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शरीर और मन से क्रियाशील रहें: योगाचार्या श्रुति सेतिया

गाजियाबाद। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में स्वास्थ्य क्या है विषय पर आॅनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता योगाचार्या श्रुति सेतिया ने कहा कि केवल शारीरिक नहीं अपितु मानसिक रूप से स्वस्थ होना आवश्यक है। प्रत्येक मानव चाहता है कि वह कभी भी रोग ग्रस्त ना हो, सदैव स्वस्थ, चुस्त तंदुरुस्त रहे। भरपूर सुख ,शांति, ऐश्वर्य प्राप्त करें । ऐसा तभी हो सकता है जब वह स्वास्थ्य के नियमों का यथावत पालन करें । सुमार्ग का अवलंबन करें, धर्म -अधर्म, पाप -पुण्य, अच्छाई -बुराई के भेद को जानकर सदैव धर्म परायण बने। व्यक्ति तभी अपने जीवन का पूरा आनंद उठा सकता है जब वह शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से स्वस्थ रहे। स्वास्थ्य का सीधा संबंध क्रियाशीलता से है जो व्यक्ति शरीर और मन से पूरी तरह क्रियाशील है उसे ही पूर्ण स्वस्थ कहा जा सकता है। हमें अपने स्वास्थ्य की रक्षा करनी होगी ताकि हमारे जीवन की यात्रा शुरू से ही सही दिशा में जा सके। छोटी आयु से हमें प्रयास करने होंगे। हमारी आदतें, हमारी मनोवृति, हमारे विचार और संस्कार वैसे ही स्थिति में डालने लगेंगे जैसी स्थिति स्वास्थ्य की रक्षा करने के लिए आवश्यक होती है। एलोपैथिक दवाइयों पर ही निर्भर ना रहें। दवाइयों का मतलब स्वास्थ्य नहीं होता। स्वास्थ्य का मतलब सुबह जल्दी उठना, पेट व दांत साफ करके प्राणायाम, योग अभ्यास करना, संतोषी जीवन जीना, नियमित संध्या करना परमात्मा का धन्यवाद करना, किसी से ईर्ष्या ना करना, किसी का अपकार ना करना। इन नियमों का पालन करने से ही मिलता है उत्तम स्वास्थ्य। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि केवल बाहरी या दिखावटी प्रसन्नता नहीं अपितु आंतरिक भी होनी चाहिये। प्रसन्नचित व्यक्ति को देखकर मन स्वयं ही आहादित हो जाता है और मन को सुख व शांति मिलती है । हमे अपने जीवन को ही सुगंधित बनाना चाहिए। अध्यक्ष योग शिक्षक शांता तनेजा व मुख्य अतिथि सोहन लाल आर्य ने स्वस्थ रहने और प्रसन्न रहने के कई लाभ व कारण समझाये। राष्ट्रीय मंत्री प्रवीण आर्य ने हास्य योग का महत्व बताया। योगाचार्य सौरभ गुप्ता के जन्मदिन पर बधाई दी गई। गायिका संगीता आर्या,बिंदु मदान, प्रवीना ठक्कर,राजश्री यादव, दीप्ति सपरा,रेखा गौतम, ईश्वर देवी,जनक अरोड़ा, सुखवर्षा सरदाना, नरेन्द्र आर्य सुमन,रवीन्द्र गुप्ता,नरेश प्रसाद आर्य,अशोक गुगलानी आदि ने मधुर गीत सुनाये। प्रमुख रूप से राजेश मेहंदीरत्ता, अमरनाथ बत्रा, वीरेन्द्र आहूजा, उर्मिला आर्या, प्रकाशवीर शास्त्री व आस्था आर्या आदि उपस्थित थे।

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