क्या बिहार के किसान हत्यारे हैं !

कमल सेखरी
बिहार के किसान आपराधिक प्रवृत्ति के हैं, हत्यारे हैं और सुपारी लेकर हत्या करने का काम करते हैं। यह कथन बिहार के दो सबसे बड़े पुलिस अधिकारियों ने जो बयान मीडिया को दिये हैं उससे निकलकर आता है। हालांकि इन दोनों अधिकारियों ने सीधा और स्पष्ट आरोप नहीं लगाया लेकिन जो बयान दिये उनका अभिप्राय: निकलकर यही आता है। एडीजी के कृष्ण ने अपने बयान में मीडिया से कहा कि पिछले कई वर्षों से मई, जून, जुलाई में बिहार में हत्याएं बढ़ जाती हैं क्योंकि इन दिनों फसल काटने के बाद किसान खाली हो जाते हैं और ये घटनाएं इसी कारण से बढ़ जाती हैं। एडीजी के कृष्ण के इस बयान की पुष्टि डीजीपी विनय कुमार ने भी ऐसा ही एक बयान देकर इस कथनी पर अपनी मुहर लगा दी। विनय कुमार ने कहा क्योंकि किसान बारिश के दिनों में खाली रहता है और उसके पास करने को कोई और काम नहीं होता इसलिए वो इस रास्ते चल पड़ता है और बिहार में अचानक हत्याओं का दौर शुरू हो जाता है। इन दोनों अधिकारियों के इन बयानों की निंदा विरोधी दलों के नेताओं के साथ-साथ सत्ता दल के नेताओं ने भी खुले शब्दों में की और कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को चाहिए कि इन दोनों अधिकारियों से अपने इन बयानों पर माफी मंगवाएं नहीं तो उन्हें बर्खास्त करें। बिहार में पिछले छह महीने में 670 से अधिक हत्याएं हुई हैं और चल रहे जुलाई माह में एक जुलाई से लेकर 17 जुलाई के बीच 53 हत्याएं एक के बाद एक हुई हैं। इनमें से 90 फीसदी हत्याएं बिहार की राजधानी पटना में हुई हैं और बाकी बिहार के अन्य प्रांतों में हुई हैं। बिहार में जो हत्याएं हुर्इं उनमें कई तो कारोबारी और उद्यमी थे, डाक्टर-इंजीनियर थे, वकील और शिक्षक के साथ-साथ हत्या राजनीतिक नेता की भी हुई है। सीमांचल से जुड़े पुर्णिया विधानसभा क्षेत्र में तो एक ही परिवार के 5 सदस्यों को तलवार से काटकर मौत के घाट उतार दिया गया। हत्याओं के इस दौर की निंदा एनडीए घटक के नेता चिराग पासवान ने भी बड़े खुले शब्दों में की है, चिराग पासवान ने कहा कि लगता ही नहीं बिहार में कानून व्यवस्था बाकी रह गई है, लग ऐसा रहा है कि हत्यारे अचानक आसमान से गिरे हैं और उन्होंने एक के बाद एक हत्याएं करनी शुरू कर दी हैं। वहीं दूसरी ओर भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने जिनमें उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा और सम्राट चौधरी के साथ और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी का कहना है कि चुनाव के दिनों में सत्ता दल को बदनाम करने की नजर से ये सभी हत्याएं विपक्षी दलों का एक गहरा षडयंत्र है और वो नीतीश कुमार को बदनाम करना चाहते हैं। वहीं विपक्षी दल के नेताओं ने यह आरोप भी लगा दिया कि एनडीए में मुख्य दल भाजपा खुद ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को कमजोर करने पर लगी है और ऐसा वातावरण बना रही है जिससे चुनाव के बाद नीतीश कुमार को सुगमता से किनारे लगा दिया जाए। अब कारण जो भी है हत्याएं जिन वजहों से हो रही है और कोई भी कर रहा है उसे रोकना और हत्यारों को पकड़कर जेल भेजना प्रशासन और पुलिस का काम है। इधर-उधर के बेबुनियाद आरोप लगाने से हत्याओं का यह क्रम टूटने वाला नहीं है और चुनाव से पहले बिहार का वातावरण इन बयानों से बदलने वाला भी नहीं है। जहां एक ओर मतदाता पुनरीक्षण की कार्यवाही को लेकर सियासी नेता चुनाव आयोग पर दुनियाभर के आरोप लगा रहे हैं वहीं दूसरी ओर बिहार में हत्याओं की आई इस बाढ़ से वातावरण तनावपूर्ण बना हुआ है। इन कारणों का आने वाले चुनाव के नतीजों पर क्या असर पड़ेगा यह तो समय बताएगा लेकिन इसका लाभ महागठबंधन की विपक्षी दलों को अवश्य मिलेगा इसमें दोराय नहीं है।



