उत्तर प्रदेशगाजियाबाद

एंटी करप्शन टीम ने जीडीए के सुपरवाइजर को दो लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों किया गिरफ्तार

गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण भ्रष्टाचार की काली कोठरी यूं ही नहीं कहा जाता है, बल्कि इसके पीछे वो सच्चाई छिपी रहती है जिसके बल पर गाजियाबाद विकास प्राधिकारण के कर्मचारी अवैध निर्माण कराकर अवैध उगाही में मशगूल रहते हैं। ऐसा ही एक मामला सोमवार को मुरादनगर में उजागर हुआ है। मुरादनगर में एंटी करप्शन टीम ने जीडीए के एक सुपरवाइजर को दो लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। जबकि जेई मौके से फरार हो गया। जीडीए के जेई और सुपरवाइजर ने सुराना गांव के सुरेंद्र यादव से बिना नक्शा पास किए निर्माण के लिए रिश्वत मांगी थी। एंटी करप्शन टीम ने शिकायत मिलने पर सोमवार को कार्रवाई करते हुए सुपरवाइजर को दबोच लिया।
जानकारी के अनुसार सुराना गांव निवासी सुरेंद्र यादव रावली मार्ग पर चुंगी नंबर तीन के पास एक आॅफिस का निर्माण करवा रहे हैं। आरोप है कि जीडीए का जेई बिना नक्शा स्वीकृत किए निर्माण कार्य के लिए उनसे रिश्वत मांग रहा था। शिकायतकर्ताओं ने इसकी शिकायत एंटी करप्शन शाखा मेरठ से की थी। सुराना गांव के सुरेंद्र कुमार बालाजी वाले और एडवोकेट महावीर सिंह के मुताबिक बिना नक्शा पास किए निर्माण के लिए रिश्वत मांगी गई थी। मुरादनगर में एंटी करप्शन टीम ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) के सुपरवाइजर को दो लाख रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। इस दौरान जूनियर इंजीनियर (जेई) अजीत कुमार मौके से फरार हो गया। सुपरवाइजर राजकुमार को पकड़ लिया। इस कार्यवाही से जीडीए अधिकारियों में हड़कप मचा है । ऐसा नहीं कि जीडीए में रिश्वतखोरी का ये पहला मामला है जो प्रकाश में आया है, बल्कि इससे पहले भी कई मर्तबा इस तरह की गिरफ्तारी और कार्रवाई होती रही हैं।

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