
कमल सेखरी
अब क्या कहें या ना कहें। किस विषय को लेकर कुछ लिखें और किस विषय को छोड़ दें। मुददे इतनी तेजी से घटित हो रहे हैं और एक से एक बढ़कर संवेदनशील बातें सामने आ रही हैं कि चर्चा एक मुददे से शुरू करते नहीं कि दूसरा मुददा सामने आकर खड़ा हो जाता है। बीते दिनों दो पड़ोसी देशों के बीच कुछ ऐसी असामान्य घटनाएं घटित हुई कि उन पर पूरे विश्व का ध्यान गया और स्वभाविक है कि भारत का ध्यान बड़ी प्रमुखता से गया। ब्लूचिस्तान जो आकार में इतना बड़ा है कि पाकिस्तान का 40 फीसदी हिस्सा उसमें आता है और वहां आबादी मात्र डेढ़ करोड़ होने पर भी उनके हौसले इतने बुलंद होकर निकले कि पहले खैबर पख्तूनख्वा के पास रेलगाड़ी जफर एक्सप्रेस को रोका गया और उसमें सवार पाक सैनिकों की बड़ी संख्या में हत्या कर दी। ब्लूचिस्तान मारे गए इन लोगों की संख्या 247 बता रहा है जबकि पाकिस्तान इस संख्या को 30 से 35 के बीच ही आंककर बता रहा है। इतनी बड़ी घटना के बाद अभी दो दिन ही बीते थे कि क्वेटा के निकट राजमार्ग पर पाकिस्तान जा रहे सैनिकों के एक काफिले जिसमें बताया जाता है कि आठ से दस बसें शामिल थीं उसे आत्मघाती हमला करके आरडीएक्स से पहली बस को उड़ाकर राख कर दिया गया बाकी बसों में बैठे पाक सैनिकों पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर नब्बे सैनिक मार गिराए। अब ब्लूचिस्तान में इतनी हिम्मत अचानक कैसे आ गई मात्र डेढ़ करोड़ की आबादी पाक सैनिकों की जगह-जगह तैनाती और एक बड़े हिस्से में चीन की कई बड़ी कंपनियों में निवेश के साथ चीनी नागरिकों की उपस्थिति ऐसे माहौल में गरीबी से जूझ रहे ब्लूचिस्तान में अचानक इतना दम किसने भर दिया कि उसने एक के बाद इतने बड़े हमले पाकिस्तान की सेना पर कर डाले। इसमें दोराय नहीं जब भारत पाकिस्तान के बीच बंटवारा हुआ तो पाकिस्तान के बड़े हिस्से में मुस्लिम समर्थन में ब्लूचिस्तान की मिलेट्री ने अपना बड़ा सहयोग दिया। लेकिन पाकिस्तान ने अपनी फौज बनते ही एक साल के अंदर ही ब्लूचिस्तान में अपने सैनिक भेजकर वहां कब्जा कर लिया। क्योंकि ब्लूचिस्तान में सोने-चांदी, तांबे और अन्य कई कीमती खनिजों की पहाड़ों और खानों में भरमार है इसलिए पाकिस्तान ने पहला काम ही ब्लूचिस्तान पर कब्जा करने का किया। ब्लूचिस्तान में जितना कीमती खनिज था वो पाक सैनिक थोड़ा थोड़ा करके निकालकर ले गए और वर्तमान में चीन के निवेश से भी जो उद्योग वहां लगे हैं उनके निर्माण का भी अधिकांश लाभ पाक वहां से निकालकर ले जाता है। ब्लूचिस्तान आठ दशक पहले जितना गरीब था उससे कहीं और अधिक गरीब होता चला गया और आज वहां के आवाम के पास ना तो कोई रोजगार है और ना ही खाने को रोटी। हमारी भारत सरकार पहले भी कई बार कह चुकी है कि हम हर सूरत आजाद कश्मीर को पाकिस्तान से अलग करके भारत में मिलाने का काम करेंगे।
यह आश्वासन हमारे गृहमंत्री अमित शाह संसद में भी दे चुके हैं। अभी एक सप्ताह पहले ही हमारे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपनी एक सार्वजनिक बयान में बड़े खुले शब्दों में कहा कि वो समय आ गया है कि आजाद कश्मीर में बस रहा पाकिस्तान अपनी आजादी की मांग को लेकर पाकिस्तान से किनारा करके भारत के साथ जुड़ जाएगा। अब ये जो संकेत पिछले एक सप्ताह में रह रहकर आएं हैं और बड़ी पुरजोरता से ब्लूचिस्तान में पाकिस्तानी सैनिकों के घुटने टिकवाने का काम किया है उससे स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि ब्लूचिस्तान भी बांग्लादेश की राह चल निकला है। भारत ने जैसे पहले बांग्लादेश की पीठ थप थपाकर उसे अलग राष्ट्र बनाने की पहचान दी थी वैसे ही पहचान अब हो सकता है कि वो ब्लूचिस्तान को भी दे दे। अगर ऐसा हुआ तो ब्लूचिस्तान और कश्मीर के बीच पाकिस्तान ने जो खाई बना रखी है वो भर दी जाएगी अैीर दोनों के बीच आवाजाही स्वतंत्रता के साथ शुरू हो जाएगी। यह संभावना है हकीकत में जल्द ही बदल सकती है और भारत को इसमें अपना साथ जोड़ने में गुरेज नहीं करनी चाहिए।