्व पूरी तरह से बिहार में खो देगी। उसके जो 12 सांसद फिलहाल बैसाखी बनकर मोदी सरकार का सहारा बने हुए हैं वो भी जेडीयू से बिखर जाएंगे और अपेक्षित संख्या बनाकर एक नया दल खड़ा करके मोदी सरकार के साथ पहले जैसे ही खड़े रह सकते हैं।


