तारीफ-तारीफ में ही बढ़ गया अमेरिकी टैरिफ!

कमल सेखरी
तुमने ये क्या किया पापा ट्रंप। हम तो तुम्हारी तारीफों के पुल बांधते थक गए और तुम नाराज होकर हम पर वार पर वार करते जा रहे हो। हमारी तारीफ-तारीफ के इस दौर में तुमने और जो किया सो किया अब टैरिफ भी बढ़ा दिया। जहां हमारे देश के निर्यातक पांच प्रतिशत से बारह प्रतिशत तक ही निर्यात शुल्क दे रहे थे उसे तुमने यकायक बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया। इतना अधिक निर्यात शुल्क अमेरिका ने विश्व के किसी और दूसरे देश पर नहीं किया। इतना ही नहीं तुमने बड़ी बेबाकी से ये तक कह दिया कि अगर रूस से तेल लोगे तो हम तुम पर और अधिक पैनाल्टी लगा देंगे। पापा ट्रंप यहीं तक नहीं रुके उन्होंने यह भी कहा कि हमने पाकिस्तान में अपनी तेल कंपनियों के तेल का भंडार संकलित करने के लिए केन्द्र बना दिए हैं और अब भारत को चाहिए कि वो पाकिस्तान से अमेरिकी तेल भविष्य में खरीदे। भारत अब तक ईरान से तेल का आयात कर रहा था और ईरान दशकों पुरानी हमारी दोस्ती का लिहाज करते हुए हमें तेल उधार भी दे देता था और भारतीय रुपये में भुगतान भी ले लेता था लेकिन हमने अपने निकटतम पुराने मित्र ईरान को नाराज कर दिया क्योंकि हम इजराइल और ईरान युद्ध के दौरान खुलकर इजराइल के साथ खड़े हो गए। ऐसा हमने संभवत: अमेरिका के दबाव में ही किया। अब हम तेल आयात करने के लिए पाकिस्तान का मुंह देखेंगे ऐसा हमें इसलिए भी करना होगा कि कहीं अमेरिका हमसे और अधिक नाराज ना हो जाए। अमेरिका अगर हमसे नाराज होता है तो यह संभावना भी बन सकती है कि उसने भारत पर 25 प्रतिशत का निर्यात शुल्क जो लगाया है वो उसे बढ़ा भी सकता है। ऐसे में हमारे वो व्यवसायी जो अमेरिका को बड़ी तादाद में कई वस्तुओं का निर्यात कर रहे हैं वो निसंदेह संकट में आ जाएंगे। ऐसे व्यवसाइयों में अडानी समूह सबसे आगे है क्योंकि वो अमेरिका को स्टील सहित और भी कई भारतीय उत्पादों का भारी मात्रा में निर्यात कर रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने आपरेशन सिंदूर के दौरान बार-बार गिनती करें तो तीस बार रह रहकर ये कहा है कि उसने भारत-पाक के बीच छिड़े छदम युद्ध को अपने प्रयासों से रुकवाया है। पाकिस्तान की सत्ता और प्रशासन ट्रंप की इस बात को पानी भर रहे हैं कि उन्होंने ट्रंप के कहने पर ही युद्ध विराम का फैसला लिया है। यही कारण रहा कि ट्रंप ने पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष आरिफ मुनीर को व्हाइट हाउस बुलाकर अपने साथ बैठाकर लंच कराया, ऐसा पहली बार हुआ जब अमेरिका के किसी राष्ट्रपति ने विश्व के किसी देश के किसी सेनाध्यक्ष को कभी ऐसा भोज का न्योता दिया हो। इतना ही नहीं भारत जिस पाकिस्तान को आतंकवादियों की जननी बताता है और पूरे विश्व से पाकिस्तान को एक आतंकी देश घोषित करने का अनुरोध करता है उस पाकिस्तान को अमेरिका ने इंटरनेशनल एंटी टेरेरिस्ट सेल का उपाध्यक्ष बना दिया और अब अमेरिका के बड़े अधिकारी पाकिस्तान आकर बैठकें कर रहे हैं कि कैसे विश्व में फैले आतंकवाद को रोका जाए, यानी तिजोरी की चाबी चोर के हवाले कर दी गई अब हम भविष्य में कैसे कह पाएंगे कि पाकिस्तान एक आतंकी मुल्क है, आतंकियों को पनाह देता है और उनका पालन पोषण करता है। क्योंकि पाकिस्तान तो अब आतंकियों को नियंत्रित करने वाला देश बन गया है। ट्रंप ने ऐसा करके भारत पर एक बहुत बड़ा थप्पड़ सा मारा है, हमने आपरेशन सिंदूर के दौरान जो भी नुकसान पाकिस्तान में बनाए गए आतंकी अड्डों को नष्ट करके पहुंचाया और उनके एयरबेस जो हमने नष्ट किए थे उन सबको ठीक ठाक करने के लिए अमेरिका ने अपनी कई विभिन्न वित्तीय संस्थाओं के माध्यम से कई हजार करोड़ डालर पाकिस्तान को दिलवाए हैं। अब हम ट्रंप को माई बेस्ट फ्रेंड, हाऊ आर यू मोदी, नमस्ते ट्रंप जैसे बड़े-बड़े आयोजन करके उसे खुश करने की कोशिश में लगे रहे और हमने अमेरिका में जाकर ट्रंप को जिताने के लिए वहां रह रहे चालीस लाख भारतीयों से ट्रंप को जिताने की अपील तक भी की, भले ही केवल 10 प्रतिशत प्रवासी भारतीयों ने ही ट्रंप को वोट दिए और ट्रंप बुरी तरह से हार गए जिसमें ज्यो बाइडन बड़े बहुमत से जीते भी। अब दूसरा चुनाव ट्रंप बिना मोदी का सहयोग लिए जीते और काफी मतों से जीते। इस तरह की कई बातें एक साथ एक बड़ा प्रहार बनकर अमेरिका की नाराजगी हम पर एक कहर की तरह बरपा की जा रही है। हम ऐसा सबकुछ होते हुए बर्दाश्त क्यों कर रहे हैं इस पर प्रश्न चिन्ह लग रहा है। अब से पूर्व भारत के किसी प्रधानमंत्री ने अमेरिका के किसी भी दबाव को नहीं माना और आज हम अमेरिका के कई तरह के दबावों में ऐसे दबे हुए हैं कि बाहर निकलने में हमारी नीति और नीयत नजर नहीं आ रही। कुल मिलाकर हम तारीफ-तारीफ में लगे रहे और ट्रंप उस तारीफ के बीच टैरिफ बढ़ाकर ले गए।

